Closing Bell: पश्चिम एशिया के संघर्ष से हिला बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी 2% से अधिक गिरकर बंद, निवेशकों के 13 लाख करोड़ खाक

Closing Bell: जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो रहा है, वैसे-वैसे भारतीय शेयर बाजार में भी बिकवाली बढ़ रही है. सोमवार 23 मार्च के सत्र में प्रमुख इंडेक्स में 2 फीसदी की और गिरावट दर्ज की गई, जिससे वे अप्रैल 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए.

शेयर बाजार में गिरावट. Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

Closing Bell: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 1,950 अंकों तक लुढ़क गया और निफ्टी 22,500 के स्तर से नीचे गिर गया. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध, रुपये की गिरती कीमत और अन्य फैक्टर्स का बाजार के माहौल पर लगातार दबाव बना रहा.

23 मार्च को सभी सेक्टर्स में बिकवाली के चलते भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,550 के नीचे आ गया.

सेंसेक्स 1,836.57 अंक या 2.46 फीसदी गिरकर 72,696.39 पर क्लोज हुआ और निफ्टी 601.85 अंक या 2.60 फीसदी गिरकर 22,512.65 पर बंद हुआ. लगभग 592 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, 3654 शेयरों में गिरावट आई, और 114 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

टॉप गेनर्स और लूजर्स

निफ्टी पर सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट, अडानी एंटरप्राइजेज और जियो फाइनेंशियल थे. जबकि सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वाले स्टॉक्स में HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, ONGC, पावर ग्रिड कॉर्प और TCS शामिल थे.

सेक्टोरल इंडेक्स

सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए. इनमें रियल्टी, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और PSU बैंक में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई.

निवेशकों के 13 लाख करोड़ साफ

आज की भारी बिकवाली के चलते BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से करीब 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक साफ हो गए, जिससे यह घटकर 415 लाख करोड़ रुपये रह गया.

शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

अमेरिका-ईरान युद्ध और तेज होता हुआ: पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि उम्मीद यह थी कि इसमें जल्द ही कुछ नरमी आएगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को धमकी दी कि अगर ईरान ने 48 घंटों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ को नहीं खोला, तो वे ईरान के एनर्जी स्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह कर देंगे. वहीं दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके पावर प्लांट को निशाना बनाने की अपनी धमकी पर अमल किया, तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा.

रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर लुढ़का: ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 18 पैसे गिरकर 93.8925 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. यह गिरावट पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा की कीमतों में और अधिक उछाल आने की आशंकाओं के चलते आई.

कच्चे तेल का झटका अब एक बड़ी चिंता बन गया है: जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता जा रहा है और तेज होता जा रहा है, भारत के मैक्रोइकोनॉमिक नजरिए पर इसके असर को लेकर चिंताएं सामने आने लगी हैं. ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के निशान से ऊपर बना हुआ है, जिससे यह डर बढ़ गया है कि भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ सकता है और उसकी राजकोषीय मजबूती को नुकसान पहुंच सकता है.

FPI की बिकवाली: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भारतीय रुपये में गिरावट के बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के भारतीय शेयर बेच दिए हैं.
NSDL के डेटा के मुताबिक, FPIs ने मार्च में 20 तारीख तक भारतीय फाइनेंशियल मार्केट से 1,03,967 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं.

‘गैप-डाउन’ ओपनिंग

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख, सुदीप शाह ने कहा, ‘ हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन में, घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में एक और तेज ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक अनिश्चितता का बढ़ना था. पूरे सेशन के दौरान नकारात्मक माहौल बना रहा, और लगातार बिकवाली के दबाव के चलते इंडेक्स पूरे दिन लाल निशान में ही रहा. आखिरकार, निफ्टी 22500 के स्तर के करीब बंद हुआ, और 2.60% की भारी गिरावट के साथ सेटल हुआ. खास बात यह है कि यह अप्रैल 2025 के बाद से सबसे निचला क्लोजिंग स्तर था, और इंडेक्स ने एक लंबी और बड़ी ‘बेयरिश कैंडल’ बनाई, जो साफ तौर पर बाजार में शामिल लोगों के बीच मजबूत गिरावट की गति और जोखिम से बचने के ट्रेंड को दर्शाता है.’

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