ओटीपी बना साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार, हर चार में से 1 फ्रॉड OTP से, साइबर अपराध में तेलंगाना टॉप पर
देश में डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है. वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) अब जालसाजों का सबसे आसान हथियार बन गया है और कुल साइबर फ्रॉड में इसकी हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 अप्रैल से डायनामिक टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू किया जाएगा.
Cyber Fraud: डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच वन-टाइम पासवर्ड (OTP) साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार बनता जा रहा है. साइबर अपराधों में ओटीपी आधारित फ्रॉड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. इसी पृष्ठभूमि में रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल से ‘डायनेमिक टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अनिवार्य करने का फैसला किया है, ताकि मौजूदा ओटीपी प्रणाली की कमजोरियों को दूर किया जा सके.
46% साइबर अपराध फ्रॉड से जुड़े
दैनिक भास्कर के आंकड़ों के मुताबिक देश में होने वाले कुल साइबर अपराधों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी साइबर फ्रॉड की है, जो 46 प्रतिशत से अधिक है. चोरी के मामलों में भी तेजी देखी गई है. कुल साइबर अपराधों में ओटीपी फ्रॉड की हिस्सेदारी 2021 में 14.5% थी, जो 2022 में 16.7% और 2023 में बढ़कर 26.28% तक पहुंच गई. वहीं, साइबर स्टॉकिंग, सोशल स्टॉकिंग और अन्य अपराधों की तुलना में फ्रॉड के मामले कहीं अधिक तेजी से बढ़े हैं.
हर 4 में से 1 साइबर फ्रॉड ओटीपी से
साइबर फ्रॉड के मामलों में ओटीपी फ्रॉड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. 2021 में ओटीपी फ्रॉड का हिस्सा 14.48% था, जो 2022 में 16.66% और 2023 में बढ़कर 26.28% हो गया. ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़े फ्रॉड 2021 में 34.43% थे, जो 2023 में घटकर 22.78% रह गए. क्रेडिट/डेबिट कार्ड और एटीएम से जुड़े मामलों में भी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, लेकिन ओटीपी आधारित धोखाधड़ी सबसे तेजी से उभरती कैटेगरी बन गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि जालसाज फोन कॉल, फर्जी लिंक और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों से ओटीपी हासिल कर खातों को खाली कर रहे हैं.
तेलंगाना बना साइबर क्राइम का हॉटस्पॉट
महामारी के बाद तेलंगाना साइबर अपराधों का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. राज्य में अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 2018 में 3.3 थी, जो 2021 में 27.3, 2022 में 40.3 और 2023 में बढ़कर 47.8 हो गई. कर्नाटक में भी इसी अवधि में अपराध दर 8.9 से बढ़कर 32.3 तक पहुंची. अंडमान-निकोबार, केरल और पुडुचेरी में भी मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन तेलंगाना सबसे ऊपर रहा.
1 अप्रैल से बदलेगा ऑथेंटिकेशन सिस्टम
रिजर्व बैंक 1 अप्रैल से डायनेमिक टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू करने जा रहा है. इसके तहत पारंपरिक ओटीपी सिस्टम की जगह अधिक सुरक्षित अपनाई जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ओटीपी आधारित सुरक्षा अब पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ठग तकनीकी और मनोवैज्ञानिक दोनों तरीकों से लोगों को झांसा दे रहे हैं. नई व्यवस्था से डिजिटल लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाने और बढ़ते साइबर फ्रॉड पर अंकुश लगाने की उम्मीद की जा रही है.
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