Jio IPO को क्यों करें सब्सक्राइब? ब्रोकरेज फर्म्स ने बता दी ताकत और कमजोरी, पैसा लगाने से पहले जान लें हर जरूरी बात
Jio IPO News: यह बड़ा IPO, जिसमें 1,065-1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर नए शेयर जारी किए जाएंगे, 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को तय की गई है.
Highlights
- 1,065-1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर नए शेयर जारी किए जाएंगे.
- एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को तय की गई है.
- संस्थागत निवेशकों ने जियो के इस पब्लिक इश्यू में दिलचस्पी दिखाई है.
Jio IPO News: इस हफ्ते आने वाले 30,213 करोड़ रुपये तक के IPO से पहले, कई ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि अपनी टेलीकॉम इकाई में 5G रोलआउट का काम काफी हद तक पूरा कर लेने के बाद, अब जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) अपनी अगली ग्रोथ के लिए AI, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाओं और अपनी इन-हाउस तकनीक के निर्यात पर ध्यान दे रहा है.
यह बड़ा IPO, जिसमें 1,065-1,119 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर नए शेयर जारी किए जाएंगे, 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को तय की गई है.
संस्थागत निवेशकों ने दिखाई है दिलचस्पी
सूत्रों के अनुसार, देश और विदेश की प्रमुख संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) ने जियो प्लेटफॉर्म्स के इस पब्लिक इश्यू में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की दिलचस्पी दिखाई है. सूत्रों ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स में पहले से निवेश कर चुकी ‘अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी’ (ADIA) ने भी इस IPO के संस्थागत हिस्से में भाग लेने में दिलचस्पी दिखाई है, हालांकि अभी तक इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.
इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक
एमके ग्लोबल (Emkay Global) ने कहा कि कंपनी का अपना इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक उसे आगे की ग्रोथ के लिए मजबूत स्थिति में लाता है. उन्होंने बताया कि जियो ने अपनी मजबूत इन-हाउस टेक्नोलॉजी डेवलप की है, जिसमें ‘मेड इन इंडिया’ एंड-टू-एंड 5G स्टैक शामिल है. इसमें 4G+5G कॉम्बिनेशन कोर, 5G डिवाइस, और कंपनी के अपने ‘ऑपरेशंस सपोर्ट सिस्टम’ (OSS) व ‘बिजनेस सपोर्ट सिस्टम’ (BSS) शामिल हैं.
इसकी अपनी ‘पॉइंट-टू-मल्टीपॉइंट अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो’ (UBR) तकनीक ने इसे भारत की पहली ऐसी कंपनी बना दिया है, जो UBR के ज़रिए ‘फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस’ की सुविधा देती है. एमके (Emkay) ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स का लक्ष्य चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थानीय ऑपरेटरों के साथ मिलकर इन तकनीकों को लागू करना है.
सब्सक्राइब करें या नहीं?
कंपनी के बाजार में अग्रणी होने, कीमतों को तय करने की क्षमता, विकास के मौकों और काम पूरा करने के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, ब्रोकरेज फर्म ने इस इश्यू को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है.
क्या हैं रिस्क फैक्टर्स?
एमके ग्लोबल के अनुसार, मुख्य जोखिमों में स्पेक्ट्रम की लागत और नियमों में बदलाव शामिल हैं. इसके अलावा, बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का असर प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) और ग्राहकों के कंपनी छोड़कर जाने (Customer Churn) पर पड़ सकता है. साथ ही, रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों पर निर्भरता, पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरण विक्रेताओं पर अधिक निर्भरता, और विदेशी मुद्रा से जुड़े जोखिम भी इसमें शामिल हैं.
कमाई करने के नए मौके
GEPL ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी की अपनी स्वदेशी स्टैंडअलोन 5G तकनीक, ‘जियोब्रेन AI’ (JioBrain AI) प्लेटफॉर्म, 6G रिसर्च में निवेश, क्लाउड-नेटिव आर्किटेक्चर और AI-बेस्ड नेटवर्क ऑटोमेशन उसे एक तकनीकी बढ़त देते हैं. इससे कंपनी को एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और विदेशी बाजारों के जरिए अपनी क्षमताओं से कमाई करने के नए मौके मिल सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स 5G को अपनाने के बढ़ते चलन, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के विस्तार, एंटरप्राइज़ डिजिटलाइजेशन और AI-आधारित सेवाओं से लाभ उठाने की स्थिति में है.
कंपनी के पास अपनी टेक्नोलॉजी का मालिकाना हक है, बड़े पैमाने पर काम करने का फायदा है, एक डायवर्सिफाइड डिजिटल इकोसिस्टम है और मजबूत मुनाफा कमाने की क्षमता है, जो इसके निरंतर विकास में मदद करेगी.
रेवेन्यू के नए सोर्स
GEPL के अनुसार, टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने और अपनी 5G कोर तकनीक, क्लाउड-नेटिव RAN, OSS/BSS और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस तकनीकों से कमाई करने पर, कंपनी घरेलू कनेक्टिविटी सेवाओं के अलावा भी रेवेन्यू के नए स्रोत बना सकती है.
इसमें आगे कहा गया है कि जियो प्लेटफॉर्म्स अपने ‘जियोब्रेन AI’ प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस नेटवर्क क्षमताओं को वैश्विक टेलीकॉम ऑपरेटरों और अन्य उद्योगों तक पहुंचाने की योजना बना रही है. इसके लिए वह अपने व्यापक नेटवर्क और ऑपरेशनल डेटा का इस्तेमाल करके ऐसे टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन डेवलप करेगी, जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके.
रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और रिन्यूएबल एनर्जी में किया गया निवेश भी नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार करने के अच्छे अवसर हो सकते हैं.
टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म
एसबीआई सिक्योरिटीज ने पाया कि जियो खुद को एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित कर रहा है, जिसमें उसका इन-हाउस स्टैक, 5G नेतृत्व और स्पेक्ट्रम की व्यापकता कनेक्टिविटी से परे उसे बढ़त प्रदान करती है.
यह टैरिफ युक्तिकरण, 2G माइग्रेशन, होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज अपनाने से बढ़ोतरी की उम्मीद करता है, साथ ही एआई, सैटेलाइट और विदेशी तैनाती के माध्यम से और अधिक मॉनेटाइजेशन की भी उम्मीद करता है.
इसने कहा कि पूर्ण हो चुके 5G कैपिटल एक्सपेंडिचर से कैश फ्लो को सपोर्ट मिलना चाहिए. इसने कैपेएक्स की तीव्रता, इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता, साइबर सिक्योरिटी, स्पेक्ट्रम रिन्यू और नेटवर्क व्यवधान को जोखिमों के रूप में मार्क किया.
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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