अमेरिका से कितनी पुरानी है ईरान की सभ्यता जिसे खत्म कर देना चाहते हैं ट्रंप, जानें ‘फारस’ ने दुनिया को क्या दिया
7 अप्रैल 2026 को ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान को धमकी देते हुए कह दिया कि वह उस देश की पूरी सभ्यता को एक रात में खत्म कर देंगे. ऐसे में क्या कोई देश किसी दूसरे देश की सभ्यता खत्म कर सकता है या फिर क्या दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश की सभ्यता को खत्म कर सकता है.
Iran civilization vs America: 14वीं सदी के एक महान अरब मुस्लिम इतिहासकार, दार्शनिक इब्न खल्दून ने अपनी प्रसिद्ध रचना मुकद्दिमा लिखा था कि, “The conqueror need not be stronger than the conquered. He need only be more willing to endure.” यानी कि “जीत हमेशा ताकत से नहीं, बल्कि धैर्य और सहन करने की क्षमता से होती है”.
मौजूदा समय में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से जो नजारा दिख रहा है, वह इस कथन में सटीक बैठता है. 38 दिनों से चल रहे इस युद्ध का असर केवल इन्हीं देशों पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दिखने लगा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को पूरी तरह से तबाह करने की धमकियां दे रहे हैं. 7 अप्रैल 2026 को ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान को धमकी देते हुए कह दिया कि वह उस देश की पूरी सभ्यता को एक रात में खत्म कर देंगे. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को अल्टीमेटम देते हुए लिखा कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा. उन्होनें कहा, मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद ऐसा ही होगा.
ऐसे में क्या कोई देश किसी दूसरे देश की सभ्यता खत्म कर सकता है या फिर क्या दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश की सभ्यता को खत्म कर सकता है. बता दें, इतिहास में कई लड़ाइयां हुई हैं और कई साम्राज्यों में उथल-पुथल भी देखी गई, लेकिन उनकी सभ्यताएं कभी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकीं, वे हमेशा किसी न किसी रूप में कायम रहीं. वहीं, जब कुछ साम्राज्यों का पतन हुआ, तब सभ्यताओं ने ही उन्हें उनका वास्तविक नाम दिया.
ईरान ने दुनिया को क्या दिया
- ईरान ने दुनिया को एक हजारों साल पुरानी सभ्यता के रूप में मानव इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और शासन व्यवस्था को गहराई से प्रभावित करने वाली विरासत दी.
- इब्न सीना ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया और उनकी पुस्तक Canon of Medicine लगभग 600 वर्षों तक यूरोप के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती रही.
- अल-बिरूनी ने पृथ्वी की परिधि का बेहद सटीक अनुमान लगाया, जो उस समय के लिए एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि थी.
- ओमर खय्याम ने गणित, खासकर बीजगणित में महत्वपूर्ण योगदान दिया और जटिल समीकरणों के हल निकाले.
- रूमी ने प्रेम, आध्यात्म और इंसानियत पर आधारित कविताएं लिखीं, जो आज भी दुनिया भर में लोकप्रिय हैं.
- हाफिज ने गजल और सूफी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
- फारसी कालीन (Persian Carpet) जैसी कला ने दुनिया को सुंदरता और बारीकी का अनूठा उदाहरण दिया.
- ईरान प्राचीन सिल्क रोड (Silk Road) का अहम हिस्सा रहा, जिसने एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़कर व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया.
कितनी पुरानी है अमेरिका की सभ्यता?
मौजूदा समय में जिसे दुनिया का सबसे ताकतवर या सुपरपावर देश कहा जाता है, वह अमेरिका साल 1776 में बना. यह अमेरिकन रिवॉल्यूशन के दौरान ब्रिटेन से स्वतंत्र होकर बना. अमेरिका की राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान करीब 250 साल पुरानी है. हालांकि, अमेरिका की जमीन पर इससे पहले नेटिव अमेरिकन यानी वहां के मूल निवासी हजारों साल से रहते थे, लेकिन जो आज का संयुक्त राज्य अमेरिका है उसकी व्यवस्था, संविधान और शासन प्रणाली 18वीं सदी में बनी.
