क्या खत्म हो रहा Bitcoin का जलवा? एक साल में 40% की गिरावट; AI क्रांति के बीच फीका पड़ा क्रिप्टो बाजार
वर्ष 2026 में Bitcoin निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी में इस साल अब तक भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है. ETF से रिकॉर्ड निकासी, Stablecoins की बढ़ती लोकप्रियता और Ethereum व Solana जैसी क्रिप्टोकरेंसी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने Bitcoin पर दबाव बढ़ाया है.

Bitcoin: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin के लिए वर्ष 2026 अब तक बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. कभी निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय डिजिटल एसेट माने जाने वाला Bitcoin अब AI आधारित कंपनियों और बड़े IPO की चमक के सामने फीका पड़ता दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि इस साल Bitcoin अपने पिछले एक दशक के मुकाबले सबसे कमजोर प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है.
15 फीसदी की गिरावट
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह Bitcoin की कीमत में लगभग 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो नवंबर 2022 में FTX एक्सचेंज संकट के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है. Bitcoin की कीमत फिलहाल करीब 63,000 डॉलर के आसपास बनी हुई है, जबकि वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक यह अपनी कीमत का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गंवा चुका है. यह 2015 के बाद किसी भी वर्ष की समान अवधि में सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है.
AI सेक्टर बना निवेशकों की पहली पसंद
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों का पैसा अब तेजी से AI आधारित कंपनियों और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की ओर जा रहा है. ChatGPT के लॉन्च के बाद शुरू हुई AI क्रांति ने टेक्नोलॉजी शेयरों में जबरदस्त तेजी ला दी है. डाटा सेंटर, चिप निर्माण, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI सॉफ्टवेयर से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. पिछले एक वर्ष में अमेरिकी सेमीकंडक्टर शेयरों में लगभग 170 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में Bitcoin करीब 40 फीसदी तक कमजोर हुआ है.
Bitcoin की सबसे बड़ी ताकत ही बनी कमजोरी
एक समय Bitcoin को पारंपरिक निवेश इंस्ट्रूमेंट से अलग माना जाता था. इसकी ज्यादा वोलैटिलिटी और शेयर बाजार से कम संबंध इसे पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का आकर्षक विकल्प बनाते थे. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. बड़े संस्थागत निवेशकों, निवेश बैंकों और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के बढ़ते प्रभाव के कारण Bitcoin का व्यवहार पारंपरिक वित्तीय एसेट जैसा होता जा रहा है. इससे इसकी विशिष्ट पहचान कमजोर हुई है. वहीं, Bitcoin और अमेरिकी शेयर बाजार के बीच संबंध भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, जिससे यह पहले जैसा अलग निवेश विकल्प नहीं रह गया है.
क्रिप्टो बाजार में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
Bitcoin को अब केवल शेयर बाजार से ही नहीं, बल्कि अपने ही क्रिप्टो जगत से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. Ethereum, Solana और BNB जैसी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं. इसके अलावा, स्थिर मूल्य वाली Stablecoins भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, कुल क्रिप्टो बाजार में Bitcoin की हिस्सेदारी एक वर्ष पहले 63 फीसदी थी, जो अब घटकर करीब 56 फीसदी रह गई है. दूसरी ओर, Stablecoins की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी होकर 13 फीसदी तक पहुंच गई है. Tether और USDC जैसे Stablecoins में होने वाला दैनिक कारोबार कई प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी के संयुक्त कारोबार के बराबर पहुंच चुका है.
ETF से रिकॉर्ड निकासी ने बढ़ाई चिंता
Bitcoin पर दबाव का एक बड़ा कारण ETF निवेशकों की निकासी भी है. आंकड़े बताते हैं कि जून के पहले सप्ताह में निवेशकों ने Bitcoin आधारित ETF से 2.7 अरब डॉलर से अधिक की राशि निकाली है, जो अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक निकासी मानी जा रही है. वर्ष 2026 में अब तक कुल शुद्ध निकासी 3.1 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है. इसके विपरीत, सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े प्रमुख ETF में केवल जून के पहले सप्ताह में ही 3 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है. पूरे वर्ष में यह आंकड़ा 21 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है.
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