शेयर बाजार में अंदरुनी मजबूती है बरकरार, एक्‍सपर्ट्स ने बताया क्‍या रहीं अंडरपरफॉर्मेंस की वजहें?

Money9 Financial Freedom Summit 2026: भारत में 2001-02 के बाद से दो सबसे बुल रन आए हैं. पहला 2003 से 2008 का था और 2009 से 2013 का था. भारत का बाजार इसलिए फिलहाल स्थिर इसलिए है, क्योंकि इसे म्युचूअल फंड इंडस्ट्री से ताकत मिल रही है.

इक्विटी, डेट या गोल्ड? मुश्किल समय में आपका बेस्ट फ्रेंड कौन है?

Money9 Financial Freedom Summit 2026: मनी9 के फाइनेंशियल फ्रीडम समिट 2026 के मंच पर आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के CEO राहुल अरोड़ा, धन के को-फाउंडर जयप्रकाश गुप्ता और आनंद राठी वेल्थ के ज्वाइंट CEO फिरोज अजीज ने शिरकत की. इक्विटी, डेट या गोल्ड? मुश्किल समय में आपका बेस्ट फ्रेंड कौन है? नाम के सेशन में इन तीनों दिग्गजों ने कई अहम पहलुओं पर बात की.

मार्केट की अनिश्चितता

फिरोज अजीज ने कहा कि मार्केट की अनिश्चितता मुझे लगता है अभी उतनी लंबी नहीं हुई है. अगर आप डेटा देखते हैं, तो डेढ़ साल हो गए मार्केट साइडवेज गया है. 24 सितंबर 2025 को निफ्टी ने 26200 का लेवल हिट किया था. करीब डेढ़ साल से मार्केट ने रिटर्न दिया और प्राइस करेक्शन 6 फीसदी का आया. उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि मार्केट कमजोर है, लेकिन मेरा मानना है कि ये मजबूत है. फिरोज अजीज ने कहा कि आप देखें, कि अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 25 फीसदी का टैरिफ लगाया. इसके बाद फिर 25 फीसदी का टैरिफ लगा. 15 अगस्त से पहले ये टैरिफ लगा और तब निफ्टी 24200 पर था, जो कि बीते दिन का लेवल था. युद्ध हो गया, टैरिफ लग गया, लेकिन फिर भी आप इस वित्तीय वर्ष में निफ्टी में 5 फीसदी पॉजिटिव हैं. तो मार्केट का यही नेचर है.

मार्केट ने क्यों किया अंडरपरफॉर्म?

जयप्रकाश गुप्ता से पूछा गया कि ऐसी क्या वजहें रही हैं कि पिछले डेढ़ साल में भारतीय मार्केट ने अंडरपरफॉर्म किया है. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देखिए अगर आप तुलनात्मक आधार पर देखें, इसमें कोई शक नहीं है कि भारत के बेहतरीन स्वीट स्पॉट पर है. डेमोग्रॉफी, डिमांड और डेमोक्रेसी, सभी चीज भारत के फेवर में है. लेकिन अगर आप तुलनात्मक आधार पर देखें, तो दो चीजों पर हम बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए. पहला करेंसी का डेप्रिसिएशन और दूसरा कि रिलेटिव टर्म्स पर जो लार्ज मार्केट थे, डेवलप्‍ड मार्केट थे, उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया.

उन्होंने कहा कि अगर आप किसी भी रिस्की या इमर्जिंग मार्केट में निवेश करने आते हैं, तो आप तुलना करते हैं कि कहां रिटर्न अधिक मिल रहा है. अगर डेवलप्‍ड मार्केट में रिटर्न अधिक मिल रहा है, तो फिर इमर्जिंग मार्केट में निवेश कम होता है. तो ये फैक्टर्स हैं अंडरपरफॉर्म के पीछे. लेकिन रिटेल निवेशकों का इन्फ्लो एसआईपी के जरिए रहा है, उसने मार्केट को वास्तविक रूप से सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीने में जो रिफॉर्म हुए हैं, अब उसके नतीजे का समय आ गया है.

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ताकत

राहुल अरोड़ा ने कहा कि अगर आप भारत को एक इंसान समझ लें, तो एक तरफ विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली की बात है, दूसरी तरफ भारत की क्षमता की बात है. यानी एक तरफ से कहानी अच्छी लगती है, लेकिन दूसरी तरफ से बिकवाली जारी है. उन्होंने बताया कि भारत में 2001-02 के बाद से दो सबसे बुल रन आए हैं. पहला 2003 से 2008 का था और 2009 से 2013 का था. भारत का बाजार इसलिए फिलहाल स्थिर है, क्योंकि जो म्युचूअल फंड इंडस्ट्री 2016 में 5 लाख करोड़ रुपये की थी, वो आज के समय में 80 लाख करोड़ रुपये की है. अगर आप वैश्विक स्तर पर देखें, तो सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री भी इस तरह से नहीं बढ़ी है.

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