ईरान की सभ्यता
यह समझने के लिए कि अमेरिकी और इजरायली बमबारी के बावजूद ईरान ढह जाएगा, सबसे पहले यह समझना होगा कि ईरान की सभ्यता क्या है. इसे भू-राजनीतिक, जीडीपी और मिसाइल भंडार से नहीं, बल्कि सभ्यतागत अर्थ में हजारों वर्षों में मापा जाता है.
ईरान का पुराना नाम फारस (Persia) था, जिसे 1935 से पहले आधिकारिक तौर पर पर्शिया कहा जाता था. यह एक अत्यंत समृद्ध सभ्यता थी, जिस पर मुख्य रूप से अचमेनिद फारसी साम्राज्य का शासन था, जिसे 550 ईसा पूर्व में सायरस महान ने स्थापित किया था. इसे फारसी साम्राज्य के रूप में भी जाना जाता था.
ईरानी पठार लगभग 7,000 साल से बसा हुआ है. छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक, साइरस महान के नेतृत्व में अचमेनिद फारसी साम्राज्य विश्व का सबसे बड़ा साम्राज्य बन गया था, जो एजियन सागर से लेकर सिंधु घाटी तक फैला हुआ था. जिसमें आधुनिक ग्रीस, मिस्र, तुर्की, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान शामिल थे और इस पर आतंक के बजाय सहिष्णुता और बहुलवाद के दर्शन द्वारा शासन किया जाता था, जिसका प्राचीन विश्व में कोई सानी यानी उसके समान कोई दूसरा नहीं था.
539 ईसा पूर्व में, बेबीलोन को बिना किसी युद्ध के जीतने के बाद साइरस ने अक्कादियन कीलाकार लिपि में एक फरमान जारी किया. जो अब लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में रखा है, जो 1971 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के पहले मानवाधिकार चार्टर के रूप में मान्यता दी गई थी. साइरस ने सभी दासों को मुक्त किया, सभी लोगों को अपना धर्म चुनने का अधिकार दिया, नस्लीय समानता स्थापित की और निर्वासित लोगों को अपने वतन लौटने की अनुमति दी, जिनमें बेबीलोन की कैद में रखे गए 50,000 यहूदी भी शामिल थे, जिन्हें उन्होंने फारसी राज्य के खर्च पर मुक्त कराया और जेरूशलेम में मंदिर के पुनर्निर्माण में सहायता प्रदान की.
यह वही सभ्यता है जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका जिसकी स्थापना 1776 में हुई थी, यानी साइरस द्वारा मानवाधिकार चार्टर जारी किए जाने के 2315 साल बाद हवाई हमलों से नष्ट करने का प्रयास कर रहा है. यह वही सभ्यता है जिस पर इजरायल राज्य जिसकी स्थापना 1948 में हुई थी, जब साइरस से पहले ही 2,487 वर्ष पुराना हो चुका था. अपनी सुरक्षा के नाम पर बमबारी करके उसे आत्मसमर्पण कराने का अधिकार जताता है.
बौद्धिक विरासत जिसे कोई बम छू भी नहीं सकता
जिस सभ्यता पर बमबारी हो रही है, वह इब्न सीना (980–1037 ईस्वी) की सभ्यता है, जिनकी कैनन ऑफ मेडिसिन छह शताब्दियों तक यूरोपीय विश्वविद्यालयों में चिकित्सा की प्राथमिक पाठ्यपुस्तक रही. यह अल-बिरूनी (973–1048 ईस्वी) की सभ्यता है, जिन्होंने पृथ्वी की परिधि की गणना एक प्रतिशत तक सटीक की थी. यह ओमर खय्याम की सभ्यता है, जिन्होंने उस समय घन समीकरणों के बीजगणितीय हल निकाले, जब यूरोप में किताबें जलाई जा रही थीं. यह रूमी और हाफिज की सभ्यता है, जिनकी कविताएं आज भी विश्व में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली रचनाओं में शुमार हैं फारसी, अरबी, अंग्रेजी, जर्मन, हिंदी और दर्जनों दूसरी भाषाओं में.
