कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना? CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अगले मुख्य न्यायाधीश के नाम से उठाया पर्दा

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अगले CJI के लिए जस्टिस संजीव खन्ना का नाम सुझाया है. दरअसल यह एक परंपरा है, जिसमें भारत के सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायाधीश दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश का नाम सामने रखते है.

जस्टिस संजीव खन्ना और CJI डीवाई चंद्रचूड़ Image Credit: Internet

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 नवंबर 2022 को भारत के 50 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई थी. सीजेआई के रूप में उनका कार्यकाल 10 नवंबर को समाप्त होगा. अब अगले CJI का चयन होना है. ऐसे में डीवाई चंद्रचूड़ ने जस्टिस संजीव खन्ना का नाम सुझाया है. दरअसल यह एक परंपरा है, जिसमें भारत के सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायाधीश दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश का नाम सामने रखते है.

भूटान में एक कार्यक्रम में चंद्रचूड़ ने कहा कि उनका मन भविष्य और अतीत को लेकर भय और चिंताओं से बहुत अधिक घिरा हुआ है. साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे थोड़ा कमजोर होने के लिए माफ करें. मैं दो साल तक देश की सेवा करने के बाद इस साल नवंबर में भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना पद छोड़ दूंगा. मैं खुद को ऐसे सवालों पर विचार करते हुए पाता हूं जैसे, क्या मैंने वह सब हासिल किया जो मैंने करने का लक्ष्य रखा था? इतिहास मेरे कार्यकाल का कैसे मूल्यांकन करेगा? क्या मैं चीजों को अलग तरीके से कर सकता था? मैं न्यायाधीशों और कानूनी पेशेवरों की भावी पीढ़ियों के लिए क्या विरासत छोड़ूंगा?

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना कौन हैं?

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया. इसके बाद तीस हजारी परिसर में जिला अदालतों में प्रैक्टिस की. उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की. न्यायमूर्ति खन्ना ने आयकर विभाग के वरिष्ठ स्थायी वकील के रूप में भी काम किया और साल 2004 में दिल्ली के स्थायी वकील (सिविल) बने. वह दिल्ली हाई कोर्ट में आपराधिक मामलों में न्याय मित्र के रूप में भी पेश हुए. साल 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश और 2006 में स्थायी न्यायाधीश बने.

वर्तमान में यहां है कार्यरत

न्यायमूर्ति खन्ना ने दिल्ली न्यायिक अकादमी, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र और जिला न्यायालय मध्यस्थता केंद्रों में अध्यक्ष/प्रभारी न्यायाधीश जैसे पदों पर भी कार्य किया. 18 जनवरी 2019 को उन्हें किसी भी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले ही सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में प्रोमोट कर दिया गया. वह इस वक्त National Legal Services Authority के कार्यकारी अध्यक्ष और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हैं.