क्या होती है मॉक ट्रेडिंग, जिसकी वजह से छुट्टी वाले दिन भी खुलेगा बाजार, शेयरों के भाव पर भी पड़ेगा असर?
मॉक ट्रेडिंग सेशन की वजह से 3 जनवरी को शेयर बाजार खुला रहेगा. इसमें कोई असली खरीद-बिक्री नहीं होती है. यह सेशन एक्सचेंज द्वारा सिस्टम, सॉफ्टवेयर और रिस्क मैनेजमेंट की जांच के लिए कराया जाता है. इस दौरान दिखने वाले भाव अस्थायी होते हैं और सेशन खत्म होते ही वास्तविक क्लोजिंग प्राइस अपडेट हो जाते हैं.
आमतौर पर शेयर बाजार शनिवार और रविवार को बंद रहता है. इन दिनों BSE और NSE में कोई ट्रेडिंग नहीं होती है. लेकिन इस बार नए साल के पहले शनिवार यानी 3 जनवरी को बाजार खुला रहेगा. इसकी वजह मॉक ट्रेडिंग सेशन है. नाम में ट्रेडिंग शब्द होने के कारण कई निवेशकों को लगता है कि इस दिन असली खरीद-बिक्री होगी, जबकि हकीकत कुछ और है. आइए जानते हैं.
क्या होती है मॉक ट्रेडिंग?
मॉक ट्रेडिंग शेयर बाजार की एक तकनीकी और सिस्टम टेस्टिंग प्रक्रिया है. इसे असली ट्रेडिंग से पहले एक तरह का ड्रेस रिहर्सल माना जाता है. इसका मकसद यह देखना होता है कि बाजार का ट्रेडिंग सिस्टम, सॉफ्टवेयर और तकनीकी ढांचा किसी भी असाधारण या आपात स्थिति में बिना रुकावट काम कर पा रहा है या नहीं. एक्सचेंज अपने मेंबर्स को निर्बाध और सुचारु ट्रेडिंग सुविधा देने के लिए लगातार एक मजबूत प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रयास करता रहता है.
एक्सचेंज ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़े रिकवरी व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म की नियमित जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. इसी उद्देश्य से समय-समय पर कंटिंजेंसी ड्रिल और मॉक ट्रेडिंग सेशन आयोजित किए जाते हैं. इन सेशनों की सफलता के लिए मेंबर्स की बड़े पैमाने पर भागीदारी बेहद जरूरी मानी जाती है.
इस शनिवार खुलेगा मार्केट?
बाजार से जुड़े सभी प्रतिभागियों को अपनी कंटिंजेंसी प्लानिंग और टेस्टिंग को बेहतर तरीके से शेड्यूल करने में मदद देने के लिए एक्सचेंज ने वर्ष 2026 के लिए कंटिंजेंसी ड्रिल और मॉक ट्रेडिंग सेशनों का कैलेंडर जारी किया है। इसी वजह से इस साल नए साल के पहले शनिवार को शेयर बाजार खुला रहेगा.
कब और किन सेगमेंट में होती है मॉक ट्रेडिंग?
आमतौर पर मॉक ट्रेडिंग महीने के पहले शनिवार को कराई जाती है. इसमें इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और करेंसी डेरिवेटिव्स जैसे सभी प्रमुख सेगमेंट शामिल होते हैं.
मॉक ट्रेडिंग के दौरान क्या शेयर के भाव बदल जाते हैं?
मॉक ट्रेडिंग के समय निवेशकों की स्क्रीन पर शेयरों के भाव, होल्डिंग और पोजिशन की वैल्यू अलग दिखाई दे सकती है. ये भाव असली नहीं होते, बल्कि मॉक सेशन पर आधारित होते हैं. इसी वजह से मार्केट वॉच और पोर्टफोलियो में अस्थायी तौर पर गलत कीमतें दिख सकती हैं. हालांकि, सेशन खत्म होते ही शुक्रवार के वास्तविक क्लोजिंग प्राइस दोबारा अपडेट कर दिए जाते हैं.
ट्रेडिंग मेंबर्स को क्या फायदा होता है?
ट्रेडिंग मेंबर्स इस दौरान दो विकल्प चुन सकते हैं. पहला, सीधे मॉक ट्रेडिंग सेशन में हिस्सा लेना. दूसरा, UAT यानी यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग एनवायरनमेंट का इस्तेमाल करना. जो मेंबर्स थर्ड पार्टी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या इन-हाउस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, वे इस मौके पर अपनी ट्रेडिंग एप्लिकेशन को अच्छे से परख सकते हैं.
इस दौरान कॉल ऑक्शन, ब्लॉक डील, रिस्क-रिडक्शन मोड, ट्रेडिंग हॉल्ट और असाधारण बाजार स्थितियों की टेस्टिंग की जाती है. मॉक ट्रेडिंग पूरी तरह रिस्क फ्री होती है. इसमें वर्चुअल पैसे से ट्रेड किए जाते हैं. यह नए निवेशकों के लिए सीखने का मौका देती है और अनुभवी ट्रेडर्स को बिना जोखिम नई स्ट्रेटजी आजमाने का प्लेटफॉर्म देती है. सबसे अहम बात यह है कि इससे असली बाजार को तकनीकी रूप से सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है.
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