सभ्यताएं मॉडर्न टेक्नोलॉजी के हथियारों से पराजित नहीं होतीं
मालेक बेन्नाबी ने अपने उपनिवेशीकरण की अवधारणा में तर्क दिया कि सभ्यताएं केवल श्रेष्ठ हथियारों से ही पराजित नहीं होतीं. वे तब पराजित होती हैं, जब वे स्वयं को बनाए रखने की आंतरिक इच्छाशक्ति खो देती हैं. मौजूदा समय में ईरान में ऐसा कोई पतन दिखाई नहीं देता. यहां के शासन को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन जिस सभ्यता पर वह शासन करता है, उसे नहीं.
आधुनिक समय में सबसे अधिक प्रतिबंधों का सामना करने वाला देश ईरान
28 फरवरी, 2026 को अमेरिका का ईरान पर मिसाइल दागने से पहले भी, ईरान लगभग आधी सदी से संयुक्त राज्य अमेरिका से लड़ रहा और यह ड्रोन और मिसाइलों से नहीं, बल्कि अपनी अदम्य अस्तित्व क्षमता से.
अमेरिका ने पहला अमेरिकी प्रतिबंध नवंबर 1979 में लगाया गया था. राष्ट्रपति कार्टर द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के तहत विदेशों में रखी गई ईरान की लगभग 8.1 बिलियन डॉलर की संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया. लगातार आठ अमेरिकी प्रशासनों के दौरान – रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही राष्ट्रपतियों के शासनकाल में, ईरान के परमाणु अनुपालन और गैर-अनुपालन के दौर में प्रतिबंधों की व्यवस्था में कभी भी मौलिक रूप से ढील नहीं दी गई. इसे केवल बढ़ाया ही गया.
- 1979 — पहला प्रतिबंध. 8.1 अरब डॉलर की संपत्ति फ्रीज की गई. व्यापार प्रतिबंध.
- 1995-1996 (व्यापार और तेल पर पाबंदी): राष्ट्रपति क्लिंटन ने ईरान के साथ लगभग सभी व्यापार और तेल निवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया.
- 2010-2013 (बैंकिंग और ऊर्जा): अमेरिका ने ईरानी बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र को लक्षित करते हुए द्वितीयक प्रतिबंध लगाए, जिससे विदेशी कंपनियों को भी ईरान से व्यापार करने पर रोक लगी.
- 2018-2020 (ट्रंप प्रशासन): अमेरिका परमाणु समझौते से बाहर हो गया और 2018 में प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया, जिसमें तेल निर्यात, बैंकिंग और धातु उद्योग शामिल थे.
- 2020-2024 (अतिरिक्त प्रतिबंध): कासिम सुलेमानी की मौत के बाद, अमेरिका ने सर्वोच्च नेता के कार्यालय और ईरानी अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों (निर्माण, खनन) पर 2020 में अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए.
प्रतिबंध से जन्मा हथियार
इतने प्रतिबंधो की वजह से ईरान के लिए पुर्जे आयात करना संभव न होने के कारण भी उसने नई तकनीक इजाद करना सीख लिया. पश्चिमी तकनीक तक उसकी पहुंच न होने के कारण, उसने उसका रिवर्स इंजीनियरिंग कर लिया. एडवांस हथियार न खरीद पाने के कारण, उसने सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादन योग्य हथियार विकसित कर लिए. इनमें शाहेद-136 आत्मघाती ड्रोन अमेरिकी प्रतिबंधों की कसौटी पर खरा उतरा है. यह मजबूरी में पैदा हुई एक ऐसी रचना है, जो जबरन अलगाव की स्थिति में इंजीनियरिंग की कुशलता का रिजल्ट है. ऐसे में अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करके सैन्य रूप से शक्तिहीन बनाने के लिए पचास साल तक प्रयास किए है.
“आखिर में बस यही कहा जा सकता है कि सभ्यताएं हमलों से खत्म नहीं होती”
Latest Stories
क्या सामान्य हो रहा होर्मुज का माहौल? बढ़ती जहाजों की आवाजाही दे रही राहत के संकेत, लेकिन जोखिम अब भी बरकरार
ईरान ने ठुकराया ट्रंप का सीजफायर प्लान, 10-पॉइंट फॉर्मूले के साथ रखी स्थायी समाधान की शर्तें
अमेरिका-ईरान युद्ध विराम को लेकर मसौदा तैयार! जानें होर्मुज पर क्या हुआ तय, क्या जल्द मिलेगी खुशखबरी
