WhatsApp-Meta को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- कानून नहीं मानना तो छोड़ें भारत, डेटा प्राइवेसी से समझौता नहीं

WhatsApp की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने Meta को कड़ी चेतावनी दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में काम करने वाली हर टेक कंपनी को देश के कानून और संविधान का पालन करना होगा. यूजर्स की निजता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वरना कंपनी भारत छोड़ सकती है.

WhatsApp और सुप्रीम कोर्ट Image Credit: @Money9live

WhatsApp Meta and Supreme Court Privacy Case: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने टेक दिग्गज मेटा और उसकी मैसेजिंग ऐप WhatsApp को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि देश में काम करने वाली हर टेक कंपनी को भारत के कानून और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा. कोर्ट ने दो टूक कहा कि यूजर्स की प्राइवेसी से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

कोर्ट ने कहा ‘छोड़ दें भारत’

मंगलवार, 3 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने अमेरिकी कंपनी को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “आप हमारे देश के लोगों की निजता के साथ खेल नहीं सकते. हम आपको हमारे डेटा का एक भी अंक साझा करने की इजाजत नहीं देंगे. अगर आप भारत के कानूनों का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ सकते हैं.” यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को चुनौती दी गई है. इस मामले में कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने पहले ही भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था.

डेया शेयरिंग पॉलिसी पर बवाल

सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में WhatsApp की डेटा शेयरिंग नीति को “शोषणकारी” बताया. उन्होंने कहा कि कंपनी यूजर्स के निजी डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रही है. इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर आप हमारे संविधान का सम्मान नहीं कर सकते, तो भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं है. हम अपने नागरिकों की निजता से समझौता नहीं होने देंगे.”

कहां से शुरू हुआ मामला?

दरअसल, नवंबर 2024 में CCI ने WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी पर बड़ा फैसला सुनाया था. आयोग ने कहा था कि WhatsApp ने अपनी बाजार में मजबूत स्थिति का गलत फायदा उठाया और यूजर्स पर नई प्राइवेसी पॉलिसी स्वीकार करने का दबाव डाला. CCI का मानना था कि WhatsApp ने यह शर्त रखी कि अगर यूजर्स मैसेजिंग सर्विस का इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें Meta के अन्य प्लेटफॉर्म के साथ डेटा शेयरिंग की अनुमति देनी होगी. इसी आधार पर CCI ने WhatsApp पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. मंगलवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि यह जुर्माना कंपनी पहले ही जमा कर चुकी है.

कानूनी लड़ाई अब तक कहां पहुंची?

जनवरी 2025 में Meta और WhatsApp ने CCI के आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था. इसके बाद नवंबर 2025 में NCLAT ने WhatsApp पर डेटा शेयरिंग को लेकर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को हटा दिया, लेकिन जुर्माने को बरकरार रखा. इसके अलावा, CCI की ओर से यह भी अपील की गई थी कि WhatsApp को विज्ञापन के लिए यूजर डेटा साझा करने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए.

हालांकि ट्रिब्यूनल ने यह कहते हुए डेटा शेयरिंग की अनुमति दी कि इसमें ‘पावर के दुरुपयोग’ का मामला साबित नहीं होता. अब सुप्रीम कोर्ट में यह साफ हो गया है कि सरकार और अदालत दोनों ही टेक कंपनियों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं. कोर्ट का यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत में कारोबार करना है, तो भारत के कानून, संविधान और नागरिकों की निजता का सम्मान करना ही होगा.

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