कोल गैसीफिकेशन पर सरकार का 375 अरब रुपये का मास्टरस्ट्रोक, इन 4 कंपनियों पर रखें नजर; मिल सकता है बड़ा बूस्ट

केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 375 अरब रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीफिकेशन करना है. इस योजना से Coal India Limited, Larsen & Toubro, Bharat Heavy Electricals Limited और Rashtriya Chemicals and Fertilisers Limited जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है.

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Coal Gasification India: केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 375 अरब रुपये की बड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीफिकेशन करना है, जिससे भारत की एलएनजी, यूरिया, मेथेनॉल और अन्य इम्पोर्टेड ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके. एक्सपर्ट का मानना है कि इस योजना से करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है. सरकार परियोजनाओं को प्लांट और मशीनरी लागत का 20 फीसद तक वित्तीय प्रोत्साहन देगी. इस फैसले का फायदा कोल माइनिंग, ईपीसी, इंडस्ट्रियल गैस, फर्टिलाइजर और एनर्जी सेक्टर की कई कंपनियों को मिल सकता है.

Coal India Limited पर सबसे ज्यादा नजर

Coal India Limited इस योजना से सबसे ज्यादा फायदा पाने वाली कंपनियों में शामिल मानी जा रही है. कंपनी देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का लगभग 80 फीसद हिस्सा देती है और भारत की करीब 55 फीसद बिजली उत्पादन जरूरतों से जुड़ी हुई है. कंपनी अब पारंपरिक कोल माइनिंग से आगे बढ़कर अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है.

इसकी सहायक कंपनी Coal Gas India भी गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. equitymaster की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 3 वर्षों में कंपनी के रेवेन्यू में 11.2 फीसद और नेट प्रॉफिट में 26.7 फीसद की सीएजीआर ग्रोथ दर्ज की गई है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.79 फीसद बढ़कर 462.20 रुपये पर पहुंच गया है.

Larsen & Toubro को मिल सकता है बड़ा फायदा

Larsen & Toubro यानी एलएंडटी भी कोल गैसीफिकेशन थीम की प्रमुख कंपनियों में शामिल है. कंपनी का हाइड्रोकार्बन ऑनशोर बिजनेस कोल और पेट-कोक गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स के लिए टर्नकी ईपीसी सॉल्यूशंस प्रदान करता है. हाल ही में कंपनी को भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड से ओडिशा में कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्रोजेक्ट के लिए बड़ा ऑर्डर मिला है.

यह परियोजना प्रतिदिन 2000 टन अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन क्षमता वाली होगी. विशेषज्ञों के अनुसार सरकार के कोल गैसीफिकेशन पुश से एलएंडटी जैसी ईपीसी कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.82 फीसद बढ़कर 3495.10 रुपये पर पहुंच गया है.

Bharat Heavy Electricals Limited भी रडार पर

Bharat Heavy Electricals Limited यानी बीएचईएल भी इस सेक्टर में अहम भूमिका निभा रही है. कंपनी ने Coal India के साथ मिलकर भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड नामक जॉइंट वेंचर बनाया है. यह जेवी भारत का पहला कमर्शियल-स्केल कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट प्लांट विकसित कर रहा है. परियोजना में बीएचईएल की स्वदेशी प्रेसराइज्ड फ्लुइडाइज्ड बेड गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 3.59 फीसद गिरकर 398.30 रुपये पर पहुंच गया है.

Rashtriya Chemicals and Fertilisers Limited को भी हो सकता है फायदा

Rashtriya Chemicals and Fertilisers Limited यानी आरसीएफ भी इस योजना से लाभ पाने वाली कंपनियों में शामिल हो सकती है. कोल-डिराइव्ड सिंगैस का उपयोग यूरिया और अमोनिया उत्पादन में किया जा सकता है, जिससे इम्पोर्ट कॉस्ट कम करने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत कोल गैसीफिकेशन क्षमता तेजी से बढ़ाता है, तो फर्टिलाइजर कंपनियों की रॉ मटेरियल कॉस्ट घट सकती है और लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी मजबूत हो सकती है.

सरकार की यह योजना केवल एनर्जी सिक्योरिटी ही नहीं, बल्कि मेक इन इंडिया, इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन और रिन्यूएबल ट्रांजिशन स्ट्रैटेजी का भी बड़ा हिस्सा मानी जा रही है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 0.18 फीसद गिरकर 124.63 रुपये पर पहुंच गया है.

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