जर्मनी ने भारतीय यात्रियों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का किया ऐलान, जानें- किसे मिलेगा इसका फायदा
इस कदम की घोषणा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत की पहली यात्रा के दौरान की गई. एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले के लिए मर्ज को धन्यवाद दिया. मर्ज ने अहमदाबाद में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. बर्लिन और नई दिल्ली इस समय एक बहुत ही अस्थिर ग्लोबल माहौल से गुजर रहे हैं.
जर्मनी ने सोमवार को घोषणा ऐलान किया कि वह भारतीय पासपोर्ट धारकों को देश से होकर गुजरने के लिए वीजी-फ्री ट्रांजिट सुविधा देगा, जिसका मकसद भारतीयों के लिए यात्रा को आसान बनाना है. इसका मतलब है कि कनेक्टिंग इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़ने के लिए जर्मनी के इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया में लेओवर के दौरान भारतीय नागरिकों को अब एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, यह सुविधा यात्रियों को अपने आप एयरपोर्ट छोड़ने, जर्मनी में घुसने या वहां रहने की इजाजत नहीं देती है.
पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर को दिया धन्यवाद
इस कदम की घोषणा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत की पहली यात्रा के दौरान की गई. एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले के लिए मर्ज को धन्यवाद दिया. उन्होंने इसे एक ऐसा कदम बताया जो न सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों को भी मजबूत करेगा.
क्योंकि यह सुविधा उन यात्रियों पर लागू नहीं होती जो टूरिज्म, बिजनेस या फैमिली विजिट के लिए जर्मनी जा रहे हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों को जर्मनी या दूसरे शेंगेन देशों में जाने के लिए अभी भी वैलिड वीजा की जरूरत होगी.
पीएम मोदी और मर्ज की अहमदाबाद में मुलाकात
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार को यूरोपियन यूनियन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और भारत के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत दौरे पर आए. मर्ज ने अहमदाबाद में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. बर्लिन और नई दिल्ली इस समय एक बहुत ही अस्थिर ग्लोबल माहौल से गुजर रहे हैं और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन से आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं.
बिजनेस और रक्षा संबंधों पर चर्चा
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत यात्रा के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने नई दिल्ली के साथ करीबी बिजनेस और रक्षा संबंधों पर चर्चा की, जिसका मकसद अपने मुख्य व्यापारिक साझेदारों, चीन और अमेरिका के साथ तनाव के बीच जर्मनी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था.
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