FPI की निकासी के बावजूद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में तेजी, LG, डिक्सन और Voltas के स्टॉक्स पर रखें नजर; अब असली टेस्ट
Consumer Durables Stocks: GST के नियमों में बदलाव से AC और TV सस्ते हुए हैं, इनकम टैक्स में राहत से लोगों की खर्च करने योग्य आय बढ़ी है, और प्रीमियम उत्पादों की ओर झुकाव से कंपनियों के मार्जिन में विस्तार हो रहा है. शुरुआती रुझान बताते हैं कि FPIs कुछ प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं.
Highlights
- पिछले छह महीनों में से चार महीनों में इसमें पॉजिटिव रुझान देखने को मिला है.
- FPI निवेश के मामले में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप तीन सेक्टर्स में शामिल रहा है.
- इनकम टैक्स में राहत से लोगों की खर्च करने योग्य आय बढ़ी है.
Consumer Durables Stocks: वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं) सेगमेंट में 9,901 करोड़ रुपये का विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) आया है. पिछले छह महीनों में से चार महीनों में इसमें पॉजिटिव रुझान देखने को मिला है. यह निवेश तब आया है, जब इस कैलेंडर वर्ष में FPI की बिकवाली रिकॉर्ड 3.07 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई है, और चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.76 ट्रिलियन रुपये हो गया है.
डिस्पोजेबल इनकम में बढ़ोतरी
एनालिस्ट्स का मानना है कि प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग, लोगों की खर्च करने योग्य आय (डिस्पोजेबल इनकम) में बढ़ोतरी, आवास की मांग और घरेलू उपकरणों की कम पहुंच (लो पेनिट्रेशन) के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट FPI निवेशकों के रडार पर बना हुआ है.
टॉप तीन सेक्टर्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शामिल
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एनालिसस से पता चलता है कि इस वित्त वर्ष में FPI निवेश के मामले में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप तीन सेक्टर्स में शामिल रहा है, जो केवल ‘सर्विसेज’ और ‘कंज्यूमर सर्विसेज’ से पीछे है.
NSE के आंकड़ों के अनुसार, भारी निवेश के बावजूद ‘निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स’ एक महीने में 6 फीसजी और तीन महीने में 5 फीसदी नीचे आया है, जबकि छह महीने और साल-दर-साल (YTD) के आधार पर यह स्थिर रहा है.
कहां निवेश कर रहे विदेशी निवेशक?
बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, चॉइस ब्रोकिंग के अक्षत गर्ग ने बताया कि अमेरिकी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, तथा रुपये पर दबाव के कारण विदेशी निवेशक उन सेक्टर्स से पैसा निकाल रहे हैं, जो ब्याज दरों और कमोडिटी की कीमतों के प्रति संवेदनशील हैं (जैसे फाइनेंशियल, ऑयल और गैस).
इसके बजाय, वे उन बिजनेस में निवेश कर रहे हैं, जो घरेलू मांग पर आधारित हैं. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इस कैटेगरी में बिल्कुल फिट बैठते हैं.
कंपनियों के मार्जिन में विस्तार
GST के नियमों में बदलाव से AC और TV सस्ते हुए हैं, इनकम टैक्स में राहत से लोगों की खर्च करने योग्य आय बढ़ी है, और प्रीमियम उत्पादों की ओर झुकाव से कंपनियों के मार्जिन में विस्तार हो रहा है.
उदाहरण के लिए, LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का Q1 मुनाफा 27 फीसदी बढ़ा है, और टाइटन के घरेलू कारोबार में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. गर्ग के अनुसार, रूम AC की पहुंच अभी भी 10 फीसदी से कम है, जिसका मतलब है कि इस सेक्टर्स में ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं.
क्या FPI की खरीदारी का ट्रेंड बना रहेगा?
शुरुआती रुझान बताते हैं कि FPIs कुछ प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं, खासकर सितंबर में 1,905 करोड़ रुपये की निकासी के साथ. गर्ग ने बताया कि तांबा, एल्युमिनियम और माल ढुलाई (फ्रेट) जैसी इनपुट लागतें साल-दर-साल (YoY) लगभग 15 फीसदी बढ़ गई हैं. ब्रांड भी कीमतें 4-10 फीसदी तक बढ़ा रहे हैं, जिससे बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) पर असर पड़ सकता है. उन्होंने इस सेक्टर में चुनिंदा खरीदारी की उम्मीद जताई है.
त्योहारी सीजन में असली टेस्ट
वैल्यूएशन में पहले से ही काफी सकारात्मकता शामिल है. त्योहारी सीजन में होने वाली बिक्री और Q3 के मार्जिन से तय होगा कि आगे क्या होता है. उन्होंने कहा कि अगर मांग कीमतों में हुई बढ़ोतरी को झेल लेती है, तो FPIs का ‘ड्यूरेबल्स’ (टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं) सेक्टर में निवेश बना रह सकता है. भारतीय कंजम्पशन (उपभोग) बाजार में निवेश करने के लिए यह एक बड़ा और लिक्विड विकल्प है, जिसमें कमाई बढ़ने (अर्निंग्स अपग्रेड) की भी संभावना है.
इन शेयरों पर रखें नजर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, निवेशकों को LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वोल्टास जैसे शेयरों पर नजर रखनी चाहिए. इनमें मांग में सुधार और लंबी अवधि की ग्रोथ के मौके दिख रहे हैं, बशर्ते कंपनियां अच्छी कमाई करके दिखाएं और लंबे समय तक मुनाफा कमाना जारी रखें.
डिस्क्लेमर: Money9live कभी भी किसी शेयर, आईपीओ और म्यूचुअल फंड में निवेश की सलाह नहीं देता है. ये खबर केवल आपकी जानकारी के लिए है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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