क्या है ‘Hexagon’ Alliance? जिसमें आया भारत का नाम, जानें क्या है बेंजामिन नेतन्याहू का प्लान

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने “Hexagon Alliance” नाम से एक नए क्षेत्रीय अलायंस का प्रस्ताव रखा है, जिसमें भारत, ग्रीस और साइप्रस सहित अन्य देशों को जोड़ने की बात कही गई है. इसका उद्देश्य ईरान-समर्थित “Shia axis” और “Sunni radical” धड़े के खिलाफ रणनीतिक सहयोग बढ़ाना है. हालांकि, इसे लेकर कोई औपचारिक समर्थन सामने नहीं आया है.

तन्याहू ने “Hexagon Alliance” नाम से एक नए क्षेत्रीय अलायंस का प्रस्ताव रखा है. Image Credit: money9live

Hexagon Alliance: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक प्रस्तावित “Hexagon” अलायंस बनाने की बात कही है. यह एक ऐसा बहुपक्षीय ब्लॉक होगा जो पश्चिम एशिया और उसके आसपास के देशों को एक मंच पर लाकर “कट्टरपंथी धुरों” के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़ा करेगा. हालांकि, अभी तक किसी भी देश ने औपचारिक रूप से इस पहल का समर्थन नहीं किया है. लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री के मुताबिक इसमें ग्रीस, साइप्रस के अलावा भारत भी शामिल हो सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर जाने वाले हैं.

क्या है प्रस्तावित ‘Hexagon’ अलायंस?

नेतन्याहू के मुताबिक इस अलायंस में इजराइल, भारत, ग्रीस और साइप्रस जैसे देश शामिल हो सकते हैं, साथ ही कुछ अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों को भी जोड़ा जा सकता है. “Hexagon” नाम सिक्स कॉर्नर फ्रेमवर्क का संकेत देता है, यानी यह बहु-देशीय रणनीतिक नेटवर्क होगा. इसका उद्देश्य समान सुरक्षा चिंताओं वाले देशों को एक साथ लाना बताया गया है. फिलहाल यह एक कांसेप्ट के रूप में सामने आया है, न कि किसी औपचारिक संधि या सैन्य समझौते के रूप में.

किसके खिलाफ काम करेगा यह अलायंस?

नेतन्याहू ने इसे दो “कट्टरपंथी धुरों” के खिलाफ बताया है. पहला, “Radical Shia Axis”, जिसमें ईरान और उससे जुड़े समूहों का जिक्र किया जाता है, जैसे लेबनान में हिज्बुल्लाह, इराक के शिया मिलिशिया और यमन के हूती. इजराइल का मानना है कि यह धड़ा उसके खिलाफ संगठित रणनीति के तहत काम करता है. दूसरा, उन्होंने “Emerging Radical Sunni Axis” की भी बात कही है.

कैसे काम कर सकता है यह अलायंस?

जानकारों का मानना है कि यह NATO जैसी औपचारिक सैन्य संधि नहीं होगी. इसकी स्ट्रक्चर अधिकतर सुरक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी, रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ट्रेड पर आधारित हो सकती है. कई जानकार इसे “ब्रांडिंग एक्सरसाइज” भी मानते हैं, यानी पहले से मौजूद द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय रिश्तों को एक बड़े फ्रेम में पेश करने की कोशिश.

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क्या भारत इसका हिस्सा बनेगा?

भारत और इजराइल डिफेंस, एग्रीकल्चर, वाटर मैनेजमेंट, साइबर सुरक्षा और हाई-टेक सेक्टर में सहयोग बढ़ा रहे हैं. हालांकि, भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से संतुलित और व्यावहारिक रही है. भारत अमेरिका, रूस और चीन तीनों से संबंध बनाए रखता है, साथ ही खाड़ी देशों और ईरान के साथ भी गहरे आर्थिक व ऊर्जा संबंध रखता है. ऐसे में किसी “Axis vs Axis” स्ट्रक्चर में औपचारिक रूप से शामिल होना भारत के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा हो सकता है. कई जानकारों का मानते हैं कि भारत सहयोग तो बढ़ा सकता है, लेकिन वैचारिक सैन्य धड़े से दूरी रख सकता है.