निवेश में सफलता के लिए तीन चीजें जरूरी! सही निवेश, लंबा समय और संयम…ये सारे गुण महिलाओं में: नवनीत मुनोत
Money9 Financial Freedom Summit 2026 में HDFC AMC के MD और CEO Navneet Munot ने महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण पर जोर दिया. उन्होंने ‘बरनी से आजादी’ मुहिम का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं बचत में माहिर हैं, लेकिन उन्हें निवेश की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. सही निवेश, लंबा समय और संयम से छोटी रकम भी बड़ी संपत्ति बना सकती है.
Money9 Financial Freedom Summit 2026 के मंच पर वित्तीय आजादी और निवेश में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक अहम बातचीत हुई. इस सत्र में HDFC Asset Management Company के MD और CEO नवनीत मुनोत ने महिलाओं की वित्तीय भागीदारी, निवेश की आदत और आर्थिक सशक्तिकरण पर खुलकर अपनी बात रखी. Money9 की एडिटर प्रियंका संभव के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है तो महिलाओं का वित्तीय सशक्तिकरण बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ HDFC म्यूचुअल फंड द्वारा शुरु हुए ‘बरनी से आजादी’ नाम से एक खास मुहिम का जिक्र भी किया है, जिसका मकसद महिलाओं की बचत की आदत को निवेश में बदलना है.
“बचत करने में माहिर हैं भारतीय महिलाएंं”
नवनीत मुनोत ने कहा कि भारतीय महिलाएं हमेशा से बचत करने में माहिर रही हैं. घर की रसोई में रखी ‘बरनी’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि महिलाएं अक्सर छोटे-छोटे पैसे बचाकर किसी जरूरत के वक्त परिवार की मदद करती रही हैं. यही आदत अगर निवेश में बदल जाए तो यह न सिर्फ उनके परिवार बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी ताकत बन सकती है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को वित्तीय ज्ञान देने से ज्यादा जरूरी है उनसे संवाद करना. उनके मुताबिक महिलाएं पहले से ही जोखिम और उतार-चढ़ाव को समझती हैं, क्योंकि घर-परिवार संभालते हुए वे हर दिन अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करती हैं. उन्होंने कहा, “निवेश में सफलता के लिए तीन चीजें जरूरी होती हैं- सही निवेश, लंबा समय और संयम. इन तीनों में से धैर्य और लंबा नजरिया महिलाओं के स्वभाव में पहले से मौजूद है.”
क्या है ‘बरनी से आजादी’ मुहिम
‘बरनी से आजादी’ अभियान के जरिए HDFC म्यूचुअल फंड ने देशभर में महिलाओं तक वित्तीय जागरूकता का संदेश पहुंचाने की कोशिश की है. मुनोत ने बताया कि माघ मेले जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में भी इस अभियान को लेकर विशेष इंस्टॉलेशन और संवाद कार्यक्रम किए गए, ताकि अलग-अलग पृष्ठभूमि की महिलाओं तक सरल भाषा में निवेश की जानकारी पहुंचाई जा सके.
उन्होंने यह भी माना कि आज भी कई घरों में वित्तीय फैसले पुरुष लेते हैं और कई महिलाओं में निवेश को लेकर आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है. लेकिन हाल के वर्षों में यह स्थिति तेजी से बदल रही है और महिलाएं शिक्षा, उद्यमिता और पेशेवर दुनिया में लगातार आगे बढ़ रही हैं.
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नवनीत मुनोत का मानना है कि अगर परिवारों में महिलाओं को वित्तीय फैसलों में बराबर शामिल किया जाए तो बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं. उनके मुताबिक छोटी-छोटी रकम से शुरू होने वाला नियमित निवेश भी लंबे समय में बड़ी पूंजी बना सकता है. उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को बचत से आगे बढ़ाकर निवेश की मुख्यधारा से जोड़ा जाए तो भारत की आर्थिक ताकत कई गुना बढ़ सकती है.
