एंटी-डंपिंग ड्यूटी का झटका! Waaree Energies-Vikram Solar शेयरों में भारी बिकवाली, जानें क्या है मामला?
इस खबर के बाद शेयरों में सीधा असर दिखा. सुबह करीब 10:45 बजे Waaree Energies का शेयर गिरकर करीब 3,283 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि Vikram Solar का शेयर करीब 222 रुपये के आसपास नजर आया. इसके अलावा, सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. वहीं, रिलायंस पावर के शेयरों में भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली.
गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. इस दौरान लगातार रैली कर रहे रिन्यूएबल स्टॉक में गिरावट देखने को मिली. इस दौरान Waaree Energies के शेयर करीब 4 प्रतिशत गिर गए, जबकि Vikram Solar में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. यह गिरावट अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट द्वारा भारत समेत कुछ देशों से आने वाले सोलर प्रोडक्ट्स पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने के फैसले के बाद आई है.
क्या है पूरा मामला?
अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल पर शुरुआती एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है. भारत पर करीब 123.04 प्रतिशत, इंडोनेशिया पर 35.17 प्रतिशत और लाओस पर 22.46 प्रतिशत ड्यूटी तय की गई है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों की कंपनियां अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर सामान बेच रही थीं, जिससे वहां की घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा था.
क्यों अहम है यह फैसला?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन तीन देशों का अमेरिका के सोलर इम्पोर्ट में बड़ा हिस्सा है. पिछले साल करीब 4.5 अरब डॉलर के सोलर प्रोडक्ट्स इन देशों से अमेरिका गए, जो कुल इम्पोर्ट का लगभग दो तिहाई है. ऐसे में यह फैसला भारतीय सोलर कंपनियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका उनके लिए एक अहम एक्सपोर्ट मार्केट है.
शेयरों पर असर
इस खबर के बाद शेयरों में सीधा असर दिखा. सुबह करीब 10:45 बजे Waaree Energies का शेयर गिरकर करीब 3,283 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि Vikram Solar का शेयर करीब 222 रुपये के आसपास नजर आया.
इसके अलावा, सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. वहीं, रिलायंस पावर के शेयरों में भी 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. निवेशकों ने इस खबर के बाद मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे दबाव और बढ़ गया.
आगे क्या होगा?
अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट इस मामले में अंतिम फैसला जुलाई और सितंबर के बीच ले सकता है. अगर अंतिम ड्यूटी भी इसी स्तर पर रहती है, तो भारतीय कंपनियों की अमेरिका में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है और एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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