ये हैं 3 ‘टैरिफ-प्रूफ’ शेयर, इन पर अमेरिकी फैसले का नहीं होता कोई असर! स्टॉक पर रख सकते हैं नजर

अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितता के बीच घरेलू बाजार में कुछ ऐसे ‘टैरिफ-प्रूफ’ शेयर भी हैं जिन पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ने या घटने से कोई खास असर नहीं पड़ता है. . इनमें रेल विकास निगम, इको रीसाइक्लिंग और HG इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयर शामिल हैं. मजबूत ऑर्डर बुक, सरकारी कैपेक्स और दीर्घकालिक ग्रोथ रणनीति के चलते निवेशक इन्हें वॉचलिस्ट में रख सकते हैं.

टैरिफ फ्री शेयर Image Credit: canva

भारतीय एक्सपोर्ट पर अमेरिका के 500% तक टैरिफ लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर शेयर बाजार में चर्चाएं तेज हैं. ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी हो जाता है कि वे उन कंपनियों पर फोकस करें, जिनका कारोबार मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर आधारित हो और जो अंतरराष्ट्रीय टैरिफ जोखिम से काफी हद तक सुरक्षित हों. हम आपको ऐसे ही 3 शेयरों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें ‘टैरिफ-फ्री’ माना जा रहा है और जिनकी ग्रोथ स्ट्रैटेजी आने वाले समय में मजबूत दिख सकती है.

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL)

इस सूची में पहला नाम रेल विकास निगम लिमिटेड का है. कंपनी रेलवे से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है, जिसमें नई रेलवे लाइनें, गेज कन्वर्जन, विद्युतीकरण, मेट्रो सिस्टम, पुल, वर्कशॉप और पोर्ट कनेक्टिविटी शामिल हैं. इसके अलावा, स्टेशन मॉडर्नाइजेशन, लेवल क्रॉसिंग हटाने, ग्रीन बिल्डिंग्स और ट्रेनिंग फैसिलिटीज जैसे टर्नकी प्रोजेक्ट्स भी कंपनी संभालती है.

वित्तीय मोर्चे पर देखें तो Q2 FY26 में RVNL का रेवेन्यू 51,230 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि से थोड़ा ज्यादा है. हालांकि, कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर 2,065 करोड़ रुपये रह गया, जो सालाना आधार पर कमजोरी दर्शाता है. फिलहाल कंपनी के पास 900 अरब रुपये से ज्यादा का ऑर्डर बुक है. साथ ही, कंपनी कुछ हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) प्रोजेक्ट्स पर बोली लगा रही है, जिससे 20–25 साल तक स्थिर रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है. सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स और रेलवे सेक्टर पर फोकस के चलते RVNL की लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं.

इको रीसाइक्लिंग लिमिटेड

दूसरा शेयर ई-वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर से जुड़ी इको रीसाइक्लिंग का है. यह कंपनी ई-वेस्ट कलेक्शन, डेटा डिस्ट्रक्शन, रिवर्स लॉजिस्टिक्स, एसेट रिकवरी और रीसाइक्लिंग जैसी सेवाएं देती है. कंपनी का फोकस पूरी तरह घरेलू बाजार पर है, जिससे यह टैरिफ जोखिम से काफी हद तक बाहर रहती है.

Q2 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 144 करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 56 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. हाल ही में कंपनी ने वसई में 6,000 MTPA की नई लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग फैसिलिटी शुरू की है, जिससे कुल क्षमता 31,200 MTPA हो गई है. खास बात यह है कि यह विस्तार पूरी तरह इंटरनल एक्रुअल्स से किया गया है. आने वाले समय में कंपनी मिनरल रिकवरी फैसिलिटी शुरू करने की तैयारी में है, जिससे कोबाल्ट, निकल और मैंगनीज जैसे अहम मेटल्स की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी.

एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग

तीसरा नाम HG इंफ्रा इंजीनियरिंग का है जो EPC और HAM मॉडल के तहत सड़क, रेलवे और अन्य सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करती है. कंपनी के पास फिलहाल 13 राज्यों में 29 से ज्यादा सक्रिय प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें 7 रेल और मेट्रो प्रोजेक्ट भी शामिल हैं.

Q2 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 9,045 करोड़ रुपये रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 523 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी का ऑर्डर बुक सितंबर 2025 के अंत तक 1.39 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है. इसके अलावा, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसे नए सेगमेंट्स में भी कंपनी सक्रिय है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.