रेयर अर्थ स्टॉक हैवी डिस्काउंट पर, इन 3 पर रखें नजर, सरकार से सेक्टर को मिला 7200 करोड़ का बूस्ट

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर की तेजी ने रेयर अर्थ मिनरल्स की मांग को रणनीतिक स्तर पर पहुंचा दिया है. वित्त वर्ष 25 में ईवी रजिस्ट्रेशन में मजबूत बढ़त और सरकार की 72.8 अरब रुपये की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना ने इस सेक्टर को नई दिशा दी है. इसी बीच कई स्टॉक्स अपने 52-वीक हाई से भारी गिरावट पर ट्रेड कर रहे हैं.

रेयर अर्थ Image Credit: Freepik.com

Rare Earth Stocks: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 25 में देश में 1.96 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो सालाना आधार पर 17 फीसद ज्यादा है. विंड टर्बाइन, डिफेंस उपकरण, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर में हाई परफॉर्मेंस मैग्नेट की जरूरत ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स को रणनीतिक संसाधन बना दिया है. इसी बीच कुछ रेयर अर्थ से जुड़े स्टॉक्स अपने 52-वीक हाई से भारी गिरावट के बाद निवेशकों के रडार पर हैं. तो चलिए आपको बताते हैं उन कंपनियों के बारे में, जिन पर आप नजर रख सकते हैं.

Owais Metal and Mineral Processing

ओवैस मेटल एंड मिनरल प्रोसेसिंग मैंगनीज ऑक्साइड, फेरो मैंगनीज, क्वार्ट्ज और स्लैग से रेयर अर्थ मिनरल्स की रीसाइक्लिंग का काम करती है. कंपनी ने फरवरी 2024 में 87 रुपये पर आईपीओ लॉन्च किया था और यह एनएसई के एसएमई सेगमेंट में लिस्टेड है. आज इसमें 5 फीसदी का लोअर सर्किट लगा है.

NLC India

एनएलसी इंडिया की मुख्य ताकत लिग्नाइट माइनिंग और थर्मल पावर जेनरेशन है. तमिलनाडु और राजस्थान में इसके बड़े प्रोजेक्ट्स हैं. पीटीआई के मुताबिक, कंपनी लिथियम, कॉपर, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के ब्लॉक्स को लेकर अफ्रीकी देशों में शुरुआती बातचीत कर रही है. साथ ही, कंपनी 2030 तक 10 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखी है.

Eco Recycling

ईको रीसाइक्लिंग ई-वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर की प्रमुख कंपनी है, जो मेटल रिकवरी और रीसाइक्लिंग का काम करती है. कंपनी ने वसई में 6,000 एमटीपीए क्षमता का नया लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग प्लांट शुरू किया है, जिससे कुल क्षमता 31,200 एमटीपीए हो गई है.

भारत सरकार का बड़ा कदम

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए 72.8 अरब रुपये के कार्यक्रम को मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है. इस फैसले से आने वाले वर्षों में इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों को अवसर मिल सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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