STT पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की सफाई, GDP से 500X अधिक बड़ा है भारत का F&O मार्केट, ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 1.5 लाख करोड़ पार
F&O पर एसटीटी बढ़ाने के फैसले को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपनी बात साफ की है. विभाग के अनुसार भारत का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस बाजार देश की GDP से करीब 500 गुना बड़ा हो चुका है और इसका ट्रांजेक्शन वॉल्यूम ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक है. सरकार का कहना है कि सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए यह कदम जरूरी था.
F&O Segment vs Indian GDP: बजट 2026 में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने के फैसले के बाद उठे सवालों पर अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपनी सफाई दी है. विभाग ने साफ कहा है कि भारत का F&O मार्केट देश की GDP से करीब 500 गुना बड़ा हो चुका है और इसका कुल ट्रांजेक्शन वॉल्यूम ₹1.5 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है. सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी और पूरी तरह सट्टा आधारित गतिविधि पर निगरानी और नियंत्रण के लिए यह कदम जरूरी हो गया था. हालांकि बाजार को यह फैसला रास नहीं आया. सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही 2% से ज्यादा टूट गए.
F&O सेगमेंट भारतीय GDP से 500 गुना बड़ा
इनकम टैक्स इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए. इनके मुताबिक भारत की GDP करीब ₹300 लाख करोड़ है, जबकि F&O सेगमेंट का ट्रांजैक्शन वॉल्यूम इससे 500 गुना से भी ज्यादा बताया गया है. सरकार का कहना है कि इतना बड़ा और पूरी तरह सट्टा आधारित कारोबार आर्थिक स्थिरता के लिए जोखिम बन सकता है.
सिर्फ F&O पर बढ़ा STT, बाकी पर नहीं असर
STT में बढ़ोतरी सिर्फ फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर की गई है. कैश मार्केट या अन्य निवेश गतिविधियों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है. सरकार का तर्क है कि यह कदम स्पेकुलेटिव यानी अत्यधिक जोखिम वाली ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने के लिए जरूरी है.
बजट ऐलान के बाद बाजार में हाहाकार
बजट पेश होते ही शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया. सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही 2% से ज्यादा टूट गए. निवेशक खासतौर पर F&O से जुड़े शेयरों में सतर्क नजर आए. बाजार की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि शॉर्ट टर्म में ट्रेडर्स इस फैसले से खुश नहीं हैं.
दिग्गज निवेशक की क्या है राय?
दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया है. उनका कहना है कि F&O युवाओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है और इससे असली फायदा सिर्फ बड़े ब्रोकर्स को होता है. उनके मुताबिक डेरिवेटिव ट्रेडिंग से देश की पूंजी नहीं बढ़ती, बल्कि नुकसान का दायरा और गहरा होता जाता है. इसलिए टैक्स के जरिए इस पर लगाम लगाना सही कदम है.




