बिना इनकम टैक्स रेट में कटौती किए आपके हजारों रुपये बचा सकती हैं वित्त मंत्री, मिडिल क्लास की हो जाएगी मौज; जानें कैसे

Budget 2026-27 से पहले टैक्स स्लैब में बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं. अगर सरकार टैक्स रेट घटाए बिना सिर्फ स्लैब की सीमाएं आगे बढ़ा दे, तो नए और पुराने दोनों टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स के सालाना हजारों रुपये बच सकते हैं. इससे मिडिल और अपर-मिडिल क्लास को सीधी राहत मिल सकती है.

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Budget 2026-27 and tax slab changes: बजट 2026-27 के बजट को पेश होने में अब गिनकर कुछ दिन बचे हुए हैं. इस साल बजट रविवार, 1 फरवरी को सदन में पेश किया जाएगा. लेकिन जैसे-जैसे बजट का दिन नजदीक आ रहा है, टैक्स स्लैब और टैक्स राहत को लेकर नई चर्चाएं तेज होती जा रही हैं. खासकर सैलरीड क्लास और मिडिल इनकम ग्रुप की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उन्हें कितनी राहत देती है. लेकिन इस पूरी उहापोह के बीच एक अच्छी बात यह है कि सरकार अगर चाहे, तो बिना एक भी टैक्स रेट घटाए टैक्सपेयर्स के सालाना हजारों रुपये बचा सकती है. इसके लिए सिर्फ टैक्स स्लैब के स्ट्रक्चर में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है. अगर ऐसा हो जाता है तो नए के साथ-साथ पुराने टैक्स रिजीम वाले टैक्सपेयर्स का भी पैसा बच सकता है. आइए पूरी स्थिति समझते हैं.

नए टैक्स रिजीम में कहां है राहत की गुंजाइश?

फिलहाल नए टैक्स रिजीम के तहत 24 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय पर 30 फीसदी का टैक्स लगता है. वहीं 20 से 24 लाख रुपये की आय पर 25 फीसदी टैक्स स्लैब लागू है. अगर सरकार यहां एक नया स्लैब जोड़ दे और 30 फीसदी टैक्स को 24 लाख की जगह 30 लाख रुपये से ऊपर की आय पर लागू कर दे, तो बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

इस स्थिति में 20 से 24 लाख रुपये वाला 25 फीसदी टैक्स स्लैब बढ़कर 20 से 30 लाख रुपये तक हो जाएगा. यानी जो टैक्सपेयर अभी 24 से 30 लाख रुपये की आय पर सीधे 30 फीसदी टैक्स दे रहा है, उसे 25 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा. अगर बगैर किसी कटौती के सीधे स्लैब के हिसाब से टैक्स देनदारी वाली रकम की बात करें तो टैक्सपेयर्स को हर साल इस आधार पर बचत हो सकती है-

पुराने टैक्स रिजीम में भी मिल सकती है बड़ी राहत

पुराने टैक्स रिजीम की बात करें तो मौजूदा व्यवस्था में 10 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 फीसदी टैक्स लगता है. हालांकि, इस रिजीम में टैक्सपेयर को होम लोन के ब्याज, माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस, PPF, LIC जैसी कई छूट और कटौतियों का फायदा मिलता है. इसके बावजूद 10 लाख की सीमा पार करते ही 30 फीसदी टैक्स लगना कई टैक्सपेयर्स को भारी पड़ता है.

अगर सरकार यहां भी एक नया स्लैब जोड़ दे और 30 फीसदी टैक्स को 10 लाख की जगह 12 लाख रुपये से ऊपर की आय पर लागू करे, तो 10 से 12 लाख रुपये कमाने वाले टैक्सपेयर्स को सीधी राहत मिलेगी. 5 से 12 लाख रुपये के बीच पहले से मौजूद स्लैब के चलते इस इनकम ब्रैकेट के लोगों की टैक्स देनदारी काफी हद तक कम हो सकती है.

क्यों जरूरी है स्लैब में बदलाव?

महंगाई, बढ़ते किराए, शिक्षा और हेल्थकेयर खर्च ने मिडिल क्लास का बजट बुरी तरह दबा दिया है. सैलरी ग्रोथ 6-9 फीसदी के आसपास है, जबकि जरूरी खर्च कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में टैक्स में थोड़ी सी राहत भी लोगों की जेब पर बड़ा असर डाल सकती है. सबसे अहम बात यह है कि यहां सरकार को टैक्स रेट घटाने की जरूरत नहीं है, जिससे राजस्व पर भी बड़ा असर नहीं पड़ेगा. सिर्फ टैक्स स्लैब को थोड़ा आगे खिसकाने से टैक्सपेयर्स के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम आएगी, जो खपत बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने में मददगार होगी. हालांकि, पिछले बजट में सरकार ने टैक्स स्लैब से लेकर इनकम टैक्स रेट तक में बड़े बदलाव किए थे. नए स्लैब को जोड़ने से लेकर नए रेट की एंट्री तक, बजट 2025-26 में कई चेंजेस देखी गई थी. इसलिए, आगामी बजट में सरकार की ओर से बड़े बदलाव का दिख पाना थोड़ा मुश्किल है.

नतीजा क्या होगा?

अगर बजट में सरकार इस तरह का कदम उठाती है, तो मिडिल और अपर-मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी साथ ही बिना रेट घटाए टैक्स बचत संभव होगा और उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा. अब देखना यह होगा कि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण टैक्स स्लैब में इस तरह की फाइन-ट्यूनिंग करती हैं या नहीं. अगर ऐसा हुआ, तो लाखों टैक्सपेयर्स के लिए यह बजट सच में “मौज वाला बजट” साबित हो सकता है.

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