सिंगल माल्ट, प्योर माल्ट या ब्लेंडेड व्हिस्की? जानिए आखिर क्या है इन तीनों में असली फर्क
भारत में प्रीमियम व्हिस्की का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आज भी ज्यादातर लोग Single Malt, Pure Malt और Blended Whisky के बीच का असली फर्क नहीं जानते. अगर आप व्हिस्की खरीदने या प्रीमियम ड्रिंकिंग की दुनिया को समझना चाहते हैं, तो इन तीनों कैटेगरी का अंतर जानना आपको दिलचस्प लग सकता है.
भारत में अब वह दौर बीत चुका है जब लोग सिर्फ बोतल पर लगा बड़ा ब्रांड देखकर व्हिस्की खरीद लेते थे. आज की नई पीढ़ी को इस बात से मतलब है कि उनकी ग्लास में जो लिक्विड है, वह बना कैसे है, उसका स्वाद कैसा है और उसकी कहानी क्या है.
भारतीय व्हिस्की बाजार 2024 में जहां 3.8 अरब डॉलर का था, वहीं 2033 तक इसके 6.8 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है. आज लोग ‘स्टैंडर्ड ड्रिंक्स’ से ऊपर उठकर प्रीमियम कैटेगरी को चुन रहे हैं. लेकिन बढ़ती दिलचस्पी के बाद भी ‘सिंगल माल्ट’, ‘प्योर माल्ट’ और ‘ब्लेंडेड व्हिस्की’ के बीच का फर्क ज्यादातर लोगों को नहीं पता.
एक कारखाने में तैयार होता है सिंगल माल्ट
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि ‘सिंगल माल्ट’ का मतलब एक ही बैरल में बनी व्हिस्की है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है.
यह 100% माल्टेड बारले (अंकुरित जौ) से बनती है. ‘सिंगल’ का सीधा सा मतलब है कि इसे किसी एक ही डिस्टिलरी में तैयार किया गया है. इसे पारंपरिक तांबे के बर्तनों (कॉपर पॉट स्टिल्स) में डिस्टिल किया जाता है और कम से कम 3 साल तक बलूत के ड्रमों में रखा जाता है. इसमें अलग से कोई स्पिरिट या फ्लेवर नहीं मिलाया जाता.
सिंगल माल्ट अपने बोल्ड और अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है. भारत का गर्म और बदलता मौसम इस व्हिस्की को लकड़ी के साथ तेजी से रिएक्ट करने में मदद करता है, जिससे इसमें कमाल का ट्रॉपिकल फ्रूट फ्लेवर और गहरा स्वाद आता है.
ब्लेंडेड माल्ट में स्वाद का होता है बैलेंस
प्योर माल्ट को ‘ब्लेंडेड माल्ट’ भी कहा जाता है. यह उन लोगों के लिए है जो माल्ट व्हिस्की का कड़क और शानदार स्वाद तो चाहते हैं, लेकिन उसमें थोड़ा स्वाद का बैलेंस भी ढूंढते हैं.
यह भी सिंगल माल्ट की तरह 100% माल्टेड बारले से ही बनती है और इसे भी कॉपर पॉट स्टिल्स में 3 साल तक पकाया जाता है.
अंतर सिर्फ इतना है कि इसमें दो या दो से अधिक अलग-अलग डिस्टिलरीज की माल्ट व्हिस्की को आपस में मिलाया जाता है. इससे डिस्टिलर्स को एक ऐसा स्वाद तैयार करने का मौका मिलता है जो ज्यादा संतुलित और कंसिस्टेंट हो.
ब्लेंडेड व्हिस्की के ज्यादा ग्राहक
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली और कॉकटेल में इस्तेमाल होने वाली कैटेगरी ब्लेंडेड व्हिस्की ही है. इसका मकसद किसी खास जगह का स्वाद देना नहीं, बल्कि हर बोतल में एक जैसा आसान स्वाद देना है.
इसमें सिंगल माल्ट के साथ ‘ग्रैन व्हिस्की’ (अनाज जैसे मक्का, गेहूं या राई से बनी व्हिस्की) को मिलाया जाता है. इसे लगातार चलने वाले स्टिल्स में डिस्टिल किया जाता है.
मास्टर ब्लेंडर कई पुरानी स्पिरिट्स को मिलाकर इसके तीखेपन को कम कर देते हैं. फसल कैसी भी हुई हो या मौसम कैसा भी रहा हो, ब्लेंडेड व्हिस्की की हर बोतल का स्वाद साल-दर-साल बिल्कुल एक जैसा रहता है. यह पीने में स्मूथ और हल्की होती है.
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आपके लिए कौन सी बेहतर है?
- सिंगल माल्ट चुनें: अगर आप व्हिस्की को बिना कुछ मिलाए (नीट) या सिर्फ थोड़ा पानी डालकर पीना पसंद करते हैं और आपको हर घूंट में मिट्टी, पानी और लकड़ी का खास और तीखा स्वाद चाहिए.
- प्योर माल्ट चुनें: अगर आप माल्ट व्हिस्की की रईसी तो चाहते हैं, लेकिन स्वाद में एक बढ़िया संतुलन और स्मूथनेस की तलाश में हैं.
- ब्लेंडेड व्हिस्की चुनें: अगर आप पार्टी या कैजुअल सोशल ड्रिंकिंग कर रहे हैं, व्हिस्की में बर्फ या सोडा मिलाते हैं, या कॉकटेल के शौकीन हैं.
भारत की डिस्टिलरीज आज जो सिंगल माल्ट बना रही हैं, वे दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रही हैं.
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