AI से डरिए नहीं, कोरोना जैसा लड़िए, इंटेलिजेंसी और जवाबदेही की वैक्सीन बनाएगी इम्यून
AI अब सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का नया पैमाना बन चुका है. AI सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा और प्रतिभा के चार स्तंभों पर टिका है. इस इकोसिस्टम में आज तीन देश निर्णायक भूमिका में हैं. सबसे आगे अमेरिका और चीन है. जबकि भारत ने भी इस रेस में अहम पायदान पर पहुंच चुका है.
Artificial Intelligence Impact On Jobs And Challenge: AI क्या बला है? वाकई बला है या हमारे लिए अच्छा ? इनेबलर है या डिस्ट्रक्टर है? यह सवाल आज हर कोई पूछ रहा है कोई कह रहा है कि दुनिया से नौकरियां खत्म हो जाएंगी, आने वाले दस सालों पर सड़कों पर व्हाइट कॉलर बेरोजगार घूमेंगे, कोई कह रहा है कि जिस तरह अठारहवीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति आई, उसी तरह AI मानव इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट लेकर आया है. उसके समर्थकों का कहना है कि AI दुनिया में कुछ ऐसा करने वाला है, जिसकी मानव समाज ने कल्पना तक नहीं की होगी. यह एजुकेशन, हेल्थ, गवर्नेंस ,कृषि और उद्योग जगत में आमूल-चूल परिवर्तन करने वाला है. तो ये सब कुछ चैट जीपीटी, ग्रोक, Gemini से हो जाएगा. या अभी बहुत कुछ होने वाला है.
पहले 2050 की AI दुनिया में चलिए
खैर इस बहस से पहले हम आपको साल 2050 की एक AI City में लेकर चलते हैं, जिसे भारत,अमेरिका और चीन जैसे देशों ने मिलकर एक सुपर एआई सिस्टम से तैयार किया है. इस सुपर AI सिस्टम को टारगेट दिया गया है कि वह मानव जीवन को अधिक सुरक्षित,कुशल और समृद्ध बनाए. इस AI इनेबल दुनिया में ट्रैफिक खत्म है क्योंकि एआई खुद सिग्नल और वाहनों को नियंत्रित करता है, अपराध 80-90 फीसदी कम हो चुका है क्योंकि कैमरा और डाटा से अपराध पहले ही पहचान लिया जाता है, अस्पतालों में बीमारियों की पहले से पहचान हो रही है, यानी लोग स्वस्थ हैं. शेयर बाजार अस्थिर नहीं है क्योंकि एआई रिस्क का अनुमान लगा लेता है, सरकारें फैसले लेने से पहले एआई से सलाह लेने लगीं, सुदूर गांव में बैठे लोग भी टॉप एजुकेशन ले रहे हैं. यानी जीवन खुशहाल है. ऐसा क्यों हो रहा है क्योंकि मशीन काफी इंटेलिजेंट हो गई है.
जब मशीन मानव को करेगी कंट्रोल
लेकिन जब यही मशीन इंसान से ज्यादा समझदार हो जाए. तो क्या ऐसा ही रह जाएगा. क्योंकि 2050 तक आते AI इतना स्मार्ट हो चुका है कि , जो सुपर AI सिस्टम मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया था. वह यह मानने लगा है कि मानव का सबसे बड़ा खतरा मानव ही है, उसका मानना है कि मानव प्रदूषण, युद्ध, अपराध, करता है और वह संसाधनों का दुरुपयोग करता है. ऐसे में AI क्या करेगा…. फैक्ट्रियों पर कड़े प्रतिबंध लागू करने लगेगा, कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए यात्रा सीमित करने लगेगा. घृणा रोकने के नाम पर सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी करने लगेगा. यानी वह मानव के फैसले खुद करने लगेगा. और इंसान मशीन से नियंत्रित होने लगेंगे. यही डर इस समय दुनिया को सता रहा है.
AI क्या बला है
यह डर बेवजह नहीं है क्योंकि AI एक ऐसी तकनीक है जिसमें मशीनों और कंप्यूटरों को इस तरह बनाया जाता है कि वे इंसानों की तरह सोच सकें, सीख सकें और निर्णय ले सकें. सीधे शब्दों में कहें कि अगर कंप्यूटर सिर्फ निर्देश मानने के बजाय खुद सीखकर समझदारी भरा फैसला लेने लगे, तो वह AI है. उदाहरण से समझिए: जब आपका फोन आपके चेहरे से अनलॉक होता है तो यह एआई है. जब यूट्यूब या नेटफ्लिक्स आपकी पसंद के वीडियो सुझाता है तो यह एआई है.जब गूगल मैप्स ट्रैफिक देखकर तेज रास्ता बताता है तो यह एआई है.चैटबॉट या वर्चुअल असिस्टेंट से बात करना यह भी एआई है. पर आज जो हम AI देख रहे हैं वह उसकी शुरूआती दुनिया है.
