SME IPO लाने वाली कंपनियों को राहत, NSE और BSE का बड़ा फैसला, जानें पूरी डिटेल

Securities and Exchange Board of India के फैसले के बाद NSE और BSE ने SME IPO के लिए बड़ी राहत दी है. जिन कंपनियों की लिस्टिंग मंजूरी की वैलिडिटी खत्म हो रही थी उन्हें अब 30 सितंबर 2026 तक का अतिरिक्त समय मिलेगा.

NSE और BSE ने SME IPO के लिए बड़ी राहत दी है. Image Credit: Canva/ Money9

SME IPO: प्राइमरी मार्केट में उतार- चढ़ाव के बीच कंपनियों को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. SEBI के फैसले के बाद अब स्टॉक एक्सचेंज ने भी SME IPO के लिए राहत दी है. इससे उन कंपनियों को फायदा मिलेगा जो बाजार की कमजोरी के कारण अपना IPO लॉन्च नहीं कर पा रही थीं. नए फैसले से IPO की वैलिडिटी अवधि बढ़ा दी गई है. इससे कंपनियों को सही समय का इंतजार करने का मौका मिलेगा. यह कदम निवेशकों और कंपनियों दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.

SME IPO के लिए क्या मिली राहत

स्टॉक एक्सचेंज ने SME कंपनियों के लिए IPO अप्रूवल की वैलिडिटी बढ़ाने का फैसला लिया है. जिन कंपनियों की मंजूरी की अवधि खत्म होने वाली थी उन्हें अब अतिरिक्त समय दिया जाएगा. यह एक बार की राहत है जो खास तौर पर मौजूदा बाजार स्थिति को देखते हुए दी गई है. इससे कंपनियों को जल्दबाजी में IPO लाने का दबाव नहीं रहेगा. वे बेहतर समय पर बाजार में आ सकेंगी.

NSE और BSE का क्या है फैसला

NSE इंडिया ने अपने SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग की मंजूरी की वैलिडिटी 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है. यह राहत उन कंपनियों के लिए है जिनकी मंजूरी 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच खत्म हो रही थी. इसी तरह BSE ने भी अपने SME प्लेटफॉर्म पर समान राहत दी है. इससे दोनों एक्सचेंज पर लिस्टिंग की तैयारी कर रही कंपनियों को फायदा मिलेगा.

क्यों लिया गया फैसला

पिछले कुछ समय से बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है. खासकर SME IPO में निवेशकों की रुचि कम हुई है. इसके चलते कई कंपनियों ने अपने IPO प्लान को टाल दिया है. निवेशकों की कमजोर भागीदारी और वैश्विक परिस्थितियों ने भी बाजार पर असर डाला है. ऐसे में यह राहत कंपनियों के लिए जरूरी मानी जा रही है.

निवेशकों को क्या होगा फायदा

इस फैसले से कंपनियों को अपनी फंड जुटाने की योजना को बेहतर तरीके से प्लान करने का समय मिलेगा. उन्हें बार बार अप्रूवल लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे लागत और समय दोनों की बचत होगी. निवेशकों के लिए भी यह अच्छा है क्योंकि बेहतर बाजार स्थिति में IPO आने की संभावना बढ़ेगी. इससे लिस्टिंग के बाद प्रदर्शन बेहतर हो सकता है.

SME IPO मार्केट का हाल

वित्त वर्ष 2026 में 250 से ज्यादा SME IPO आए जिनसे 11000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई गई. हालांकि हाल के महीनों में इस सेगमेंट में थोड़ी सुस्ती देखने को मिली है. इसके बावजूद IPO का औसत साइज लगातार बढ़ रहा है. यह दिखाता है कि छोटे कारोबार धीरे- धीरे बड़े फंड जुटाने की ओर बढ़ रहे हैं.

ये भी पढ़ें- Om Power IPO में पैसा लगाएं या रुकें? GMP के बदलते ट्रेंड ने बढ़ाया कन्फ्यूजन! चेक करें पूरी डिटेल्स

क्या है SEBI का मकसद

SEBI का उद्देश्य कंपनियों को बाजार की मुश्किल स्थितियों में सहारा देना है. इसके साथ ही न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों में भी कुछ राहत दी गई है. इससे लिस्टेड कंपनियों को भी फायदा मिलेगा. आने वाले समय में अगर बाजार में सुधार आता है तो IPO गतिविधि फिर से तेज हो सकती है. यह फैसला उसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.