RBI की सख्ती से बैंकिंग शेयर धड़ाम! 3 फीसदी टूटा बैंक निफ्टी, जानें क्यों मची खलबली?

रुपये में इस साल अब तक 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी आ चुकी है. RBI पहले ही डॉलर बेचकर बाजार को संभालने की कोशिश कर चुका है, लेकिन अब उसने रणनीति बदलते हुए बैंकों की सट्टेबाजी पर लगाम लगाने का रास्ता चुना है.

क्यों गिरे बैंकिंग स्टॉक्स? Image Credit: Canva

सोमवार के कारोबार में बैंकिंग शेयरों पर जबरदस्त दबाव देखने को मिला. RBI के नए निर्देश के बाद बैंक निफ्टी 3.8 प्रतिशत तक गिर गया. दरअसल, RBI ने बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपने नेट ओपन रुपया पोजिशन को हर दिन के अंत तक 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने का निर्देश दिया है. इस नियम का पालन 10 अप्रैल तक करना होगा. इस खबर के बाद बैंक निफ्टी के सभी 14 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे. पिछले दो सत्रों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के बाद इंडेक्स में तेज गिरावट आई और यह दिन के निचले स्तर 50,744.60 तक फिसल गया.

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

  • AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जहां शेयर करीब 4.7 प्रतिशत गिरकर 841.50 रुपये पर आ गया.
  • इंडसइंड बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में भी 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.
  • फेडरल बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में करीब 2 प्रतिशत की कमजोरी रही.
  • हेवीवेट HDFC बैंक का शेयर दबाव में रहा और यह 738.30 रुपये के नए निचले स्तर पर पहुंच गया.
  • वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई.

RBI के फैसले से क्यों आया दबाव?

RBI के इस फैसले का मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को कम करना है. बैंक अक्सर अलग-अलग बाजारों में कीमत के अंतर का फायदा उठाकर डॉलर में ट्रेड करते हैं. अब इस पर सख्त लिमिट लगने से बैंकों को अपने कई पुराने सौदे बंद करने पड़ रहे हैं. इन पोजिशन को कम करने के लिए बैंक डॉलर बेच रहे हैं, जिससे रुपये को सपोर्ट मिल रहा है. हालांकि, जल्दबाजी में सौदे बंद करने से बैंकों को नुकसान भी हो सकता है.

Emkay Global Financial Services की राय

Emkay Global Financial Services के अनुसार, रुपये में इस साल अब तक 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी आ चुकी है. RBI पहले ही डॉलर बेचकर बाजार को संभालने की कोशिश कर चुका है, लेकिन अब उसने रणनीति बदलते हुए बैंकों की सट्टेबाजी पर लगाम लगाने का रास्ता चुना है. रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने बैंकों के नेट ओपन पोजिशन पर सख्त सीमा लगाकर साफ संदेश दिया है कि वे रुपये में गिरावट पर दांव नहीं लगा सकते. इससे बैंकों की ट्रेजरी इनकम और करेंसी ट्रेडिंग से होने वाली कमाई पर असर पड़ सकता है.

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