ईरान ने ठुकराया ट्रंप का सीजफायर प्लान, 10-पॉइंट फॉर्मूले के साथ रखी स्थायी समाधान की शर्तें

ईरान ने अमेरिका के अस्थायी सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर स्थायी समाधान की मांग रखी है. 10-सूत्रीय फ्रेमवर्क के जरिए तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव में बातचीत नहीं करेगा, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है.

ईरान ने ठुकराया ट्रंप का सीजफायर Image Credit: @Money9live

Iran Rejects Trump Ceasefire: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. ईरान ने अमेरिका की ओर से आए अस्थायी युद्धविराम यानी सीजफायर के प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है. तेहरान का कहना है कि वह किसी अस्थायी राहत के बजाय स्थायी और व्यापक समाधान चाहता है, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो. ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने अपनी प्रतिक्रिया अमेरिका तक पहुंचा दी है, जिसमें एक विस्तृत 10-सूत्रीय फ्रेमवर्क पेश किया गया है. यह जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा गया, जो इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.

ईरान की क्या हैं प्रमुख मांगें?

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समझौते के लिए उसकी शर्तें लॉन्ग टर्म और ठोस होनी चाहिए. उसके प्रस्ताव में कुछ प्रमुख बिंदु शामिल हैं-

  • क्षेत्र में जारी सभी संघर्षों का पूरी तरह से अंत
  • होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की गारंटी
  • अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना
  • युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण की प्रतिबद्धता

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका फोकस “टिकाऊ शांति” पर है, न कि कुछ समय के लिए लड़ाई रोकने पर.

‘दबाव में बातचीत नहीं’- तेहरान का सख्त रुख

ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि धमकी या दबाव के माहौल में कोई बातचीत संभव नहीं है. प्रवक्ता एस्माइल बाघई ने कहा कि ईरान अपनी “वैध मांगों” को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है और इसे किसी तरह का समझौता नहीं, बल्कि उसका अधिकार माना जाना चाहिए. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका की ओर से पहले दिए गए प्रस्ताव, जिसमें कथित तौर पर 15 बिंदु शामिल थे- ईरान को अस्वीकार्य लगे. तेहरान का कहना है कि उसने अपनी शर्तें तैयार कर ली हैं और समय आने पर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.

अमेरिका का रुख अभी अस्पष्ट

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि 45 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे मंजूरी नहीं दी है. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, यह कई विकल्पों में से एक है और फिलहाल सैन्य ऑपरेशन जारी हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव पर पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों के जरिए बातचीत चल रही है. साथ ही अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष संवाद भी जारी है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अगले 48 घंटों में किसी ठोस समझौते की संभावना बेहद कम है.

अस्थायी युद्धविराम पर क्यों एतराज?

ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह गाजा या लेबनान जैसे मॉडल को नहीं अपनाना चाहता, जहां अस्थायी युद्धविराम बार-बार टूटते रहे हैं. तेहरान को आशंका है कि ऐसे समझौते विरोधी पक्ष को दोबारा संगठित होने का मौका देते हैं, जिससे संघर्ष फिर भड़क सकता है.

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

इस बीच, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दबाव और बढ़ा दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह नहीं खोला, तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, जिसमें अहम ढांचों पर हमले भी शामिल हो सकते हैं. मौजूदा हालात में कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन दोनों पक्षों के रुख में बड़ा अंतर बना हुआ है. जहां अमेरिका तत्काल तनाव कम करने के लिए अस्थायी सीजफायर चाहता है, वहीं ईरान स्थायी समाधान पर अड़ा हुआ है.

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