वैश्विक संकट का असर भारत के हाईवे पर, FY27 में सुस्त रहेगा टोल कलेक्शन; अगले साल बढ़ सकती हैं दरें
देश में बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच टोल टैक्स को लेकर बड़ा संकेत मिला है. CRISIL Ratings की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती महंगाई के कारण अगले वित्त वर्ष में टोल दरों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है.

देश में एक्सप्रेसवे और हाइवे हर दिन विस्तार होते जा रहे हैं, लेकिन अब सफर करना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आर्थिक उथल-पुथल का सीधा असर देश के टोल कलेक्शन पर दिखने लगा है.
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में टोल कलेक्शन की ग्रोथ 1.50 से 2% (150-200 बेसिस पॉइंट्स) तक घट सकती है. कमर्शियल वाहनों की आवाजाही कम होने से इस साल टोल कलेक्शन की विकास दर घटकर महज 5-7% रहने का अनुमान है. हालांकि, राहत की बात यह है कि यह मंदी अस्थाई है और अगले वित्त वर्ष में महंगाई के कारण टोल दरों में होने वाली बढ़ोतरी इसकी भरपाई कर देगी .
क्यों सुस्त पड़ रही है टोल कलेक्शन की रफ्तार?
कमर्शियल वाहन भारत में टोल कलेक्शन की रीढ़ हैं, जो कुल टोल में करीब 75% का योगदान देते हैं. पश्चिम एशिया संकट की वजह से इंडस्ट्रियल आउटपुट, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिससे माल ढुलाई (फ्रेट मूवमेंट) प्रभावित हुई है . इसका सीधा असर मार्च और अप्रैल के फास्टैग टोल कलेक्शन में गिरावट के रूप में भी देखने को मिला है .
क्रिसिल ने करीब 10,000 किलोमीटर लंबे 91 टोल रोड एसेट्स का अध्ययन कर ये आंकड़े जारी किए हैं:
- इस वित्त वर्ष (FY27P) का अनुमान: पिछले साल थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई कम रहने से इस साल टोल दरों में मामूली बढ़ोतरी होगी, जिससे टोल ग्रोथ 5-7% पर सिमट जाएगी.
- अगले वित्त वर्ष (FY28P) में तेजी: पश्चिम एशिया संकट के चलते इस साल WPI महंगाई बढ़ सकती है. चूंकि अगले साल की टोल दरें इस साल की महंगाई से तय होंगी, इसलिए अगले वित्त वर्ष में टोल टैक्स काफी महंगा हो जाएगा और टोल कलेक्शन ग्रोथ उछलकर 8-10% पर पहुंच सकती है.
- ट्रैफिक ग्रोथ: निकट भविष्य में कुल ट्रैफिक ग्रोथ 2-4% के आसपास रहने का अनुमान है.
नए एक्सप्रेसवे से कुछ रास्तों पर घटा ट्रैफिक
देश में नए हाइवे और एक्सप्रेसवे बनने का एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वित्त वर्षों में करीब एक-चौथाई (25%) टोल एसेट्स के ट्रैफिक में गिरावट देखी गई है.
इनमें से 12% एसेट्स में गिरावट का मुख्य कारण नए हाइवे और एक्सप्रेसवे की तरफ ट्रैफिक का डायवर्ट होना है. बाकी 12% एसेट्स भारी मानसून, रेत खनन पर प्रतिबंध, और फीडर रूट की समस्याओं की वजह से प्रभावित हुए हैं.
इसके उलट, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ है क्योंकि लोग बेहतर कनेक्टिविटी और समय बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
टोल रोड ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिति और क्रेडिट प्रोफाइल को लेकर विशेषज्ञ आश्वस्त हैं.
“ट्रैफिक ग्रोथ आर्थिक विस्तार से जुड़ी है, जो निकट भविष्य में 2-4% रहने का अनुमान है. पिछले साल कम WPI महंगाई के कारण इस साल टोल दरों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी और कलेक्शन 5-7% बढ़ेगा. लेकिन अगले वित्त वर्ष में महंगाई के चलते टोल दरों में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे टोल कलेक्शन की ग्रोथ 8-10% तक जाएगी.”
— मनीष गुप्ता, डिप्टी चीफ रेटिंग्स ऑफिसर, क्रिसिल रेटिंग्स
“क्रिसिल के सैंपल वाले 80% से अधिक एसेट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) या पूल्ड पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं. संपत्तियों की इस विविधता और नियंत्रित कर्ज के कारण टोल ऑपरेटरों का क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत बना रहेगा। इस वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में इनका डेट सर्विस कवरेज रेशियो (DSCR) ~1.5 गुना पर मजबूत रहेगा.”
— आनंद कुलकर्णी, डायरेक्टर, क्रिसिल रेटिंग्स
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टोल ऑपरेटरों को नीतिगत फैसलों से राहत
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के नीतिगत फैसलों का असर भी अब संभल गया है. मिसाल के तौर पर, 15 अगस्त 2025 से गैर-कमर्शियल पैसेंजर वाहनों के लिए सालाना पास की व्यवस्था शुरू होने से वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही में टोल कलेक्शन पर 5-7% का असर पड़ा था. लेकिन अथॉरिटी द्वारा रियायत अवधि की भरपाई किए जाने से ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिरता बरकरार है.