अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी शांति वार्ता! सीजफायर डेडलाइन से पहले टेबल पर आएंगे दोनों देश

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अब दूसरे दौर की आमने-सामने बातचीत की तैयारी हो रही है. सीजफायर खत्म होने से पहले समझौते की कोशिश तेज हो गई है, जिसमें पाकिस्तान और जेनेवा संभावित मेजबान के तौर पर सामने आए हैं.

ईरान-अमेरिका शांति वार्ता Image Credit: Jacquelyn Martin - Pool/Getty Images

दुनियाभर की नजरें एक बार फिर अमेरिका और ईरान पर टिक गई हैं. दोनों देशों के बीच छिड़ी छह हफ्ते की जंग को खत्म करने के लिए राजनयिक स्तर पर कोशिशें तेज हो गई हैं. खबर है कि अगले हफ्ते मौजूदा युद्धविराम (Ceasefire) खत्म होने से पहले, दोनों देश एक निर्णायक समझौते तक पहुंचने के लिए दूसरे दौर की आमने-सामने की बातचीत पर विचार कर रहे हैं.

AP ने अमेरिकी अधिकारियों और इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि बातचीत का मकसद युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना है. हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर तारीख का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि यह अहम मुलाकात इसी गुरुवार को हो सकती है.

पाकिस्तान या जेनेवा: कहां सजेगी शांति की मेज?

चर्चा इस बात को लेकर भी गर्म है कि आखिर यह हाई-प्रोफाइल मीटिंग कहां होगी? एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, मेजबान के तौर पर एक बार फिर पाकिस्तान के नाम पर चर्चा हो रही है. पिछली बार की तरह इस्लामाबाद इस बातचीत का केंद्र बन सकता है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि स्विट्जरलैंड का जेनेवा शहर भी एक संभावित विकल्प हो सकता है.

फिलहाल जगह और समय को लेकर अंतिम मुहर लगना बाकी है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बातचीत से जुड़े अधिकारी अभी खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं. मध्यस्थता कर रहे देशों के एक राजनयिक ने तो यहां तक दावा किया है कि तेहरान और वाशिंगटन दोनों ही इस वार्ता के लिए राजी हो गए हैं.

ट्रंप का बड़ा दावा और पर्दे के पीछे की तैयारी

इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि “दूसरे पक्ष (ईरान) ने हमें कॉल किया है और वे डील करना चाहते हैं.” ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि ईरान पर दबाव काम कर रहा है या वह खुद अब इस जंग से बाहर निकलना चाहता है.

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हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि इस दूसरे दौर की बातचीत में क्या वही पुराने डेलीगेशन शामिल होंगे या फिर स्तर में कोई बदलाव किया जाएगा. व्हाइट हाउस की ओर से इस पूरे मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन पर्दे के पीछे की तैयारियां बताती हैं कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.

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