आसान भाषा में कहें तो जो चीजें पहले इंसान अपने अनुभव से सीखता था, अब मशीनें अपने पास अनुभव ऐड करती चली जा रही हैं. जिसे मशीन लर्निंग कहा जाता है .इंटेलिजेंस शब्द इंसान के लिए यूज किया जाता है, मशीनें तो होती हैं जिन्हें काम करने के लिए थी ऑर्डर दिया जाता है. लेकिन अब मशीनों को AI के जरिए लर्निंग दे दी गई और वह यह ऑटोमेटिव लर्निंग पर चली गई. वह आपके बिहेवियर को वो ट्रैक कर इंटेलिजेंट होती जाएंगी.
बच्चे जैसा ग्रोथ कर रहा है AI
इस समय AI एक ग्रोथ करते हुए बच्चे जैसा है. जैसे बच्चा बार-बार देखकर और गलती करके सीखता है,वैसे ही एआई भी लाखों उदाहरण देखकर सीख रहा है. क्योंकि एआई तीन चीजों पर चलता है,डेटा – जितनी ज्यादा जानकारी मिलेगी, उतना बेहतर सीखेगा. एल्गोरिदम –जो डेटा से पैटर्न पहचानते हैं. मशीन लर्निंग –यानी मशीन का खुद अनुभव से सीखना.
ऐसे दौर में AI अब सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का नया पैमाना बन चुका है. इसीलिए भारत में आयोजित AI समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि AI डिस्ट्रक्टिव भी हो सकता है और बहुत कंस्ट्रक्टिव भी हो सकता है. उन्होंने कहा जीपीएस की तरह कमांड हमारे हाथ में रहनी चाहिए. जीपीएस हमें नहीं चलाए. हम जीपीएस को बताएंगे कैसे चलना है. इस रेस में कुछ देश इसको कॉन्फिडेंशियल रखने की कोशिश कर रहे हैं पर भारत में ऐसा नहीं हैं. आप यहां इनोवेशन करें और उसे पूरी दुनिया के लिए उपलब्ध कराएं. साथ ही उन्होंने एक मानव मॉडल भी दिया जिसे मोरल, अकाउंटेबल, नेशनल, एक्सेसिबल और वैलिड होना चाहिए.असल में भारत यह चाहता है कि दुनिया के लिए AI का ऐसा सिस्टम हो जो पारदर्शी और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर हो और वह विध्वंसक ना हो.
इन 4 स्तंभ पर टिका है AI, अमेरिका-चीन-भारत बड़े खिलाड़ी
AI सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा और प्रतिभा के चार स्तंभों पर टिका है. इस इकोसिस्टम में आज तीन देश निर्णायक भूमिका में हैं. सबसे आगे अमेरिका और चीन है. जबकि भारत ने भी इस रेस में अहम पायदान पर पहुंच चुका है. एआई के क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त दो आधारों पर टिकी है एक निजी पूंजी और एडवांस रिसर्च, साल 2023–25 के बीच वैश्विक निजी एआई निवेश का लगभग 40–50% हिस्सा अमेरिका में गया.OpenAI, Google, Microsoft न केवल बड़े लैंग्वेज मॉडल विकसित कर रही हैं, बल्कि उन्हें कॉमर्शियल प्रोडक्ट में बदल भी रही हैं. वहीं एडवांस एआई चिप्स में Nvidia का लगभग एकाधिकार है.
जबकि चीन की रणनीति सरकार-समर्थित निवेश और घरेलू पैमाने पर क्विक एग्जीकयूशन पर है.2017 की राष्ट्रीय एआई रणनीति के बाद चीन ने एआई को रक्षा, निगरानी,स्मार्ट सिटी और मैन्युफैक्चरिंग में बेहद तेजी से लागू किया है.वैश्विक एआई निवेश में चीन की हिस्सेदारी 20–25% तक पहुंच चुकी है.
वहीं भारत अभी निवेश और रिसर्च में अमेरिका-चीन से पीछे है, लेकिन इसकी ताकत ‘स्केल और टैलेंट’ है.वैश्विक एआई निवेश में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2-5% है. सरकार ने ‘IndiaAI Mission’ शुरू किया है. Reliance Industries, Tata Group और Adani Group एआई डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं. AI में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका डाटा है. क्योंकि AI को इंटेलिजेंट बनने के लिए डाटा चाहिए. और इसमें हम सुपर पावर जैसा व्यवहार कर सकते हैं. भारत यह दावा ठोक सकता है कि डाटा हमारा तो असली ताकत हमारे पास होनी चाहिए. इसलिए डाटा प्राइवेसी को लेकर भारत को बहुत सख्त होना होगा.
