डेटा सेंटर से रिन्यूएबल तक हर कोई है इसके भरोसे, 33% ROCE के साथ ये सेक्टर बना ‘साइलेंट विनर’; ग्रोथ प्लान भी दमदार

पिछले कुछ सालों में एक ऐसा उद्योग लगातार मजबूत हुआ है, जिसके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हुई. इसके कई आंकड़े चौंकाने वाले हैं, कहीं स्थिर ग्रोथ, कहीं बढ़ती रीइन्वेस्टमेंट, तो कहीं मजबूती से टिके मार्जिन. अब इस सेक्टर में जो बदलाव दिख रहे हैं, वे आने वाले समय की दिशा तय कर सकते हैं.

इलेक्ट्रिकल सेक्टर इंडिया Image Credit: FreePik

India electrical industry growth: देश की अर्थव्यवस्था में कई सेक्टर अपनी भूमिका अदा करते हैं. वे कभी तेजी दिखाते हैं, कभी थम जाते हैं. लेकिन इसी भीड़ में एक ऐसा उद्योग है जिसने बिना किसी शोर, बिना किसी बड़े हाइप और बिना सुर्खियां बनाए लगातार अपनी जगह मजबूत की है. यह सेक्टर न तो किसी बड़े सरकारी अभियान के सहारे बढ़ा और न ही किसी फैशन में आए हुए बिजनेस ट्रेंड की वजह से चर्चा में रहा. इसके बावजूद इसने वह बैलेंस दिखाया है जिसे पाना अक्सर मुश्किल होता है, स्थिर ग्रोथ, मजबूत लाभ और लगातार बढ़ता पुनर्निवेश. यह कहानी है इलेक्ट्रिकल सेक्टर की, जिसने पिछले पांच साल में शांत रहते हुए बेहद संगठित तरीके से अपनी पकड़ मजबूत की है.

पांच साल का प्रदर्शन: धीमी नहीं, स्थिर और भरोसेमंद ग्रोथ

पिछले कुछ वर्षों में कई सेक्टर ऐसे रहे जिन्होंने एक-दो मीट्रिक में तेज प्रदर्शन किया लेकिन तीसरे में फिसल गए. इलेक्ट्रिकल सेक्टर ऐसा नहीं था. इसमें बिक्री भी बढ़ी, मार्जिन भी सुधरे और कैपिटल एफिशियंसी भी मजबूत हुई.
तीन साल में मिला 33 फीसदी का इनक्रिमेंटल ROCE बताता है कि इस सेक्टर में नया निवेश पुरानी संपत्तियों से भी ज्यादा बेहतर रिटर्न दे रहा है. यह किसी इस्टेब्लिश बिजनेस में कम ही देखने को मिलता है.

दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे समय में सेक्टर ने कोई “ब्लॉकबस्टर” ग्रोथ नहीं दिखाई. यह ग्रोथ तेज नहीं थी, लेकिन बेहद भरोसेमंद थी. इसकी असली ताकत यह रही कि इसे मांग सिर्फ एक जगह से नहीं, बल्कि कई दिशाओं से मिली.

चौथरफा मिले ऑर्डर, मजबूत हुआ स्टॉक

इन सभी मांग स्रोतों ने मिलकर सेक्टर को बेहद टिकाऊ और स्थिर बनाया. यही वजह है कि मार्जिन नहीं टूटा, बल्कि बेहतर हुआ. जैसे-जैसे मांग साधारण केबलों से हटकर विशेष, इंस्ट्रूमेंटेशन और हाई-वोल्टेज केबलों की ओर गई, प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ती चली गई.

अब अगला दौर क्यों ज्यादा मजबूत दिख रहा है

पिछले पांच साल जहां “टिकाऊ मांग” की कहानी थे, वहीं आने वाले साल “आक्रामक विस्तार” का सफर हो सकते हैं. कंपनियां अब सिर्फ मांग का लाभ नहीं उठा रहीं, वे सक्रिय रूप से निवेश कर रही हैं. FY25 में कैपेक्स रेवेन्यू का 6.4 फीसदी है. दो और तीन साल की औसत भी इसी के आस-पास है. यह दिखाता है कि यह एक छोटा-मोटा अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरा उद्योग एक बड़े बिल्डआउट के मोड में है.

इलेक्ट्रिकल सेक्टर कमोडिटी से हटकर कैपेबिलिटी-ड्रिवन बन रहा है. यह परिवर्तन किसी भी उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाता है और लंबे समय तक उसे प्रतिस्पर्धा में मजबूत रखता है.

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निवेशकों के लिए नोट

ना अभी भागकर खरीदें, ना इसे पूरी तरह अनदेखा करें. जब कोई सेक्टर स्थिर ग्रोथ, मजबूत मार्जिन और लगातार कैपेक्स दिखाता है, तो उसकी वैल्यूएशन ऊपर जाती है. इलेक्ट्रिकल सेक्टर में भी कई कंपनियों के शेयर पहले ही काफी ऊपर हैं. कुछ जगहों पर तो कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि उन्हें “प्राइस्ड-टू-परफेक्शन” कहा जा सकता है.

इसका मतलब?

ये सब मार्जिन पर शॉर्ट टर्म दबाव डाल सकते हैं. सामान्य वैल्यूएशन पर ये जोखिम गंभीर नहीं लगते, लेकिन ऊंची वैल्यूएशन पर बाजार की प्रतिक्रिया शार्प हो सकती है. बाजार में हर कुछ समय बाद गिरावट या घबराहट आती है. जब ऐसा हो, तो मजबूत वित्तीय मैट्रिक्स वाली कंपनियों को चुनने का सही मौका मिलेगा

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल सेक्टर की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.