अडानी के प्रोजेक्ट्स ने बदली इन कंपनियों की किस्मत, शेयर हुए मालामाल
अडानी ग्रुप के रिकॉर्ड कैपेक्स से कई कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं. Hitachi Energy, Cemindia Projects, BHEL और GE Vernova जैसे शेयरों में जोरदार तेजी आई है. अगले पांच साल में 125 अरब डॉलर निवेश की योजना है.
Highlights
- अडानी के कैपेक्स से कंपनियों को बड़े ऑर्डर
- Hitachi Energy का शेयर 197% तक उछला
- अडानी की 125 अरब डॉलर निवेश योजना
अडानी ग्रुप की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च का फायदा अब शेयर बाजार में भी दिखाई देने लगा है. ग्रुप के बंदरगाह से लेकर बिजली कारोबार तक के बड़े विस्तार से जुड़ी कई कंपनियों को ज्यादा ऑर्डर मिल रहे हैं और उनके शेयरों में भी तेज बढ़त देखने को मिल रही है. इनमें ठेकेदार कंपनियों के साथ-साथ मशीनरी बनाने वाली और पावर टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं.
पिछले दो साल में Hitachi Energy India के शेयर में 197% की तेजी आई है. वहीं Cemindia Projects और GE Vernova T&D India के शेयर क्रमशः 152% और 147% चढ़े हैं. BHEL का शेयर एक साल में 79% बढ़ा है, जबकि PSP Projects में 39% की तेजी आई है. निवेशकों की दिलचस्पी उन कंपनियों में बढ़ रही है, जिन्हें अडानी ग्रुप के रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च से बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.
एक साल में 1.53 लाख करोड़ रुपये खर्च
मार्च में खत्म हुए वित्त वर्ष में अडानी ग्रुप ने करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया. यह किसी भारतीय कॉरपोरेट कंपनी की ओर से एक साल में किया गया अब तक का सबसे बड़ा पूंजीगत खर्च है. इसमें से करीब 80% पैसा वेंडर्स यानी बाहरी कंपनियों के जरिए खर्च किया गया. इस आंकड़े में रियल एस्टेट और ग्रुप के दूसरे निजी कारोबार शामिल नहीं हैं.
जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अडानी ग्रुप करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है. इसके अलावा ग्रुप ने अगले पांच साल में अपने अलग-अलग कारोबारों में करीब 125 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है.
अडानी की यह रणनीति प्रोजेक्ट मालिक और उसके सप्लायर के बीच रिश्ते को भी बदल रही है. ग्रुप के CFO जुगेशिंदर ‘रॉबी’ सिंह ने हाल में एक बंद कमरे में हुई बैठक में विश्लेषकों से कहा कि बढ़ते पूंजीगत खर्च के कारण बड़े स्तर पर काम करने के लिए बाहरी कंपनियों पर निर्भरता बढ़ानी होगी.
CFO के मुताबिक, अडानी ग्रुप अब इन कंपनियों को सिर्फ वेंडर नहीं मानता, बल्कि उन्हें ‘रणनीतिक साझेदार’ के तौर पर देखता है. ग्रुप इन कंपनियों को ‘वर्ल्ड-क्लास एंटरप्राइज’ बनाने में मदद करना चाहता है. इसका लक्ष्य आने वाले वर्षों में सैकड़ों ऐसे पार्टनर तैयार करना है, जो आगे चलकर बड़े कारोबार में बदल सकें.
अडानी के 125 अरब डॉलर के निवेश से किन कंपनियों को फायदा?
अडानी ग्रुप की इस रणनीति का सबसे साफ असर PSP Projects में दिखाई देता है. अडानी ने इस कंस्ट्रक्शन कंपनी में 34.41% हिस्सेदारी खरीदी थी, ताकि अपने बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा सके. एक साल के भीतर PSP Projects की ऑर्डर बुक 85% बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 13,447 करोड़ रुपये हो गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 7,266 करोड़ रुपये थी.
