नए Labour Codes लागू, ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन, महिलाओं और गिग वर्कर्स को भी बड़े अधिकार
केंद्र सरकार ने 4 नए Labour Codes के तहत अंतिम नियम लागू कर दिए हैं. अब कर्मचारियों को अनिवार्य अपॉइंटमेंट लेटर, ओवरटाइम पर डबल वेतन, 48 घंटे वर्क वीक और गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी जैसे बड़े फायदे मिलेंगे. जानिए नए श्रम कानूनों में क्या-क्या बदला.
New labour codes India 2026: देश के श्रम क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है. केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार को चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) के तहत अंतिम नियमों को अधिसूचित कर दिया है. 21 नवंबर से प्रभावी हुए ये कोड अब पूरी तरह जमीन पर उतरने के लिए तैयार हैं. इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य देश के श्रम कानूनों को आधुनिक बनाना, न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना और हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है.
चूंकि श्रम संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए ये नियम देश भर में अमल किए जा सके इसके लिए केंद्र और राज्यों दोनों को नियम बनाने होते हैं. केंद्र की इस अधिसूचना के बाद अब राज्यों के लिए अपना ढांचा तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है.
कामकाजी घंटों और ओवरटाइम पर सख्त नियम
नए नियमों के तहत श्रमिकों के हितों और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड के तहत कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं:
- वर्किंग आवर्स: सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम की सीमा तय की गई है. साथ ही, सप्ताह में कम से कम एक दिन का अनिवार्य अवकाश देना होगा.
- ओवरटाइम का डबल पैसा: यदि कोई कर्मचारी दिन में 8 घंटे या सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करता है, तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर (Double Wages) पर ओवरटाइम का भुगतान करना होगा.
- ओवरटाइम की सीमा: एक तिमाही (3 महीने) में कोई भी नियोक्ता किसी श्रमिक से 144 घंटे से अधिक ओवरटाइम नहीं करा सकेगा.
- पारदर्शिता: ओवरटाइम का हिसाब रखने के लिए नियोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक या मैन्युअल रजिस्टर बनाए रखना होगा और वेतन पर्ची (Wage Slip) में ओवरटाइम का अलग से उल्लेख करना अनिवार्य होगा.
महिलाओं के लिए समान अवसर और स्वास्थ्य सुरक्षा
नया ढांचा कार्यस्थल पर जेंडर न्यूट्रलिटी और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देता है:
- समान वेतन: महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन और अवसर की गारंटी दी गई है. वे अब विभिन्न शिफ्टों में भी काम कर सकेंगी.
- हेल्थ चेक-अप: 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए नियोक्ताओं को हर साल मुफ्त स्वास्थ्य जांच करानी होगी.
- नियुक्ति पत्र: सभी श्रमिकों के लिए औपचारिक नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है.
नौकरी जाने पर मिलेगा ‘रिस्किलिंग’ का सहारा
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए नेशनल रिस्किलिंग फंड (National Reskilling Fund) की स्थापना का प्रावधान किया गया है. नियम 37 के अनुसार, यदि कोई नियोक्ता किसी श्रमिक की छंटनी (Lay-off) करता है, तो उसे उस कर्मचारी के 15 दिनों के वेतन के बराबर राशि इस फंड में जमा करनी होगी.
यह राशि छंटनी की तारीख से 10 दिनों के भीतर जमा करानी होगी, ताकि श्रमिक नई तकनीक या आर्थिक बदलावों के अनुसार खुद को तैयार कर सके.
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गिग वर्कर्स और डिजिटल समावेशन
सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत नियमों ने गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बना दिया है. इसमें ईएसआई (ESI) अंशदान, क्रेच सुविधा और नामांकन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कवरेज का विस्तार होगा.
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