8th Pay Commission में बदल सकता है MACP का नियम! 3 नहीं अब 5 बार बढ़ेगी सैलरी, जानें क्या है प्लान
8th Pay Commission के सामने केंद्रीय कर्मचारियों ने MACP में बड़े बदलाव की मांग रखी है. कर्मचारी संगठन 3 की जगह 5 वित्तीय बढ़ोतरी, कम अंतराल और प्रमोशन वाले पद के हिसाब से वेतन लाभ चाहते हैं. जानिए मौजूदा MACP व्यवस्था में क्या है और कर्मचारियों की नई मांगों से सैलरी पर क्या असर पड़ सकता है.
Highlights
- 10, 20 और 30 साल की सेवा पर 3 वित्तीय बढ़ोतरी.
- कर्मचारी संगठन 30 साल की नौकरी में 5 वित्तीय बढ़ोतरी चाहते हैं.
- MACP का लाभ सिर्फ अगले पे-मैट्रिक्स लेवल के बजाय अगले प्रमोशनल पद के हिसाब से दिया जाए.
8th Pay Commission की सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं. आयोग ने 9 सितंबर 2026 को पुडुचेरी का दौरा पूरा कर लिया है और अब 16, 17 और 18 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ का दौरा करने वाला है. इसी बीच कर्मचारी संगठन आयोग के सामने वेतन, प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़ी अपनी मांगें रख रहे हैं.
इन मांगों में Modified Assured Career Progression यानी MACP में बड़ा बदलाव भी शामिल है. मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों को 10, 20 और 30 साल की सेवा पूरी करने पर तीन वित्तीय बढ़ोतरी मिलती हैं. कर्मचारी संगठन अब इसे बदलकर पांच वित्तीय बढ़ोतरी करने, इनके बीच का इंतजार कम करने और बढ़ोतरी को प्रमोशन वाले पद के वेतन स्तर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं.
8th Pay Commission के सामने MACP को लेकर क्या है मांग?
केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों का कहना है कि मौजूदा MACP व्यवस्था लंबे समय तक एक ही पद पर काम करने वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता और बढ़ती जिम्मेदारियों को पर्याप्त तरीके से नहीं दर्शाती. इसलिए इसमें ज्यादा वित्तीय बढ़ोतरी और कम अंतराल की जरूरत है.
Ministerial Staff Association, Survey of India ने MACP के तहत 8, 15, 22, 28 और 32 साल की सेवा पर पांच वित्तीय बढ़ोतरी देने की मांग की है. संगठन ने यह भी कहा है कि MACP सिर्फ अगले पे-मैट्रिक्स लेवल के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी के अगले प्रमोशनल पद के वेतन स्तर के हिसाब से होना चाहिए.
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी Level 7 में काम कर रहा है और उसका अगला प्रमोशनल पद Level 10 में है, तो सिर्फ अगले पे-मैट्रिक्स लेवल यानी Level 8 में MACP देने के बजाय प्रमोशनल पद के हिसाब से लाभ दिया जाना चाहिए.
डाक कर्मचारियों ने 6, 12, 18 साल में MACP की मांग की
Federation of National Postal Organisations (FNPO) ने भी MACP में पांच वित्तीय बढ़ोतरी की मांग की है. संगठन के मुताबिक ये बढ़ोतरी 6, 12, 18, 24 और 30 साल की सेवा पर मिलनी चाहिए. FNPO की एक अहम मांग यह भी है कि अगर कोई कर्मचारी प्रमोशन लेने से इनकार करता है, तो इससे उसका MACP लाभ रोका या टाला नहीं जाना चाहिए. संगठन का तर्क है कि प्रमोशन और MACP दोनों अलग-अलग पहलू हैं.
30 साल की नौकरी में कम से कम 5 वित्तीय बढ़ोतरी की मांग
National Council-JCM Staff Side ने भी 30 साल के करियर में कम से कम पांच वित्तीय बढ़ोतरी की मांग रखी है. इसके साथ ही संगठन ने प्रमोशनल पद की वेतन व्यवस्था के हिसाब से करियर प्रोग्रेशन देने की मांग की है. वहीं, Railway Senior Citizens’ Welfare Society (RSCWS) ने मौजूदा वित्तीय बढ़ोतरी के बीच 10 साल के लंबे अंतराल को कम करने की जरूरत बताई है. संगठन ने 5 साल के छोटे अंतराल या किसी लचीली व्यवस्था का सुझाव दिया है.
कर्मचारियों की प्रमुख MACP मांगें
| कर्मचारी संगठन | प्रमुख मांग |
|---|---|
| MSA, Survey of India | 8, 15, 22, 28 और 32 साल पर 5 वित्तीय बढ़ोतरी; प्रमोशनल पद के हिसाब से वेतन |
| FNPO | 6, 12, 18, 24 और 30 साल पर 5 बढ़ोतरी; प्रमोशन ठुकराने पर MACP न रोका जाए |
| NC-JCM Staff Side | 30 साल में कम से कम 5 वित्तीय बढ़ोतरी; प्रमोशनल पद के हिसाब से प्रोग्रेशन |
| RSCWS | 5 साल का छोटा अंतराल या लचीली व्यवस्था |
इन मांगों का मकसद उन कर्मचारियों की समस्या को दूर करना है, जिन्हें प्रमोशन के सीमित अवसरों के कारण लंबे समय तक एक ही पद पर काम करना पड़ता है.
कर्मचारियों की सैलरी और करियर पर क्या पड़ेगा असर?
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि MACP में बदलाव से लंबे समय तक एक ही पद पर काम करने वाले कर्मचारियों को वित्तीय फायदा मिल सकता है. इससे उनकी वेतन वृद्धि ज्यादा नियमित हो सकती है और करियर में लंबे समय तक प्रमोशन न मिलने से पैदा होने वाली ठहराव की स्थिति कम हो सकती है.
खासकर ऐसे कैडर जहां प्रमोशन के मौके सीमित हैं, वहां मौजूदा 10 साल के अंतराल को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है. संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक प्रमोशन नहीं मिलने का असर कर्मचारियों के मनोबल, आत्मविश्वास और करियर की उम्मीदों पर पड़ सकता है.
हालांकि, अभी ये सभी कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं. 8th Pay Commission इन्हें स्वीकार करेगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा जब आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा और सरकार उन पर फैसला करेगी.
8th Pay Commission की रिपोर्ट कब आएगी?
8th Pay Commission का गठन केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को किया था. आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. प्रो. पुलक घोष अंशकालिक सदस्य और पंकज जैन सदस्य सचिव हैं. केंद्र सरकार ने आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया है. इस दौरान आयोग कर्मचारी और पेंशनर संगठनों समेत अलग-अलग हितधारकों से चर्चा और सुझाव ले रहा है. अब तक 10 महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और आयोग की सलाह-मशविरा प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है.
ऐसे में आने वाले समय में MACP समेत कर्मचारियों की दूसरी मांगों पर आयोग की तरफ से क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी.
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