नोएडा के 1100 से ज्यादा घर खरीदारों को राहत, रियल स्टेट कंपनियों ने चुकाया 130 करोड़ का बकाया

एटीएस रियल्टी और ग्रीनबे इन्फ्रास्ट्रक्चर ने वाईईआईडीए का 130 करोड़ रुपये का बकाया चुका दिया है. इससे करीब 1100 से अधिक लोगों के घर लेने का रास्ता साफ हो गया है

SWAMIH-2 फंड लॉन्च करेगी सरकार. Image Credit: Satvik Shahapur/Moment/Getty Images

एटीएस इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रुप वाली कंपनी एटीएस रियल्टी और ग्रीनबे इन्फ्रास्ट्रक्चर ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण नोएडा में 1100 से ज्यादा लोगों को राहत, रियल स्टेट कंपनी ने चुकाया वाईईआईडीए का 130 करोड़ रुपये का कर्ज का 130 करोड़ रुपये का बकाया चुका दिया है. यह हजारों घर खरीदने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है. इससे सेक्टर 22डी के पास 1,100 से अधिक अपार्टमेंटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो जाएगा और यमुना एक्सप्रेसवे पर एटीएस टाउनशिप परियोजना फिर से शुरू हो जाएगी.

वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम के तहत देना पड़ा बकाया

यह राशि उत्तर प्रदेश सरकार की वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम (ओटीएस) के तहत दी गई है. ओटीएस स्कीम को रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से चालू किया गया. इस स्कीम की सिफारिश अमिताभ कांत समिति की ओर से की गई थी. समिति की सिफारिशों को मानते हुए वाईईआईडीए ने एटीएस रियल्टी कंपनी को अपने बकाये का 25 प्रतिशत और किसानों को मुआवजा देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया. जिसको ध्यान में रखते हुए कंपनी ने समय बकाये का पैसा वाईईआईडीए को जमा कर दिया. कमेटी की रिपोर्ट पर बोलते हुए एटीएस ग्रुप के चेयरमैन गीतांबर आनंद ने कहा कि अमिताभ कांत समिति की रिपोर्ट से इस क्षेत्र को काफी मदद मिलेगी. इससे रुकी हुई परियोजनाएं फिर से शुरू हो पाएंगी.

ओटीएस स्कीम में 25 प्रतिशत जमा करना होता है

अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की पुनर्वास पैकेज या ओटीएस योजना में रजिस्टी के लिए होने के लिए बिल्डरों को कुल राशि पर पेनेल इंट्रेस्ट घटाकर 25 प्रतिशत सरकार को देना होता है. ऐसा न करने पर प्राधिकरण के पास उन बिल्डरों का आवंटन रद्द करने का भी अधिकार है.

एनसीआर में घर खरीदने वाले लोग वर्षों से हो रही देरी से परेशान हैं और उन्हें अपने अपार्टमेंट पाने के लिए अदालत जाने पर मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि उन पर किराए के साथ-साथ ईएमआई का भी बोझ है. नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य भागों के किसान अक्सर डेवलपर्स पर आरोप लगाते रहे हैं. किसान कहते हैं कि उन्हें उनकी जमीन के लिए डेवलपर्स कम पैसे देते हैं और में उसी जमीन को बेंचकर के खुद मोटा मुनाफा कमाते हैं.

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