साइबर फ्रॉड का नया तरीका, पेट्रोल पंप के जरिए कैश में बदली जा रही ठगी की रकम, गिरोह का खुलासा

Sir JJ Marg Police ने साइबर फ्रॉड के नए तरीके का खुलासा किया है जिसमें ठगी की रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर पेट्रोल पंप के जरिए कैश में बदला जाता था. इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. गिरोह में अलग अलग भूमिकाओं के लोग शामिल थे. पुलिस ने नकद रकम, मोबाइल और बैंक रिकॉर्ड बरामद किए हैं.

साइबर फ्रॉड Image Credit: FreePik

Cyber Fraud: मुंबई में साइबर फ्रॉड का एक नया और चौंकाने वाला तरीका सामने आया है. सर जेजे मार्ग पोलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ठगी की रकम को पेट्रोल पंप के जरिए कैश में बदलता था. इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है जबकि कई अन्य से पूछताछ की गई. पुलिस के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था. बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल कर पैसे का ट्रैक छुपाया जाता था. इस खुलासे से साइबर अपराध के नए तरीकों पर चिंता बढ़ गई है.

कैसे काम करता था यह पूरा रैकेट

लोकमत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरोह पहले ऑनलाइन ठगी के जरिए लोगों से पैसा हासिल करता था. इसके बाद उस पैसे को कई बैंक खातों में घुमाया जाता था ताकि उसकी पहचान छुपाई जा सके. आखिर में यह रकम पेट्रोल पंप के खातों में भेजी जाती थी. वहां इसे नकद में बदल दिया जाता था. इस तरह डिजिटल पैसे को आसानी से कैश में बदल दिया जाता था. यह पूरा सिस्टम बेहद सुनियोजित तरीके से चलता था.

आरोपी की भूमिका क्या थी

पुलिस ने राहुल कुमार सेन नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. वह इस गिरोह में कैश कन्वर्जन एजेंट के रूप में काम करता था. उसका काम पेट्रोल पंप के जरिए डिजिटल पैसे को नकद में बदलना था. इसके बदले उसे कमीशन मिलता था. पूछताछ में उसने अपने काम और नेटवर्क के बारे में कई अहम खुलासे किए हैं. पुलिस अब बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी है.

पेट्रोल पंप पर कैसे होता था खेल

पेट्रोल पंप इस रैकेट का अहम हिस्सा थे. यहां गिरोह के सदस्य ग्राहकों से कैश लेते थे और उतनी ही रकम बैंक खाते में जमा कर देते थे. इससे यह एक सामान्य लेनदेन जैसा दिखता था. असल में यह ठगी के पैसे को साफ करने का तरीका था. इस प्रक्रिया से पैसा आसानी से ट्रेस नहीं हो पाता था. यही इस रैकेट की सबसे बड़ी चाल थी.

संगठित नेटवर्क में बंटे थे काम

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह एक संगठित नेटवर्क की तरह काम करता था. कुछ लोग फर्जी या किराए के बैंक खाते उपलब्ध कराते थे. कुछ लोग पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करते थे. वहीं कुछ सदस्य पेट्रोल पंप पर कैश का काम संभालते थे. हर व्यक्ति को उसकी भूमिका के अनुसार कमीशन दिया जाता था. इससे पूरा सिस्टम बिना रुकावट चलता था.

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पुलिस को क्या मिला सबूत

पुलिस ने आरोपियों के पास से 47000 रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा कई मोबाइल फोन और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े अहम दस्तावेज भी मिले हैं. मोबाइल डेटा की जांच में अन्य संदिग्धों के लिंक भी सामने आए हैं. पुलिस ने कुछ बैंक खातों में 74000 रुपये फ्रीज भी किए हैं. इससे इस रैकेट के बड़े नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा रहा है.