Closing Bell: शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 719 अंक टूटा और निफ्टी 23150 के नीचे; ऑयल एंड गैस में भारी बिकवाली

Closing Bell: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार के इंडेक्स दिन के निचले स्तर से ऊपर ट्रेड करते दिखे. पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण एशियाई बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई. अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं का भी ग्लोबल निवेशकों के रिस्क लेने के मूड पर असर पड़ा.

शेयर बाजार में गिरावट. Image Credit: Tv9

Closing Bell: सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. ग्लोबल मार्केट में तेज गिरावट, FII की लगातार बिकवाली और अन्य वजहों से दलाल स्ट्रीट पर सेंटीमेंट कमजोर हुआ, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट आई.

8 जून को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क कमजोर स्तर पर बंद हुए. सभी सेक्टर में बिकवाली के कारण निफ्टी 23,200 के स्तर से नीचे बंद हुआ.

सेंसेक्स 719.08 अंक या 0.97 फीसदी गिरकर 73,524.26 पर और निफ्टी 243.70 अंक या 1.04 फीसदी गिरकर 23,123.00 पर बंद हुआ. लगभग 1172 शेयरों में बढ़त हुई, 3007 शेयरों में गिरावट आई और 154 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

टॉप गेनर्स और लूजर्स

निफ्टी में शामिल शेयरों में विप्रो, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, एटरनल, इंटरग्लोब एविएशन और श्रीराम फाइनेंस सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे. दूसरी ओर, मैक्स हेल्थकेयर, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक महिंद्रा और नेस्ले इंडिया ने बाजार के रुख के उलट बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया.

सेक्टोरल इंडेक्स

सेक्टर के हिसाब से देखें तो सभी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. रियल्टी और मेटल इंडेक्स का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिनमें 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी, मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव दिखा. इन सभी में सत्र के दौरान 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.3% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.7% की गिरावट आई, जो निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की व्यापक ट्रेंड को दर्शाता है.

रुपये में गिरावट

8 जून को भारतीय रुपये में भारी गिरावट देखी गई और यह पिछले बंद भाव 94.94 के मुकाबले 77 पैसे गिरकर 95.71 प्रति अमेरिकी डॉलर पर बंद हुआ.

कच्चे तेल की कीमतें

लेबनान पर इजरायल के नए हमलों और ईरान में धमाकों की आवाजें सुनाई देने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया. बढ़ते टकराव ने इस उम्मीद को खत्म कर दिया कि बड़े पैमाने पर चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो सकेगी.

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.39 फीसदी बढ़कर $96.24 प्रति बैरल हो गया, जबकि US क्रूड फ्यूचर्स 3.17% बढ़कर $93.41 प्रति बैरल पर पहुंच गया. मार्च के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का उस पर बुरा असर पड़ता है. इससे आयात बिल बढ़ता है, भुगतान संतुलन (balance of payments) बिगड़ता है और रुपये की कीमत गिरने का दबाव बनता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है.

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