पावर सेक्टर के इस स्टॉक में बड़ी बिकवाली, तगड़े नतीजों के बावजूद 10 फीसद टूटा शेयर; जानें क्या है वजह

Quality Power Electrical Equipments Ltd के शेयर मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद इंट्राडे में करीब 10 फीसद टूट गए. कंपनी का रेवेन्यू 138.5 फीसद और पीएटी 65.7 फीसद बढ़ा, लेकिन घटते मार्जिन, बढ़ते खर्च और वन टाइम प्रावधानों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. EBITDA मार्जिन में गिरावट, कच्चे माल की बढ़ती लागत और सप्लाई चेन चुनौतियों का असर शेयर पर साफ दिखाई दिया.

पावर सेक्टर स्टॉक Image Credit: AI/CANVA

Power Sector Stock: पावर और एनर्जी ट्रांजिशन सेक्टर में काम करने वाली Quality Power Electrical Equipments Ltd के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली. कंपनी ने चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए, इसके बावजूद शेयर इंट्राडे में करीब 10 फीसद तक टूट गया. बाजार खुलने के बाद कंपनी का शेयर 1216 रुपये के पिछले बंद स्तर से गिरकर इंट्राडे में 1096 रुपये तक पहुंच गया. कंपनी का मार्केट कैप लगभग 9356 करोड़ रुपये है.

मजबूत नतीजे

कंपनी के नतीजे काफी मजबूत दिखाई दिए हैं. मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 138.5 फीसद बढ़कर 309.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 129.9 करोड़ रुपये था. वहीं ईबीआईटीडीए 56.5 फीसद बढ़कर 59.3 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी का शुद्ध मुनाफा यानी पीएटी भी 65.7 फीसद बढ़कर 50.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

इसके बावजूद निवेशकों का फोकस कंपनी के घटते मार्जिन और बढ़ते खर्चों पर रहा. तिमाही आधार पर देखा जाए तो कंपनी की स्थिति उतनी मजबूत नहीं दिखाई दी. दिसंबर 2025 तिमाही के मुकाबले मार्च 2026 तिमाही में ईबीआईटीडीए 79.3 करोड़ रुपये से घटकर 59.3 करोड़ रुपये रह गया, यानी इसमें 25.3 फीसद की गिरावट आई. इसी तरह पीएटी भी 62.8 करोड़ रुपये से घटकर 50.6 करोड़ रुपये पर आ गया.

मार्जिन में गिरावट ने बढ़ाई चिंता

कंपनी के शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मार्जिन पर बढ़ता दबाव माना जा रहा है. चौथी तिमाही में ईबीआईटीडीए मार्जिन घटकर 19.1 फीसद रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 29.1 फीसद था. वहीं दिसंबर तिमाही में यह 27.9 फीसद दर्ज किया गया था.

पीबीटी मार्जिन भी 27.4 फीसद से घटकर 17.3 फीसद रह गया. इसी तरह पीएटी मार्जिन 23.5 फीसद से फिसलकर 16.3 फीसद पर आ गया. निवेशकों को चिंता है कि कंपनी का रेवेन्यू तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मुनाफे में कमी और लागत नियंत्रण कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं.

वन टाइम खर्चों का पड़ा असर

कंपनी ने बताया कि चौथी तिमाही के आंकड़ों पर कुछ वन टाइम प्रावधानों का असर पड़ा. नए लेबर कोड लागू होने से भारतीय ऑपरेशंस और सब्सिडियरी कंपनियों में अतिरिक्त प्रावधान किए गए. इसके अलावा कंपनी की तुर्की स्थित सब्सिडियरी एंडोक्स पर हाइपरइन्फ्लेशन से जुड़े अकाउंटिंग एडजस्टमेंट का भी असर पड़ा. हालांकि मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया कि यह केवल अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है और इसका कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन या कैश फ्लो पर सीधा असर नहीं है.

कच्चे माल की लागत और सप्लाई चेन बनी चुनौती

कंपनी मैनेजमेंट के अनुसार बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन एक्जीक्यूशन क्षमता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. इलेक्ट्रिकल ग्रेड स्टील, कॉपर और विशेष इंसुलेशन सिस्टम की सप्लाई में लगातार दिक्कतें बनी हुई हैं. जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कंपनी की लागत बढ़ा रहा है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी लॉन्ग टर्म सप्लायर एग्रीमेंट, ड्यूल सोर्सिंग और वर्टिकल इंटीग्रेशन पर काम कर रही है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.