| पैरामीटर | अमेरिका | चीन | भारत |
|---|---|---|---|
| ग्लोबल AI निवेश | 40–50% | 20–25% | 2–5% |
| जीडीपी (ट्रिलियन $) | ~27 | ~18 | ~4 |
| चिप टेक्नोलॉजी | अग्रणी | विकसित हो रहा | प्रारंभिक चरण |
| टैलेंट पूल | मजबूत | बड़ा | बहुत बड़ा |
कौन करेगा राज
दुनिया में इस समय सेमीकंडक्टर और चिप को लेकर लड़ाई चल रही है. सेमीकंडक्टर वह डिवाइस है जो उस डेटा को बहुत ही फ्रैक्शन ऑफ सेकंड में आप तक पहुंचाता है. जितनी भी इंटेलिजेंट चीजें हैं वह सेमीकंडक्टर में आ गई . एनवीडिया ने वही क्रैक किया.ताइवान और चाइना की असली लड़ाई सेमीकंडक्टर डिवाइस है. असल में एआई की असली ताकत सॉफ्टवेयर से नहीं, बल्कि हार्डवेयर से आती है और उस हार्डवेयर का दिल है सेमीकंडक्टर चिप. सेमीकंडक्टर एक विशेष पदार्थ (जैसे सिलिकॉन) होता है जो बिजली को नियंत्रित तरीके से प्रवाहित करता है.इसी से छोटे-छोटे चिप (Integrated Circuits) बनते हैं।
ये चिप ही कंप्यूटर, मोबाइल, सर्वर, कार, सैटेलाइट हर- डिजिटल मशीन का दिमाग हैं. दुनिया में लोगों को यह समझ में आ गया कि आने वाला टाइम में जिसके पास यह चिप है वह राज करेगा.
AI की बढ़ती ताकत पैदा कर सकती है भ्रम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से आगे बढ़ रही है. एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने हाल ही में कहा कि AI का किशोरावस्था का दौर समाप्त हो गया है. उनका मतलब यह था कि AI अब प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक दुनिया में निर्णायक असल डाल रहा है. AI उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और सेवाओं को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है. विकसित देशों में यह पहले से ही श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बदल रही है. बैंकिंग, बीमा, मीडिया, कस्टमर सर्विस, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में ऑटोमेशन बढ़ रहा है.भारत के लिए यह अवसर और चुनौती दोनों है. हमारे पास विशाल युवा जनसंख्या है, लेकिन कौशल की कमी भी एक बड़ी समस्या है. ऐसे में लाखों पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. टिकट बुकिंग, डेटा एंट्री, लेजर, कॉल सेंटर जैसे कार्य स्वचालित हो सकते हैं.लेकिन इतिहास बताता है कि हर तकनीकी क्रांति ने नई नौकरियां भी पैदा की हैं. औद्योगिक क्रांति और कंप्यूटर युग में भी यही हुआ. AI के साथ भी नए कौशलों की मांग बढ़ेग जैसे डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा और एथिक्स जैसे क्षेत्रों में अवसर मिलेंगे.
यह भी देखना होगा कि AI की बढ़ती ताकत यह भ्रम पैदा कर सकती है कि मशीनें मनुष्य से बेहतर निर्णय ले सकती हैं. लेकिन मशीनें भी मानव द्वारा बनाए गए डेटा और एल्गोरिदम पर निर्भर हैं. यदि डेटा पक्षपाती है, तो परिणाम भी पक्षपाती होंगे. तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती हैनिगरानी और गोपनीयता के खतरे बढ़ सकते हैं. तकनीक स्वयं निष्पक्ष नहीं होती.उसके पीछे मनुष्य का दृष्टिकोण और इरादा होता है.इसलिए यह मान लेना कि एआई हर समस्या का समाधान है, एक खतरनाक सोच हो सकती है.
कोराना जैसा चैलेंज लेकर बनिए इम्यून
इस बीच AI के दुरूपयोग के मामले भी सामने आए हैं. जैसे एआई आधारित चैटबॉट और वॉयस क्लोनिंग तकनीक से ठगी के तरीके और एडवांस हो गए हैं.एआई की मदद से अब किसी व्यक्ति की नकली वीडियो या आवाज तैयार करना आसान हो गया है.निगरानी और नागरिक स्वतंत्रता पर खतरा भी बढ़ रहा है. क्योंकि हल पल आपकी निगरानी हो रही है. एआई का दुरुपयोग यह दिखाता है कि तकनीक नैतिकता से बड़ी नहीं हो सकती. ऐसे में भविष्य सुरक्षित तभी होगा जब मजबूत कानून, पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल साक्षरता हो. कुल मिलाकर AI आज हमारे लिए कोरोना के दौर जैसी सच्चाई है. जिससे डरने की जरूरत नहीं है बल्कि उससे हमें इम्यून होने की जरूरत है.
