Yes Bank शेयर डील में नियमों का उल्लंघन? SEBI ने EY और PwC के अधिकारियों पर लगाया इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप

एक बड़े कॉर्पोरेट सौदे से जुड़ा मामला अब नियामक जांच के दायरे में है. गोपनीय जानकारी, आंतरिक प्रक्रियाएं और कुछ बड़े नाम चर्चा में हैं. इस कार्रवाई के नतीजे न सिर्फ संबंधित कंपनियों, बल्कि पूरे बाजार में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता पर असर डाल सकते हैं.

यस बैंक Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

Yes Bank Insider Trading Case: भारतीय शेयर बाजार में पारदर्शिता और भरोसे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. देश के बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने Yes Bank के 2022 के शेयर ऑफर से जुड़े एक मामले में बड़े वैश्विक नामों पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. रॉयटर्स ने नोटिस को रिव्यू कर रिपोर्ट किया कि इस कार्रवाई में PwC, EY, Carlyle और Advent जैसे दिग्गज संस्थानों के मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं. इस मामले को बाजार के लिए एक असाधारण और गंभीर घटनाक्रम माना जा रहा है.

Yes Bank डील से जुड़ा पूरा मामला

SEBI के मुताबिक यह मामला जुलाई 2022 में Yes Bank के शेयर ऑफर से जुड़ा है. इस ऑफर में अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म Carlyle Group और Advent International ने मिलकर करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 1.1 अरब डॉलर थी. इस डील के ऐलान के एक दिन बाद Yes Bank के शेयर करीब 6 प्रतिशत चढ़कर खुले थे, जिससे बाजार में पहले से लीक हुई जानकारी की आशंका गहरी हुई.

SEBI का आरोप क्या है

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI द्वारा नवंबर में जारी किया गया शो-कॉज नोटिस, जो अब तक सार्वजनिक नहीं था, आरोप लगाता है कि PwC और EY के कुछ अधिकारियों ने अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी साझा की. इस जानकारी के आधार पर उनके परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने Yes Bank के शेयरों में ट्रेडिंग कर गैरकानूनी मुनाफा कमाया. कुल 19 लोगों पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.

PwC और EY की भूमिका पर सवाल

SEBI के अनुसार, EY को Advent ने टैक्स सलाह के लिए नियुक्त किया था और Yes Bank ने अपनी वैल्यूएशन के लिए EY मर्चेंट बैंकिंग सर्विसेज की सेवाएं ली थीं. इसी दौरान EY पर आरोप है कि उसने Yes Bank को सही तरीके से ‘restricted list’ में नहीं डाला, जिससे कई ऐसे कर्मचारी भी शेयर ट्रेड कर सके, जिनके पास संवेदनशील जानकारी तक पहुंच हो सकती थी.

वहीं PwC पर आरोप है कि उसके पास एडवाइजरी और कंसल्टिंग क्लाइंट्स के लिए कोई स्पष्ट restricted stock list नहीं थी. SEBI का कहना है कि PwC की आंतरिक नीतियां कमजोर थीं, जिससे Yes Bank के शेयरों में कई ट्रेड रिपोर्ट ही नहीं किए गए.

वरिष्ठ अधिकारियों से मांगा जवाब

SEBI ने EY इंडिया के चेयरमैन और सीईओ राजीव मेमानी और कंपनी के COO से यह बताने को कहा है कि उनके खिलाफ जुर्माना क्यों न लगाया जाए. इसी तरह PwC इंडिया के चीफ इंडस्ट्रीज ऑफिसर अरनब बसु और दो पूर्व अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है. हालांकि, इन वरिष्ठ अधिकारियों पर सीधे तौर पर ट्रेडिंग का आरोप नहीं है, लेकिन आंतरिक नियंत्रण की विफलता को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

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शो-कॉज नोटिस SEBI की जांच प्रक्रिया का पहला औपचारिक कदम होता है. अगर आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थानों पर भारी जुर्माना या बाजार से जुड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इस मामले की गंभीरता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इसमें वैश्विक कंसल्टिंग और प्राइवेट इक्विटी फर्मों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स शामिल हैं.

शेयरों का क्या है हाल?

शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. कंपनी के शेयर 3 फीसदी से ज्यादा टूट कर 20.9 रुपये पर बंद हुए. बीते एक साल में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को 14 फीसदी का मुनाफा दिया है, हालांकि एक महीने में ये करीब 4 फीसदी तक गिर चुके हैं. इस कंपनी में 45.73 फीसदी हिस्सेदारी FIIs की है, वहीं रिटेल ने 33.13 फीसदी हिस्सेदारी ली है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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