20 साल की अमेरिकी शर्त ने तोड़ी इस्लामाबाद वार्ता की कमर; तेहरान ने कहा- न यूरेनियम रोकेंगे, न बाहर भेजेंगे
अमेरिका ने ईरान से 20 साल तक यूरेनियम एनरिचमेंट रोकने की मांग रखी, लेकिन तेहरान ने इसे ठुकराते हुए कम अवधि का प्रस्ताव दिया. लंबी बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो पाया. इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है और परमाणु विवाद फिर से केंद्र में आ गया है.

इस्लामाबाद में कई दिनों तक चले कूटनीतिक महामंथन के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की कोशिशें नाकाम हो गईं. दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी थीं, लेकिन अंत में मेज पर सिर्फ तल्खी और अधूरे वादे ही बचे रहे. मीडिया के सामने दोनों देशों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, अमेरिका ने जहां परमाणु हथियार न बनाने की सख्त शर्तें सामने रखीं, वहीं ईरान ने वॉशिंगटन पर एकतरफा और थोपी हुई शर्तें पेश करने का आरोप लगाया. लेकिन पर्दे के पीछे असल में क्या हुआ, अब उसकी एक-एक परतें खुल रही हैं.
अमेरिकी न्यूज एजेंसी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत के टूटने की सबसे बड़ी वजह यूरेनियम एनरिचमेंट (संवर्धन) को लेकर उपजा विवाद रहा.
20 साल की पाबंदी और यूरेनियम का विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने बेहद सख्त शर्त रखी थी कि उसे अगले 20 साल तक यूरेनियम एनरिचमेंट (यूरेनियम को परमाणु ईंधन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया) पर पूरी तरह रोक लगानी होगी. अमेरिका का तर्क था कि परमाणु हथियारों की दौड़ को रोकने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है. हालांकि, तेहरान इस लंबी अवधि की पाबंदी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था. ईरान का कहना था कि वह केवल कुछ ही वर्षों (सिंगल डिजिट) के लिए इस पर विचार कर सकता है. दोनों पक्षों के बीच इस ‘समय सीमा’ को लेकर इतनी गहरी खाई थी कि कोई भी अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं हुआ.
सिर्फ समय ही नहीं, यूरेनियम के स्टॉक को लेकर भी पेच फंसा रहा.
अमेरिका ने मांग की थी कि ईरान अपना सारा हाइली एनरिच्ड यूरेनियम (HEU) देश से बाहर भेजे. ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. इसके बजाय तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी में इस सामग्री को ‘डाइल्यूट’ करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन बात नहीं बनी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस और ईरान की नाराजगी
रविवार सुबह तक ईरानी प्रतिनिधिमंडल को लग रहा था कि एक शुरुआती समझौता हो जाएगा. लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. वेंस ने अपनी बातों में कहीं भी समझौते के संकेत नहीं दिए, बल्कि डेडलॉक के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहरा दिया. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिकी टीम अब वापस लौट रही है.
Axios ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया, वेंस के इस रुख से ईरानी खेमा बुरी तरह भड़क गया. बातचीत की मेज पर शामिल ईरानी सांसद सैय्यद महमूद नबवियां ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि अमेरिका की दो परमाणु मांगों (यूरेनियम हटाने और 20 साल की रोक) ने ही समझौते का गला घोंट दिया. वहीं, इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भी बताया कि वेंस ने उन्हें फोन पर इन्हीं दो मुद्दों को बातचीत टूटने की मुख्य वजह बताया.
ब्लॉकचेड और कूटनीतिक कोशिशें
बातचीत विफल होते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर नाकाबंदी की घोषणा कर दी, जिसे उन्होंने समझौते के लिए दबाव बनाने का एक जरिया बताया. फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है क्योंकि युद्धविराम की मियाद 21 अप्रैल को खत्म हो रही है. ऐसे में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश फिर से दोनों पक्षों को मेज पर लाने की कोशिशों में जुट गए हैं.
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मिस्र के विदेश मंत्री इस हफ्ते वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलने वाले हैं. तुर्की के विदेश मंत्री फिदान और खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन भी इस मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. भले ही इस्लामाबाद में फिलहाल बात बिगड़ गई हो, लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि पर्दे के पीछे संपर्क अब भी जारी है और दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.