50 साल बाद इंसान फिर से चांद की ओर, पहली बार कोई महिला करेगी ये कारनामा, जानें Apollo से कितना अलग Artemis II मिशन
NASA का Artemis II मिशन पुरानी कहानी को फिर से जीवित करने की कोशिश में है. लेकिन इस बार का मकसद सिर्फ चांद पर पहुंचना नहीं, बल्कि ठहरना भी है. अगर यह मिशन सफल होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब इंसान चांद पर रहना शुरू कर देगा और अंतरिक्ष में नई दुनिया बसाने का सपना सच हो जाएगा.
Artemis II Moon Mission Explained: करीब 50 साल बाद इंसान फिर से चांद के पास जा रहा है. इसके पहले साल 1972 में Apollo 17 मिशन हुआ था. अब NASA का Artemis II इस दिशा में बड़ा कदम है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन सुबह 4:05 बजे लांच कर दिया है. ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ. साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा. चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे. यह मिशन 10 दिन का है. करीब आधी सदी बाद, NASA का Artemis II मिशन पुरानी कहानी को फिर से जीवित करने की कोशिश में है. लेकिन इस बार का मकसद सिर्फ चांद पर पहुंचना नहीं, बल्कि ठहरना भी है.
मिशन का मकसद
मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है. नासा देखना चाहता है कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है. स्पेसक्राफ्ट अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा. नासा आर्टेमिस-II के बाद ‘आर्टेमिस-III’ मिशन पर काम करेगा. उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग की जाएगी. और अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो साल 2028 में आर्टेमिस-IV के जरिए इंसान एक बार फिर चांद पर कदम रखेगा.
पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुंचेगी
इस मिशन की खास बात यह है कि पहली बार कोई महिला चांद के इतने करीब जाएगी. यह इतिहास रचने वाली महिला का नाम क्रिस्टीना कोच हैं. 47 साल की इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच मिशन स्पेशलिस्ट हैं. उनके पास अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला (328 दिन) का रिकॉर्ड है. मिशन में नासा के तीन और कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के एक अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं.
- रीड वाइजमैन: यूएस नेवी के टेस्ट पायलट रह चुके वाइजमैन मिशन कमांडर हैं.
- क्रिस्टीना कोच: इंजीनियर और फिजिसिस्ट क्रिस्टीना कोच मिशन स्पेशलिस्ट हैं.
- जेरेमी हैनसन: कनाडा के पूर्व फाइटर पायलट जेरेमी हैनसन मिशन स्पेशलिस्ट हैं
- विक्टर ग्लोवर: मिशन के लिए पायलट चुने गए ग्लोवर चांद के करीब पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगें.
अगला कदम: चांद की सतह पर उतरने की तैयारी
Orion spacecraft और Space Launch System के जरिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चांद के करीब जाना सिर्फ एक उड़ान नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अगले अध्याय की टेस्टिंग है. अगर हम पुराने अपोलो मिशनों से तुलना करें, तो अंतर साफ नजर आता है.उस समय लक्ष्य सिर्फ चांद तक पहुंचना और दुनिया को अपनी ताकत दिखाना था. लेकिन अब Artemis program का उद्देश्य चांद पर लंबे समय तक रहने की तैयारी करना है. वैज्ञानिक चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहते हैं, जहां इंसान रहकर काम कर सके. यह अनुभव भविष्य में मंगल ग्रह पर जाने में भी मदद करेगा.
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यूट्यूब और नासा की वेबसाइट पर 24/7 कवरेज
दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल को घर बैठे देख सकते हैं. नासा अपने यूट्यूब चैनल और ‘NASA+’ प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग कर रहा है.ओरियन स्पेसक्राफ्ट के अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद वहां से लाइव व्यूज भी शेयर किए जाएंगे. यह मिशन केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है.अगर यह सफल होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब इंसान चांद पर रहना शुरू कर देगा और अंतरिक्ष में नई दुनिया बसाने का सपना सच हो जाएगा.
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