COMEX पर चांदी का स्टॉक 32% घटा, चीन के इक्सचेंज पर 2015 के बाद सबसे निचले स्तर पर, कीमतों पर क्या पड़ेगा असर
दुनिया के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंजों पर चांदी की उपलब्धता तेजी से घट रही है. अमेरिका और चीन दोनों बाजारों से मिल रहे संकेत सप्लाई के दबाव की ओर इशारा करते हैं. ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह स्थिति आने वाले समय में चांदी की कीमतों को नई दिशा दे सकती है.
दुनिया के बड़े कमोडिटी एक्सचेंजों पर चांदी के भंडार तेजी से घट रहे हैं और इससे बाजार में हलचल बढ़ गई है. अमेरिका के COMEX और चीन के Shanghai Futures Exchange (SHFE) पर चांदी का स्टॉक मल्टी-ईयर लो के करीब पहुंच गया है. निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह सवाल अहम हो गया है कि क्या चांदी की घटती उपलब्धता आने वाले समय में कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है, या दाम और लुढ़केंगे.
COMEX पर चांदी का स्टॉक तेजी से घटा
अमेरिका के कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर चांदी का कुल स्टॉक 26 फरवरी तक घटकर 360.64 मिलियन औंस रह गया. यह एक दिन पहले के मुकाबले 1.21 मिलियन औंस यानी करीब 0.33% की गिरावट है. अगर पिछले कुछ महीनों से तुलना करें तो तस्वीर और भी साफ होती है. अक्टूबर 2025 में COMEX पर चांदी का स्टॉक करीब 532 मिलियन औंस था, यानी अब तक इसमें करीब 32% की बड़ी गिरावट आ चुकी है.
COMEX पर चांदी को दो हिस्सों में बांटा जाता है- Registered और Eligible. Registered सिल्वर वह होती है जो सीधे फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की डिलीवरी के लिए उपलब्ध रहती है. यह स्टॉक अब घटकर 90 मिलियन औंस से नीचे, यानी करीब 86.13 मिलियन औंस रह गया है. यह स्तर बाजार के लिए संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इससे सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है.
वहीं Eligible सिल्वर, जो मानकों पर खरी उतरती है लेकिन डिलीवरी के लिए अभी वारंटेड नहीं है, वह भी घटकर करीब 274.5 मिलियन औंस रह गई है.
चीन में भी चांदी की उपलब्धता घटी
चीन के Shanghai Futures Exchange पर भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. 25 फरवरी तक यहां चांदी का स्टॉक घटकर 346.369 टन रह गया, जबकि एक दिन पहले यह 355.830 टन था. इससे पहले 9 फरवरी को स्टॉक गिरकर 318.546 टन तक पहुंच गया था, जो 2015 के बाद का सबसे निचला स्तर है. लंबे समय के आंकड़े देखें तो मौजूदा स्टॉक 2021 के रिकॉर्ड हाई 3,091 टन से करीब 89% कम है.
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चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है
एक्सचेंजों पर चांदी की घटती उपलब्धता आमतौर पर सप्लाई टाइट होने का संकेत देती है. मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेश की मांग बनी रहती है, तो कम स्टॉक कीमतों को सहारा दे सकती है. हालांकि, कीमतों की दिशा वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरों और डॉलर की चाल पर भी निर्भर करेगी.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
