कम EMI का लालच पड़ सकता है महंगा, लंबे समय में जेब पर बढ़ता है बोझ, समझें पूरा गुणा गणित
कम EMI का विकल्प भले ही आसान लगे, लेकिन लंबे समय में यह महंगा साबित हो सकता है. कम EMI का मतलब होता है लंबी अवधि, जिससे कुल ब्याज काफी बढ़ जाता है. उदाहरण के तौर पर 10 लाख के लोन पर छोटी EMI चुनने से ब्याज दोगुना तक हो सकता है. होम लोन में यह फर्क और ज्यादा बढ़ जाता है.

Low EMI Trap: आजकल मोबाइल, लैपटॉप, एसी या फर्नीचर खरीदने के लिए लोग आसानी से EMI का सहारा लेते हैं. कम EMI का विकल्प लोगों को काफी आकर्षित करता है क्योंकि इससे हर महीने का खर्च कम लगता है. लेकिन लंबे समय में यही फैसला महंगा साबित हो सकता है. कई लोग यह नहीं समझ पाते कि कम EMI का मतलब ज्यादा समय तक कर्ज में रहना है. इससे कुल पेमेंट और ब्याज दोनों बढ़ जाते हैं. इसलिए EMI चुनते समय केवल महीने का खर्च नहीं बल्कि कुल लागत भी समझना जरूरी है.
कम EMI का गणित समझें
मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये का लोन 10 फीसदी ब्याज पर लिया. अगर आप 5 साल में लोन चुकाते हैं तो EMI ज्यादा होगी लेकिन कुल ब्याज कम देना होगा. वहीं अगर 10 साल का समय चुनते हैं तो EMI कम हो जाएगी. लेकिन इस स्थिति में कुल ब्याज दोगुना तक हो सकता है. यानी आप हर महीने थोड़ा बचाते हैं लेकिन कुल मिलाकर ज्यादा पैसा चुकाते हैं.
ज्यादा समय मतलब ज्यादा ब्याज
लोन में ब्याज बचे हुए मूलधन पर लगता है. जब लोन का समय बढ़ता है तो मूलधन धीरे- धीरे कम होता है. इससे लंबे समय तक ब्याज जुड़ता रहता है. यही कारण है कि लंबी अवधि में कुल पेमेंट काफी बढ़ जाता है. इस बात को समझना जरूरी है ताकि आप सही फैसला ले सकें.
होम लोन में और बढ़ता है फर्क
होम लोन आमतौर पर 15 से 25 साल के लिए लिया जाता है. ऐसे में कम EMI का विकल्प और भी आकर्षक लगता है. लेकिन लंबी अवधि के कारण ब्याज बहुत ज्यादा हो जाता है. उदाहरण के तौर पर 50 लाख के लोन पर 25 साल में कुल पेमेंट 1 करोड़ 20 लाख तक पहुंच सकता है. जबकि 15 साल में यह काफी कम रहता है. इससे साफ है कि समय बढ़ने से लागत तेजी से बढ़ती है.
कब सही हो सकता है लंबा लोन
हर स्थिति में लंबा लोन गलत नहीं होता. अगर आपकी आय स्थिर नहीं है या कैश फ्लो की दिक्कत है तो कम EMI मदद कर सकती है. इसके अलावा अगर आप बची हुई रकम को कहीं निवेश करते हैं तो फायदा हो सकता है.
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सही विकल्प कैसे चुनें
लोन लेते समय केवल कम EMI पर ध्यान न दें. यह देखें कि कुल कितना पैसा चुकाना होगा. कोशिश करें कि लोन जल्दी खत्म हो ताकि ब्याज कम लगे. साथ ही अपनी आय और खर्च के अनुसार संतुलन बनाना जरूरी है. सही योजना के साथ लिया गया लोन ही आपके लिए फायदेमंद साबित होगा.
इस बात का रखें ध्यान
कम EMI आपको हर महीने राहत देती है लेकिन लंबे समय में जेब पर ज्यादा बोझ डालती है. इसलिए फैसला लेते समय लंबी अवधि के असर को जरूर समझें. कोशिश करें कि कर्ज में कम समय तक रहें और कुल लागत को कम रखें. यही समझदारी भरा वित्तीय फैसला होगा.