Astra Microwave का डिमर्जर प्लान, अलग होंगे डिफेंस और स्पेस बिजनेस; शेयर पर निवेशकों की पैनी नजर
Astra Microwave Products Ltd ने अपने स्पेस, मेटेरोलॉजी और हाइड्रोलॉजी कारोबार को अलग करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. डिमर्जर के बाद डिफेंस और स्पेस सेगमेंट अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों के रूप में काम करेंगे. मजबूत रिटर्न हिस्ट्री और बेहतर तिमाही नतीजों के चलते स्टॉक चर्चा में है. जानें डिटेल्स.
Astra Microwave Demerger Plan: डिफेंस, स्पेस, मेटेरोलॉजी और टेलीकॉम सेक्टर के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) और माइक्रोवेव सब-सिस्टम डिजाइन व मैन्युफैक्चर करने वाली स्मॉल-कैप कंपनी Astra Microwave Product Ltd इन दिनों चर्चा में है. कंपनी के बोर्ड ने अपने स्पेस, मेटेरोलॉजी और हाइड्रोलॉजी कारोबार को अलग करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके बाद शेयर बाजार में इस स्टॉक पर निवेशकों की नजरें टिक गई हैं. करीब 9419 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली इस कंपनी का शेयर हाल ही में 968.45 रुपये पर ट्रेड करता दिखा, जो पिछले बंद भाव 991.10 रुपये के मुकाबले लगभग 2.38 फीसदी की गिरावट दर्शाता है.
क्या है डिमर्जर की योजना?
कंपनी ने संकेत दिया है कि वह अपने स्पेस, मौसम और हाइड्रोलॉजी से जुड़े कारोबार को अलग कंपनी में ट्रांसफर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. इस पुनर्गठन के बाद दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियां अस्तित्व में आएंगी. पहली कंपनी, Astra Microwave Products Limited, डिफेंस और एयरोस्पेस कारोबार पर फोकस जारी रखेगी. दूसरी यूनिट, Astra Space Technologies Private Limited (ASTPL), पूरी तरह स्पेस और वेदर से जुड़े बिजनेस को संभालेगी. हालांकि अभी यह मंजूरी प्रारंभिक स्तर पर है. अंतिम ढांचा, शेयर एक्सचेंज रेश्यो और दूसरी शर्तें आवश्यक रिपोर्ट और नियामकीय मंजूरियों के बाद तय होंगी.
शेयर की रिटर्न हिस्ट्री?
मौजूदा समय में शेयर का प्रदर्शन अच्छा है. पिछले हफ्ते भर में स्टॉक 8.43 फीसदी तक बढ़ा. वहीं, साल भर के दौरान इसमें 61 फीसदी तक की तेजी आई है. 3 साल और 5 साल के दौरान स्टॉक का भाव क्रमश: 264 फीसदी और 775 फीसदी तक बढ़ा है.
क्या है प्लानिंग?
कंपनी का मानना है कि इस कदम से शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक होगी. डिफेंस और स्पेस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को स्वतंत्र प्लेटफॉर्म देने से दोनों कंपनियां अपनी-अपनी रणनीति के अनुसार तेजी से विस्तार कर सकेंगी. अलग स्ट्रक्चर से गवर्नेंस मजबूत होगी, जवाबदेही बढ़ेगी और कैपिटल एलोकेशन अधिक स्पष्ट हो सकेगा. साथ ही, यह कदम कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को आसान बनाएगा और ट्रांसपेरेंसी बढ़ाएगा. निवेशकों को भी डिफेंस और स्पेस- दोनों हाई-ग्रोथ सेक्टर में अलग-अलग निवेश विकल्प मिल सकेंगे.
