छोटी कंपनियों का बड़ा कमाल, मिड-कैप IT स्टॉक्स ने TCS, Infosys और Wipro को ग्रोथ की रेस में छोड़ा पीछे
भारतीय IT सेक्टर आज देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है. दुनिया भर में टेक्नोलॉजी पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है. भारत की IT इंडस्ट्री FY15 में जहां करीब 118 अरब डॉलर की थी, वहीं FY25 तक इसके 283 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
पिछले तीन सालों में भारत की IT इंडस्ट्री में एक बड़ा लेकिन शांत बदलाव देखने को मिला है. जहां कभी TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद हुआ करती थीं, वहीं अब मिड-कैप IT कंपनियां तेजी से सुर्खियों में आ गई हैं. इन कंपनियों ने न सिर्फ बिक्री के मामले में तेज ग्रोथ दिखाई है, बल्कि शेयर बाजार में भी जबरदस्त रिटर्न दिए हैं.
वैश्विक मंदी, अमेरिका और यूरोप में कमजोर मांग और ऊंची ब्याज दरों के बीच बड़ी IT कंपनियां सिंगल डिजिट ग्रोथ के लिए जूझती रहीं. इसके उलट, मिड-कैप कंपनियों ने खास सेक्टर पर फोकस कर डबल डिजिट ग्रोथ हासिल की. यही वजह है कि निवेशकों का झुकाव अब इन छोटी लेकिन मजबूत कंपनियों की ओर बढ़ रहा है.
भारतीय IT इंडस्ट्री की मौजूदा तस्वीर
भारतीय IT सेक्टर आज देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है. दुनिया भर में टेक्नोलॉजी पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है. भारत की IT इंडस्ट्री FY15 में जहां करीब 118 अरब डॉलर की थी, वहीं FY25 तक इसके 283 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसमें बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट से आता है, खासकर अमेरिका से. यह सेक्टर भारत के GDP में करीब 10 फीसदी का योगदान देता है और लाखों लोगों को रोजगार देता है. क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों से ग्रोथ को और रफ्तार मिल रही है.
मिड-कैप IT कंपनियां क्यों आगे हैं
मिड-कैप IT कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी खास विशेषज्ञता है. ये कंपनियां ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, हेल्थकेयर और सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स जैसे सीमित लेकिन तेजी से बढ़ते सेक्टर पर फोकस करती हैं. इनके लिए क्लाइंट सिर्फ ग्राहक नहीं, बल्कि लंबे समय के पार्टनर होते हैं. इसलिए मंदी के दौर में भी इनके प्रोजेक्ट्स बंद नहीं होते.
इसके अलावा, छोटी बेस होने के कारण इन कंपनियों के लिए तेजी से ग्रोथ दिखाना आसान होता है. इन्हें बहुत बड़े सौदों की जरूरत नहीं पड़ती. छोटे और मध्यम साइज के डील से भी ये अच्छा प्रदर्शन कर लेती हैं. इनका फैसला लेने का सिस्टम भी तेज होता है, जिससे नई टेक्नोलॉजी को जल्दी अपनाया जा सकता है.
बड़ी IT कंपनियों की परेशानी
बड़ी IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने सिस्टम को चलाए रखने से आता है, जिसमें ग्रोथ की गुंजाइश कम होती है. ये कंपनियां अमेरिका की ब्याज दरों और बैंकिंग सेक्टर पर ज्यादा निर्भर हैं. साथ ही, इनके पास बड़ी संख्या में बिना प्रोजेक्ट वाले कर्मचारी होते हैं, जो मांग घटने पर मुनाफे पर दबाव डालते हैं. पिछले कुछ समय में टॉप मैनेजमेंट में बदलाव ने भी इनकी रफ्तार धीमी की है.
आगे का रास्ता
आने वाले समय में IT सेक्टर में AI और ऑटोमेशन से नई संभावनाएं खुलेंगी. फिलहाल मिड-कैप कंपनियां तेज ग्रोथ का विकल्प बनी हुई हैं, लेकिन जैसे ही वैश्विक हालात सुधरेंगे और बड़े AI प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे, बड़ी IT कंपनियां भी वापसी कर सकती हैं. निवेशकों के लिए यह संतुलन समझना अब सबसे जरूरी हो गया है.
डेटा सोर्स: TB, Groww
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