इंतजार के बाद फिर चर्चा में NSE IPO, EOI डेडलाइन ने बढ़ाई निवेशकों की धड़कन; 20000 करोड़ का हो सकता है दांव
NSE IPO 2026 को लेकर बाजार में उत्साह बढ़ता जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज जल्द DRHP दाखिल कर सकता है और साल के अंत तक इसकी लिस्टिंग संभव है. 27 अप्रैल 2026 तक EOI जमा करने की डेडलाइन तय की गई है, जिससे निवेशकों की नजरें इस मेगा IPO पर टिकी हैं. यह IPO OFS मॉडल पर आधारित होगा.
NSE IPO 2026: देश के सबसे बड़े एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्चेंज के चर्चित IPO को लेकर एक बार फिर बाजार में हलचल तेज हो गई है. वर्षों की देरी और अनिश्चितता के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि यह मेगा IPO आखिरकार आगे बढ़ सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, NSE जल्द ही DRHP दाखिल कर सकता है और साल 2026 के अंत तक इसकी लिस्टिंग संभव है. हालांकि, अभी तक कंपनी या SEBI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन निवेशकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है.
IPO को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा
NSE IPO लंबे समय से चर्चा में रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है. 27 अप्रैल 2026 तक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जमा करने की आखिरी तारीख होने से निवेशकों की नजरें इस पर टिक गई हैं. इसके अलावा, लगभग 20,000 करोड़ रुपये के बड़े इश्यू साइज की संभावनाओं ने भी बाजार में उत्साह बढ़ाया है.
सामान्य IPO से कैसे अलग है NSE IPO
यह IPO पारंपरिक पब्लिक इश्यू से काफी अलग होने वाला है. इसे पूरी तरह OFS के रूप में लाया जाएगा. इसका मतलब यह है कि कंपनी कोई नया फंड नहीं जुटाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. इस वजह से यह IPO आम निवेशकों के लिए पूरी तरह खुला नहीं होगा और इसमें भागीदारी सीमित रहेगी.
IPO की टाइमलाइन
NSE की IPO यात्रा 2016 में DRHP दाखिल करने से शुरू हुई थी, लेकिन को-लोकेशन विवाद और SEBI की जांच के चलते यह प्रक्रिया अटक गई थी. अब 2026 में NOC मिलने और कानूनी मामलों के निपटारे के बाद रास्ता साफ होता दिख रहा है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है.
क्या होगी एलिजिबिलिटी
आगामी NSE के IPO में भागीदारी के लिए एलिजिबिलिटी काफी सख्त रखी गई है. इस ऑफर फॉर सेल (OFS) में केवल वही शेयरहोल्डर्स शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने 15 जून 2025 से लगातार NSE के fully paid-up shares होल्ड किए हुए हैं. यह शर्त इसलिए अहम है क्योंकि इससे आखिरी समय में अनलिस्टेड मार्केट से शेयर खरीदकर IPO का फायदा उठाने की कोशिश करने वाले निवेशक अपने आप बाहर हो जाते हैं.
यानी अगर किसी ने हाल ही में NSE के शेयर खरीदे हैं, तो वह इस ऑफर में हिस्सा नहीं ले पाएगा. इसके अलावा, एलिजिबिलिटी के लिए एक और महत्वपूर्ण शर्त भी तय की गई है. जिन शेयरों पर किसी प्रकार का कानूनी या वित्तीय प्रतिबंध, जैसे प्लेज या कोई अन्य क्लेम है, वे इस IPO में शामिल होने के योग्य नहीं होंगे.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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