अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ फैसले से बाजार को राहत, जानें किन सेक्टर में दिखेगा दम, क्या है एक्सपर्ट की राय
पिछले एक साल में टैरिफ के जरिये करीब 175 अरब डॉलर वसूले गए थे. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि इन पैसों का क्या होगा और क्या रिफंड क्लेम की स्थिति बनती है. अगर रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों और ग्लोबल ट्रेड पर भी पड़ सकता है.
भारतीय शेयर बाजार में आने वाले सत्र, सोमवार को पॉजिटिव शुरुआत देखने को मिल सकती है. इसकी बड़ी वजह अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ आदेश को रद्द कर दिया गया है. कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के पास बिना कांग्रेस की मंजूरी के बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का एकतरफा अधिकार नहीं है. यह फैसला खास तौर पर एक्सपोर्ट आधारित सेक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.
क्या बदला है अब?
अब कारोबारियों पर 150 दिनों के लिए ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत एक समान 10 प्रतिशत की ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी लागू होगी. इस प्रावधान का पहली बार इस्तेमाल किया गया है. भारत के लिए यह बड़ा पॉजिटिव है, क्योंकि पहले प्रभावी टैरिफ करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच रहा था, जो अब घटकर 10 प्रतिशत रह सकता है. हालांकि 18 प्रतिशत की दर पर एक Interim trade understanding बनी थी, लेकिन उसे अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं किया गया था. ऐसे में अनिश्चितता कम होना अपने आप में राहत की खबर है.
किन सेक्टरों को फायदा?
टैरिफ को लेकर अनिश्चितता घटने से आईटी, फार्मा, मेटल, टेक्सटाइल और एनर्जी जैसे सेक्टरों में तेजी देखने को मिल सकती है. इन सेक्टरों की कंपनियों को अब लागत और मार्जिन को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी. साथ ही सभी देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से भारत को जो नुकसान अलग-अलग ट्रेड की वजह से हो रहा था, वह भी कम होगा. इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत हो सकती है.
एक और अहम पहलू
पिछले एक साल में टैरिफ के जरिये करीब 175 अरब डॉलर वसूले गए थे. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि इन पैसों का क्या होगा और क्या रिफंड क्लेम की स्थिति बनती है. अगर रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है तो इसका असर अमेरिकी कंपनियों और ग्लोबल ट्रेड पर भी पड़ सकता है. यह पहलू आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
आगे किन बातों पर नजर?
हालांकि मौजूदा घटनाक्रम बाजार के लिए पॉजिटिव है, लेकिन स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं है. अगर राष्ट्रपति किसी दूसरे अधिकार के तहत नए टैरिफ कदम उठाते हैं तो बाजार में फिर से वोलाटिलिटी लौट सकती है. आगे चलकर बाजार की दिशा अमेरिका में महंगाई के रुख, यूएस डॉलर इंडेक्स की चाल और ट्रेड से जुड़ी नई घोषणाओं पर निर्भर करेगी.
इस लेख को SBI सिक्योरिटीज के हेड, टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च सुदीप शाह ने लिखा है.
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