आपका हेल्थ बीमा क्लेम भी हो सकता है खारिज! जानें इससे बचने के तरीके

स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बीमा लोकपाल में 97 फीसदी शिकायतें क्लेम रिजेक्शन से जुड़ी हैं. बीमा दावों को लेकर बढ़ती समस्या न केवल पॉलिसीधारकों के लिए एक चुनौती है, बल्कि बीमा कंपनियों के भरोसे पर भी सवाल खड़ा करती है.

बीमा को लेकर IRDAI ने शुरू की नई व्यवस्था Image Credit:

हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आएं जब लोगों का स्वास्थ्य बीमा क्लेम कंपनियों द्वारा खारिज कर दिया जाता है. नवंबर में Insurance Brokers’ Association of India (IBAI) ने भारत में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्शन का आंकड़ा जारी किया. इसके बाद जारी 2023-24 की बीमा लोकपाल वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 95 फीसदी स्वास्थ्य बीमा शिकायतें आंशिक या पूर्ण दावे खारिज होने से संबंधित हैं. इस रिपोर्ट ने एक बार फिर इन समस्याओं पर रोशनी डाल दी है. ऐसे में अगर आप भी कभी इन दिक्कतों का सामना करते हैं तो आर्टिकल में दिए स्टेप से इसका समाधान हो सकता है.

दावों के खारिज होने के प्रमुख कारण

लोकलसर्कल्स द्वारा किए गए हालिया सर्वे में यह सामने आया कि पिछले तीन वर्षों में 50 फीसदी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों ने अपने दावों के आंशिक या पूर्ण खारिज होने का सामना किया. इनमें सबसे आम कारण हैं:

  • अस्पताल के ‘अवास्तविक’ खर्च
  • पहले से मौजूद बीमारियों की जानकारी न देना
  • कमरे के किराए पर सीमा के कारण आंशिक भुगतान

बीमा कंपनियां अक्सर पॉलिसी में उल्लेखित ‘उचित और सामान्य शुल्क’ के आधार पर दावों को खारिज कर देती हैं. इसके अलावा, पहले से मौजूद बीमारियों के आधार पर दावों को नकारा जाना भी आम है.

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बीमा लोकपाल: समस्या का समाधान

अगर आपका दावा खारिज हो जाता है, तो आप बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) को शिकायत भेज सकते हैं. इसके अलावा, IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. अगर 30 दिनों के भीतर आपकी शिकायत का समाधान नहीं होता या उत्तर नहीं मिलता है तो आप अपने जिले के बीमा लोकपाल कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं. लोकपाल के माध्यम से शिकायत दर्ज करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता.

अगर लोकपाल को लगता है कि मध्यस्थता से मामला सुलझ सकता है, तो एक महीने के भीतर आदेश जारी किया जाएगा. अन्य मामलों में, सभी दस्तावेज प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर ‘निर्णय’ पारित किया जाएगा.

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