स्पेस बिजनेस में ग्रोथ की संभावना
कंपनी के मुताबिक, स्पेस, मेटेरोलॉजी और हाइड्रोलॉजी से जुड़ा कारोबार अब बड़े पैमाने पर विकसित हो चुका है और लाभदायक भी है. सैटेलाइट डिजाइन, असेंबली और सैटेलाइट डेटा एप्लिकेशन की मांग घरेलू और वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही है. नई इकाई ASTPL को एक इंटीग्रेटेड प्लेयर के रूप में तैयार किया जाएगा, जो अपस्ट्रीम हार्डवेयर से लेकर मिडस्ट्रीम इंटीग्रेशन और डाउनस्ट्रीम डेटा एप्लिकेशन तक पूरी वैल्यू चेन में मौजूदगी रखेगी. हालांकि यह सेगमेंट कैपिटल इंटेंसिव है और इसमें तकनीकी विस्तार के लिए केंद्रित नेतृत्व और निवेश की जरूरत होती है.
डिमर्जर के बाद कैसा होगा स्ट्रक्चर?
डिमर्जर पूरा होने के बाद एस्ट्रा माइक्रोवेव एक प्योर-प्ले डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनी के रूप में काम करेगी. कंपनी अपने जॉइंट वेंचर और पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों में हिस्सेदारी बनाए रखेगी. ASTPL को भी शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा और इसकी शेयरहोल्डिंग संरचना मौजूदा एस्ट्रा के समान होगी. इसे बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट करने की योजना है. स्पेस कारोबार को “गोइंग कंसर्न” आधार पर ट्रांसफर किया जाएगा ताकि संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए.
वित्तीय मोर्चे पर असर?
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि मध्यम और लंबी अवधि में यह सौदा वैल्यू बढ़ाने वाला साबित होगा. फोकस्ड ग्रोथ, बेहतर पूंजी इस्तेमाल और ऑपरेशनल दक्षता से कंपनी की कार्यक्षमता मजबूत होगी. भारत का स्पेस इकोसिस्टम जिस तरह वैश्विक स्तर पर उभर रहा है, उसे देखते हुए यह कदम पूंजी और प्रतिभा दोनों को आकर्षित करने में सहायक हो सकता है.
मंजूरी और समय सीमा
यह डिमर्जर कंपनी अधिनियम और सेबी के नियमों के तहत “स्कीम ऑफ अरेंजमेंट” के जरिए लागू किया जाएगा. इसके लिए बोर्ड, शेयरधारकों, लेनदारों, स्टॉक एक्सचेंज, एनसीएलटी और अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी जरूरी होगी. कंपनी का लक्ष्य है कि सभी आवश्यक अनुमतियां समय पर मिलने पर FY28 की पहली तिमाही तक ASTPL की लिस्टिंग पूरी कर ली जाए. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों, ग्राहकों और साझेदारों के कामकाज पर असर नहीं पड़ेगा.
वित्तीय स्थिति कैसी है?
तिमाही प्रदर्शन की बात करें तो Q3FY26 में कंपनी ने 260 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर लगभग स्थिर रहा, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में 20.9 फीसदी की मजबूत बढ़त दिखाता है. EBITDA 83 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सालाना 9.2 फीसदी और तिमाही आधार पर 72.9 फीसदी की तेज वृद्धि दर्ज की गई. नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 47 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा, लेकिन पिछली तिमाही के 24 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग दोगुना बढ़ गया. यह संकेत देता है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार हुआ है और लागत नियंत्रण बेहतर हुआ है.
कंपनी का परिचय
1991 में स्थापित और हैदराबाद स्थित एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स लिमिटेड RF और माइक्रोवेव सब-सिस्टम विकसित करती है. इसके प्रोडक्ट में रडार इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, टेलीमेट्री, सैटेलाइट सब-सिस्टम, ग्राउंड-बेस्ड रडार, मौसम निगरानी उपकरण और होमलैंड सिक्योरिटी समाधान शामिल हैं. कंपनी अपने प्रोडक्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निर्यात करती है. वित्तीय दृष्टि से कंपनी की स्थिति संतुलित मानी जा सकती है. इसका ROE लगभग 14.4 फीसदी, ROCE करीब 18.7 फीसदी और डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.24 है, जो नियंत्रित कर्ज स्थिति को दर्शाता है. कंपनी का P/E रेश्यो 57.7 गुना है, जो उद्योग के औसत के बराबर है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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