QR कोड स्कैन करते ही हो रही ठगी: जानें कैसे चकमा दे रहे साइबर चोर, चेतावनी जारी, ऐसे रहें सेफ

रिमोट एक्सेस स्कैम में ठग स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवाकर फोन कंट्रोल कर लेते हैं और सीधे ट्रांजैक्शन कर देते हैं. फेक पेमेंट रिक्वेस्ट भी आम है, जहां ठग रिफंड या प्राइज के नाम पर रिक्वेस्ट भेजते हैं, लेकिन अप्रूव करने पर पैसे निकल जाते हैं. हाल के मामलों में, ठग फेक UPI ऐप्स डिस्ट्रीब्यूट करते हैं, जो इंस्टॉल होते ही डेटा चुरा लेते हैं.

UPI Cyber Fraud Image Credit: Canva/ Money9

UPI Cyber Fraud: भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन्स को तेज और आसान बना दिया है. रोजाना करोड़ों लोग PhonePe, Google Pay और Paytm जैसे ऐप्स से पैसे ट्रांसफर करते हैं. लेकिन इसी सुविधा के साथ साइबर ठगों की नजर भी यूजर्स पर है. एक छोटी सी लापरवाही, जैसे गलत QR कोड स्कैन करना या अनजान लिंक पर क्लिक करना, हजारों-लाखों का नुकसान करा सकती है. हाल ही में इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के आधिकारिक हैंडल CyberDost ने एक जागरूकता वीडियो जारी किया, जिसमें UPI पेमेंट्स के दौरान 5 महत्वपूर्ण चीजें चेक करने की सलाह दी गई है.

ठगी कैसे होती है?

UPI ठगी के कई तरीके हैं, जो ज्यादातर यूजर्स की लापरवाही या अनजानापन का फायदा उठाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, फिशिंग स्कैम सबसे आम है, जहां ठग फेक मैसेज या ईमेल भेजकर UPI PIN या OTP मांगते हैं. उदाहरण के लिए, कोई ठग बैंक अधिकारी बनकर कॉल करता है और कहता है कि “आपका अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा, जल्दी PIN बताएं.” एक अन्य तरीका फेक QR कोड स्कैम है. ठग दुकान या ऑनलाइन फेक QR कोड शेयर करते हैं, जो स्कैन करने पर पैसे क्रेडिट की बजाय डेबिट कर देते हैं.

रिमोट एक्सेस स्कैम में ठग स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवाकर फोन कंट्रोल कर लेते हैं और सीधे ट्रांजैक्शन कर देते हैं. फेक पेमेंट रिक्वेस्ट भी आम है, जहां ठग रिफंड या प्राइज के नाम पर रिक्वेस्ट भेजते हैं, लेकिन अप्रूव करने पर पैसे निकल जाते हैं. हाल के मामलों में, ठग फेक UPI ऐप्स डिस्ट्रीब्यूट करते हैं, जो इंस्टॉल होते ही डेटा चुरा लेते हैं.

बचाव के तरीके

ठगी के बाद क्या करें?

अगर UPI फ्रॉड का शिकार हो गए तो घबराएं नहीं, तुरंत एक्शन लें. सबसे पहले बैंक को कॉल करके अकाउंट ब्लॉक करवाएं. UPI ऐप में हेल्प या कंप्लेंट सेक्शन से रिपोर्ट करें. फिर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाएं (cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें. लोकल पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं. जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, पैसे रिकवर होने की संभावना उतनी ज्यादा.

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