कमोडिटी तेजी का असर! Vedanta स्टॉक 52-वीक हाई पर, 60% रैली के साथ Hindustan Zinc बनी सबसे बड़ी मेटल कंपनी

मेटल्स की कीमतों में आई नई तेजी ने शेयर बाजार में हलचल बढ़ा दी है. एक बड़ी कंपनी के शेयरों में मजबूती, ब्रोकरेज की बदली राय और आने वाले कॉरपोरेट बदलावों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. क्या यह तेजी टिकेगी या नया मोड़ आएगा, यही सवाल बना हुआ है.

वेदांता और हिंदुस्तान जिंक Image Credit: Getty image

Vedanta 52 week high: कमोडिटी बाजार में आई नई तेजी का असर शुक्रवार को शेयर बाजार में साफ दिखा, जहां Vedanta Ltd के शेयरों ने नई ऊंचाई छू ली. तांबे और जिंक की कीमतों में मजबूती के बीच अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली इस कंपनी के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. ब्रोकरेज हाउस भी स्टॉक को लेकर उत्साहित हैं और डिमर्जर के बाद वैल्यू अनलॉकिंग को इसका बड़ा ट्रिगर मान रहे हैं.

कमोडिटी तेजी से Vedanta को मिला सपोर्ट

शुक्रवार को Vedanta के शेयर बीएसई पर करीब 3 फीसदी चढ़कर Rs 699 के नए 52-वीक हाई पर पहुंच गए. यह तेजी ऐसे समय आई, जब लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें उछलकर $13,407 के अपने हालिया उच्च स्तर के करीब पहुंच गईं. जिंक की कीमतों में भी करीब 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. कमोडिटी बाजार की यह मजबूती सीधे तौर पर Vedanta जैसे मेटल प्लेयर्स के लिए पॉजिटिव मानी जा रही है.

इसी बीच, Hindustan Zinc के शेयरों में बीते दो महीनों में करीब 60 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. सिल्वर की कीमतों में उछाल के चलते कंपनी का मार्केट कैप लगभग Rs 3 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी मेटल कंपनी बन गई है और उसने अपनी पैरेंट Vedanta को भी पीछे छोड़ दिया है. शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में लघभग पांच फीसदी की तेजी देखने को मिली, शेयर 698.70 रुपये पर बंद हुए.

ब्रोकरेज Vedanta पर क्यों बुलिश हैं

Nuvama Institutional Equities ने हाल ही में Vedanta का टारगेट प्राइस बढ़ाकर Rs 806 कर दिया है, जो पहले Rs 686 था. मौजूदा स्तर से यह करीब 18 प्रतिशत का अपसाइड दिखाता है. ब्रोकरेज ने डिमर्जर से होने वाली वैल्यू अनलॉकिंग को ध्यान में रखते हुए FY28E के SOTP मॉडल के आधार पर यह मूल्यांकन किया है और Vedanta को अपनी टॉप पिक्स में बरकरार रखा है.

पिछले महीने NCLT ने Vedanta के डिमर्जर को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कंपनी को पांच अलग-अलग लिस्टेड इकाइयों में बांटा जाएगा. डिमर्जर के बाद बेस मेटल्स का कारोबार Vedanta Ltd के पास रहेगा, जबकि Vedanta Aluminium, Talwandi Sabo Power, Vedanta Steel and Iron और Malco Energy बाकी चार इकाइयां होंगी. नुवामा के मुताबिक, डिमर्जर से जुड़े ज्यादातर रेगुलेटरी अप्रूवल अब अंतिम चरण में हैं.

EBITDA और कमाई को लेकर मजबूत अनुमान

ब्रोकरेज ने FY27E और FY28E के EBITDA अनुमानों को क्रमशः 17 प्रतिशत और 8 प्रतिशत बढ़ाया है. इसके पीछे ऊंची कमोडिटी कीमतें, लागत में कटौती और वॉल्यूम ग्रोथ जैसे फैक्टर हैं. FY25 से FY28 के बीच EBITDA में करीब 20 प्रतिशत CAGR की उम्मीद जताई गई है, जो Rs 724 अरब तक पहुंच सकता है.

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इतिहास देखें तो FY16 से FY26 के बीच LME पर एल्युमिनियम, जिंक और सिल्वर की औसत कीमतें क्रमशः $2,170 प्रति टन, $2,754 प्रति टन और $22.7 प्रति औंस रहीं. लेकिन CY26 में इन मेटल्स में सप्लाई की कमी के चलते कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं. इसी को देखते हुए FY27E और FY28E के लिए एल्युमिनियम, जिंक और सिल्वर की कीमतों का अनुमान ऊपर की ओर संशोधित किया गया है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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