बड़े दांव की तैयारी में Waaree Energies, ग्रीन एनर्जी में अधिग्रहण और विस्तार करेगी कंपनी; रडार में रखें स्टॉक

Waaree Energies ग्रीन एनर्जी वैल्यू चेन में बड़े विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है. कंपनी अधिग्रहण के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर QIP के जरिए पूंजी जुटा सकती है. सोलर से आगे बैटरी, ट्रांसफॉर्मर और ग्रिड सेगमेंट पर फोकस के बीच शेयरों की चाल और होल्डिंग पैटर्न भी निवेशकों के लिए अहम संकेत दे रहे हैं.

वारी एनर्जीज के शेयर में तेजी. Image Credit: @Money9live

Waaree Energies to Expand Business: भारत की लीडिंग सोलर इक्विपमेंट निर्माता Waaree Energies ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाने की तैयारी में है. कंपनी न केवल पूरे ग्रीन एनर्जी वैल्यू चेन में अधिग्रहण के अवसर तलाश रही है, बल्कि जरूरत पड़ने पर Qualified Institutional Placement (QIP) के जरिए बाजार से पूंजी जुटाने का विकल्प भी खुला रखे हुए है. सोलर मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कीमतों पर दबाव और संभावित कंसोलिडेशन के बीच Waaree की यह रणनीति निवेशकों के लिए अहम संकेत मानी जा रही है.

दायरा बढ़ाना चाहती है वारी एनर्जीज

ईटी को दिए एक इंटरव्यू में कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हितेश दोशी ने कई बातों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि Waaree अब खुद को सिर्फ सोलर मॉड्यूल निर्माता तक सीमित नहीं रखना चाहती. कंपनी ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन, ग्रिड कनेक्टिविटी, EPC सेवाएं, साथ ही बैटरियों, इनवर्टर्स, ट्रांसफॉर्मर और इलेक्ट्रोलाइजर जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना बना रही है. उनका कहना है कि कंपनी ऐसे बिजनेस को टारगेट कर रही है, जिनमें स्केल के साथ-साथ क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता हो.

हालिया अधिग्रहण से मिलेगी रफ्तार

Waaree पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है. कंपनी ने हाल के समय में ट्रांसफॉर्मर निर्माता Kotsons और स्मार्ट मीटर बनाने वाली Racemosa Energy का अधिग्रहण किया है. दोशी के शब्दों में, आज ग्राहक केवल सोलर मॉड्यूल नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन चाहते हैं जिसमें EPC, ट्रांसफॉर्मर, बैटरी, जमीन, ग्रिड कनेक्टिविटी और फाइनेंसिंग तक शामिल है. Waaree इसी “एंड-टू-एंड पैकेज” मॉडल पर काम कर रही है.

QIP से भी जुट सकती है पूंजी

यह अधिग्रहण रणनीति कंपनी की करीब 30,000 करोड़ रुपये के बड़े कैपेक्स योजना का हिस्सा है, जो सोलर मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज और उससे जुड़े अन्य सेगमेंट्स में निवेश पर केंद्रित है. हालांकि कंपनी की मौजूदा कैश पोजीशन मजबूत बताई जा रही है, लेकिन मैनेजमेंट ने साफ किया है कि भविष्य में जरूरत पड़ी तो QIP के जरिए एक मजबूत फंड वॉर चेस्ट तैयार किया जा सकता है.

शुरू हो गई है तैयारी

Waaree खुद को एक एनर्जी ट्रांजिशन कंपनी के रूप में ढालने की दिशा में आगे बढ़ रही है. कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले 4-5 वर्षों में सोलर मॉड्यूल से होने वाली इनकम कुल रेवेन्यू का 40 फीसदी से भी कम रह जाए. इसी सोच के तहत Waaree ने अपनी बैटरी यूनिट Waaree Energy Storage Solutions में हाल ही में 1,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं. यह यूनिट अगले साल 4 GWh की लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने जा रही है. मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिहाज से भी Waaree मजबूत स्थिति में है. कंपनी अपनी घोषित 25 GW सोलर मॉड्यूल क्षमता के करीब पहुंच चुकी है, जिससे वह चीन के बाहर सबसे बड़ी सोलर मॉड्यूल निर्माता बन गई है. इसके अलावा, Waaree की मौजूदा 5.4 GW सोलर सेल क्षमता अगले वित्त वर्ष में 15 GW से अधिक होने की उम्मीद है, जबकि इसके बाद इनगोट और वेफर सेगमेंट में भी एंट्री की योजना है.

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कैसा है शेयरों का हाल?

सोमवार, 12 जनवरी को कंपनी के शेयर 1.27 फीसदी की तेजी के साथ 2,576.90 रुपये पर कारोबार करते हुए बंद हुए. हालांकि, पिछले कुछ समय से कंपनी के शेयर दबाव में दिख रहे हैं. पिछले 3 महीने में वारी एनर्जीज का स्टॉक 22 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. वहीं, सालभर के दौरान इसमें मात्र 0.97 फीसदी की तेजी आई. लेकिन आईपीओ खुलने के बाद शुरुआती कुछ दिनों में स्टॉक ने दमदार मजबूती दिखाई थी. मौजूदा समय में कंपनी का मार्केट कैप 73,212 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वहीं, स्टॉक का 52वीक हाई स्तर 2674.70 रुपये रहा वहीं, लो स्तर 2512 रुपये दर्ज किया गया.

शेयर होल्डिंग पैटर्न कैसा है?

कंपनी में प्रमोटर्स की मौजूदगी सबसे ज्यादा है. मौजूदा समय में प्रमोटर 64.22 फीसदी की हिस्सेदारी अपने पास रखते हैं. इसके बाद तकरीबन 26 फीसदी हिस्सेदारी रिटेल और दूसरे निवेशकों का है. 6.91 फीसदी पर विदेशी निवेशकों का हिस्सा है. बचे हुए 1.54 फीसदी पर घरेलू संस्थागत निवेशक और 1.31 फीसदी पर म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी है.

फोटो क्रेडिट- ग्रो

हालांकि, एक ध्यान देने वाली बात है कि पिछले 2 तिमाहियों में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी कम हुई है. जून, 2025 में जहां उनकी हिस्सेदारी 30 फीसदी थी वह घटकर 26 फीसदी के पास पहुंच गई है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.