PSP की ऑर्डर बुक में अडानी से जुड़े प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़कर 67% यानी करीब 9,009 करोड़ रुपये हो गई. एक साल पहले यह सिर्फ 1,817 करोड़ रुपये थी. नए ऑर्डर भी तीन गुने से ज्यादा बढ़कर 10,925 करोड़ रुपये हो गए. कंपनी का रेवेन्यू 25% बढ़कर 3,149 करोड़ रुपये पहुंच गया. हालांकि, ऑर्डर बढ़ने का फायदा अभी मुनाफे में उसी अनुपात में नहीं दिखा है. कंपनी का EBITDA सिर्फ थोड़ा बढ़कर 180 करोड़ रुपये हुआ, जो एक साल पहले 178 करोड़ रुपये था.
कंपनी का Return on Capital Employed यानी पूंजी पर रिटर्न भी घटकर 7% रह गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 10% और वित्त वर्ष 2022-23 में 24% था. कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकल भी बढ़कर 96 दिन हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 65 दिन और वित्त वर्ष 2022-23 में 41 दिन था. यानी ऑर्डर तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने में कंपनी की पूंजी ज्यादा समय तक फंसी रह रही है.
रियल एस्टेट में भी बढ़ सकता है कारोबार
इसके बावजूद PSP Projects के लिए आगे कारोबार बढ़ाने की गुंजाइश काफी बड़ी है. कंपनी की मौजूदा क्षमता रेजिडेंशियल, संस्थागत और कमर्शियल कंस्ट्रक्शन में ज्यादा है. वहीं अडानी ग्रुप के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में धारावी पुनर्विकास, मोतीलाल नगर और जयप्रकाश एसोसिएट्स से हासिल की गई संपत्तियां शामिल हैं. ऐसे में आने वाले समय में PSP को इन प्रोजेक्ट्स से भी काम मिल सकता है.
Cemindia Projects को भी बड़ा फायदा
Cemindia Projects की कहानी थोड़ी अलग है. अडानी प्रमोटर से जुड़ी कंपनी Renew Exim ने पहले ITD Cementation के नाम से जानी जाने वाली कंपनी में 67.46% की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी थी. इसके साथ अडानी ग्रुप के पास पोर्ट, एयरपोर्ट, सुरंग, मेट्रो, सड़क और इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर बनाने का अनुभव रखने वाली कंपनी आ गई.
वित्त वर्ष 2025-26 में Cemindia की ऑर्डर बुक 34% बढ़कर 24,545 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 18,300 करोड़ रुपये थी. नए ऑर्डर दोगुने से ज्यादा बढ़कर 14,821 करोड़ रुपये हो गए. कंपनी का रेवेन्यू भी 9,097 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,061 करोड़ रुपये हो गया. EBITDA 30% बढ़कर 1,199 करोड़ रुपये पहुंच गया.
कंपनी का Return on Capital Employed भी 28% से बढ़कर 34% हो गया. यानी कंपनी जिस पूंजी का इस्तेमाल कर रही है, उससे कमाई करने की उसकी क्षमता बेहतर हुई है. CARE Ratings का अनुमान है कि आने वाले समय में Cemindia के कुल कारोबार में अडानी ग्रुप से जुड़े प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी करीब 50% तक पहुंच सकती है. अभी यह करीब 14% है.
पावर और ग्रिड कंपनियों को भी फायदा
अडानी ग्रुप की ओर से बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा जुटाने की क्षमता का फायदा पावर इक्विपमेंट और ग्रिड टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी मिल रहा है. Adani Energy Solutions ने वित्त वर्ष 2024-25 में QIP के जरिए 8,373 करोड़ रुपये जुटाए थे. इसके बाद कंपनी ने भड़ला-फतेहपुर हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट कॉरिडोर के लिए जापानी बैंकों से करीब 750 मिलियन डॉलर की ग्रीन फाइनेंसिंग हासिल की. इसके अलावा Apollo-backed senior secured notes के जरिए 500 मिलियन डॉलर और जुटाए गए.
कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 में 10,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग जुटाने को मंजूरी दी है. इसमें से 3,500 करोड़ रुपये जुलाई 2026 में QIP के जरिए जुटाए जा चुके हैं. इस तरह की फंडिंग से सप्लायर कंपनियों को भी भरोसा मिलता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और वर्किंग कैपिटल में पैसा लगाने का जोखिम कम होगा.
Hitachi Energy और BHEL को बड़े ऑर्डर
6,000 मेगावाट का भड़ला-फतेहपुर कॉरिडोर इसका बड़ा उदाहरण है. इस प्रोजेक्ट में Hitachi Energy India की HVDC टेक्नोलॉजी और BHEL की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में Hitachi Energy India को 18,457 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले. अनुमान है कि इनमें करीब आधे ऑर्डर Adani Energy Solutions से जुड़े थे.
कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 29,555 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 19,246 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022-23 में सिर्फ 7,071 करोड़ रुपये थी. कंपनी का रेवेन्यू 28% बढ़कर 8,148 करोड़ रुपये हो गया, जबकि EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,253 करोड़ रुपये पहुंच गया. भड़ला-फतेहपुर प्रोजेक्ट से मिले ऑर्डर ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई.
BHEL को भी अडानी ग्रुप से बड़ा फायदा मिला है. वित्त वर्ष 2025-26 में BHEL का अडानी ग्रुप से कारोबार करीब 6,673 करोड़ रुपये रहा, जो कंपनी की कुल बिक्री का लगभग पांचवां हिस्सा है. BHEL की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 2.39 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1.96 लाख करोड़ रुपये थी. कंपनी का EBITDA 83% बढ़कर 3,189 करोड़ रुपये हो गया.
बिजली उत्पादन बढ़ाने से और मिल सकते हैं ऑर्डर
अडानी पावर भी बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कैपेक्स प्रोग्राम पर काम कर रही है. इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 45 GW तक करना है. इससे बॉयलर, टर्बाइन, जनरेटर और प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के लिए मांग बढ़ सकती है. हालांकि, भविष्य में कितने ऑर्डर मिलेंगे, यह प्रोजेक्ट मिलने और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धी खरीद प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
GE Vernova को भी मिला फायदा
अडानी का फायदा सिर्फ उन कंपनियों तक सीमित नहीं है, जिनमें ग्रुप ने हिस्सेदारी खरीदी है. GE Vernova T&D India को Adani Energy Solutions से खावड़ा-साउथ ओलपाड VSC-HVDC प्रोजेक्ट का ऑर्डर मिला. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को कुल 14,776 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले. ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, इसमें करीब 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट Adani Energy Solutions से जुड़े थे.
अडानी का मॉडल Apple जैसा
अडानी का यह मॉडल कुछ हद तक Apple के extended enterprise model जैसा है. इसमें मुख्य कंपनी प्रोडक्ट की डिजाइन, टेक्नोलॉजी और ग्राहक अनुभव पर अपना नियंत्रण रखती है, जबकि विशेषज्ञ कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग और दूसरी क्षमताएं उपलब्ध कराती हैं. इस मॉडल में सप्लायर कंपनियों को निवेश, टेक्नोलॉजी और बड़े बाजार तक पहुंच मिलती है.
अडानी के लिए इसका फायदा यह है कि उसे इतने बड़े निवेश कार्यक्रम को पूरा करने के लिए हर क्षमता खुद तैयार नहीं करनी पड़ेगी. वहीं पार्टनर कंपनियों को पहले से फंडेड प्रोजेक्ट्स मिलेंगे और उनका रेवेन्यू, तकनीकी क्षमता और कारोबार का आकार बढ़ सकता है.
लेकिन जोखिम भी कम नहीं
इस मॉडल में कुछ जोखिम भी हैं. किसी एक बड़े ग्राहक पर बहुत ज्यादा निर्भरता कंपनी के लिए जोखिम पैदा कर सकती है. सिर्फ ऑर्डर बुक बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी का कैश फ्लो और मुनाफा भी उसी तेजी से बढ़ेगा. PSP Projects इसका उदाहरण है, जहां ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं, लेकिन पूंजी पर रिटर्न घटा है और वर्किंग कैपिटल में पैसा ज्यादा समय तक फंसा है.
फिर भी अडानी ग्रुप की 2.1 लाख करोड़ रुपये की सालाना खर्च योजना कंस्ट्रक्शन, भारी इंजीनियरिंग और पावर टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के कारोबार की दिशा बदल रही है. अगर अडानी ग्रुप और उसके पार्टनर इन बड़े ऑर्डरों को समय पर पूरा करके उन्हें कैश और मुनाफे में बदलने में सफल रहते हैं, तो 125 अरब डॉलर का यह कैपेक्स बूम सिर्फ अडानी ग्रुप की कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार में उससे जुड़ी कई दूसरी कंपनियों के लिए भी बड़ा कमाई का मौका बन सकता है.
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