आधे दाम पर मिल रहे हैं कचरा रीसायकल करने वाली इन 3 कंपनियों के शेयर, कर्ज जीरो, 5 साल में 1020% तक रिटर्न

भारत में रिसाइकलिंग सेक्टर तेजी से उभरता हुआ निवेश और उद्योग क्षेत्र बन रहा है. सरकारी नीतियों, बढ़ते कचरे और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की मांग से इसे मजबूती मिली है. भविष्य में ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन ऑपरेशनल चुनौतियों के कारण कुछ रिसाइकलिंग कंपनियों के शेयर अपने 52-वीक हाई से काफी नीचे आ गए हैं.

3 Recycling Stocks Down up to 58% Image Credit: @AI/Money9live

3 Recycling Stocks Down up to 58%: भारत का रिसाइकलिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी नीतियां, बढ़ता कचरा और पर्यावरण अनुकूल सामग्री की मांग इसकी वजह हैं. मोर्डोर इंटेलिजेंस के अनुसार, यह बाजार 2025 में 0.89 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 8.53% की सालाना दर से बढ़कर 2030 तक 1.34 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा. बैटरी मेटल और प्लास्टिक इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगे, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन और पैकेजिंग की जरूरत बढ़ रही है. हालांकि सेक्टर में ग्रोथ की अच्छी संभावना है, लेकिन कुछ कंपनियों के शेयर ऑपरेशनल समस्याओं, कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी और बाजार के दबाव से गिरे हैं. यहां कुछ ऐसे स्टॉक्स हैं जो अपने 52-वीक हाई से काफी नीचे आ गए हैं.

Ganesha Ecosphere

गणेशा इकोस्फियर कंपनी फेंके गए पीईटी बोतलों को रिसाइकल करके पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर और पॉलिएस्टर स्पन यार्न बनाती है, जिनका इस्तेमाल कई जगहों पर होता है. कच्चा माल (पीईटी प्लास्टिक वेस्ट) जुटाने के लिए कंपनी ने पूरे भारत में स्क्रैप डीलर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स का नेटवर्क बनाया है. यह नेटवर्क रोजाना लगभग 350 टन पीईटी प्लास्टिक वेस्ट इकट्ठा करता है. कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कानपुर (उत्तर प्रदेश), रुद्रपुर (उत्तराखंड) और बिलासपुर (उत्तर प्रदेश) में हैं.

कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो Q2 FY26 में राजस्व 363.4 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 386.8 करोड़ था. ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन सितंबर 2025 में 6.1% रहा, जो पिछले साल 14.3% था. सितंबर 2025 में कंपनी को घाटा हुआ, जबकि पिछले साल 27.1 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट था. इसने पांच साल में 98 फीसदी तक रिटर्न दिया है.

Eco Recycling

इको रिसाइकलिंग एक प्रमुख ई-वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी है, जो ई-वेस्ट हैंडल करती है. इसमें एसेट रिमूवल, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, पैकिंग, रिवर्स लॉजिस्टिक्स, डेटा डिस्ट्रक्शन, एसेट रिकवरी, रिसाइकलिंग आदि शामिल हैं. कंपनी अमेरिका, यूरोप और जापान की तकनीकों का इस्तेमाल करती है जैसे कीमती मेटल रिकवरी, डेटा डिस्ट्रक्शन और लैंप रिसाइकलिंग के लिए.

कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो Q2 FY26 में राजस्व 14.4 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 12.9 करोड़ रुपये था. ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन सितंबर 2025 में 49.9% रहा, जो पिछले साल 71.6% था. कंपनी का नेट प्रॉफिट 5.6 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल 8.2 करोड़ था. इसने पांच साल में 1020 फीसदी तक रिटर्न दिया है.

Nupur Recyclers

नूपुर रिसाइक्लर्स फेरस और नॉन-फेरस मेटल स्क्रैप का प्रमुख आयातक, ट्रेडर और प्रोसेसर है, जिसमें श्रेडेड जिंक, जिंक डाई-कास्ट स्क्रैप, जुरिक स्क्रैप और एल्युमिनियम स्क्रैप शामिल हैं. कंपनी सस्टेनेबल प्रैक्टिसेस पर जोर देती है और मेटल रिसाइकलिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो Q2 FY26 में रेवेन्यू 48.8 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 51.2 करोड़ था. ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 7% रहा, जो पिछले साल 11.5% था. सितंबर 2025 में नेट प्रॉफिट 4.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल 5.4 करोड़ रुपये था. इसने पांच साल में 153 फीसदी तक रिटर्न दिया है

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.