तीन साल बाद गेहूं के आटे के निर्यात को मिली आंशिक मंजूरी, 5 लाख टन तक एक्सपोर्ट की इजाजत; जानें क्या है शर्त
केंद्र सरकार ने करीब तीन साल बाद गेहूं के आटे और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स के निर्यात पर आंशिक राहत दी है. DGFT की अधिसूचना के तहत 5 लाख मीट्रिक टन तक निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसके लिए तय प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा.
Wheat Flour Export 5 Lakh Tonnes: केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने करीब तीन साल बाद आंशिक राहत देते हुए 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों के निर्यात की अनुमति प्रदान की है. इस संबंध में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 16 जनवरी को अधिसूचना जारी की है. वर्ष 2022 में घरेलू जरूरतों और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गेहूं के निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसे अब सीमित मात्रा में शिथिल किया गया है.
DGFT ने किया साफ
DGFT ने स्पष्ट किया है कि गेहूं के आटे और उससे जुड़े प्रोडक्ट का निर्यात सामान्य रूप से प्रतिबंधित ही रहेगा, लेकिन मौजूदा नीति शर्तों से अलग हटकर कुल 5 लाख टन तक निर्यात की विशेष अनुमति दी जाएगी. इसके लिए इच्छुक निर्यातकों को DGFT से पहले अनुमति लेनी होगी और तय की गई प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा. निर्यात के लिए आवेदन की प्रक्रिया को भी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है.
कैसे कर सकेंगे आवेदन?
DGFT के मुताबिक, पहले चरण में आवेदन 21 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे. इसके बाद, जब तक तय की गई कुल निर्यात मात्रा पूरी नहीं हो जाती, तब तक हर महीने के अंतिम 10 दिनों में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे. जिन निर्यातकों को अनुमति दी जाएगी, उनके लिए निर्यात प्राधिकरण यानी एक्सपोर्ट अथराइजेशन की वैलिडिटी जारी होने की तारीख से 6 महीने तक होगी. सरकार ने यह भी बताया है कि कौन-कौन सी इकाइयां निर्यात के लिए आवेदन कर सकती हैं.
कौन कर सकता है अप्लाई?
इसमें वैध IEC (इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कोड) और FSSAI लाइसेंस रखने वाली आटा मिलें और प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं, जो निर्माता-निर्यातक के रूप में काम कर रही हों. इसके अलावा, एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग यूनिट (EPU), विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित इकाइयां, तथा वैध IEC और FSSAI लाइसेंस रखने वाले मर्चेंट एक्सपोर्टर भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनका आटा मिलों के साथ सप्लाई समझौता या टाई-अप हो.
कमेटी के हाथ में अहम फैसले
निर्यात की मात्रा का आवंटन एक विशेष एक्सिम फैसिलिटेशन कमेटी द्वारा किया जाएगा. यह समिति सभी आवेदनों की जांच कर एलिजिबिलिटी और दूसरे शर्तों के आधार पर निर्यात की अनुमति देगी. सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने और डोमेस्टिक डिमांड पर किसी भी तरह का दबाव न पड़ने देने के उद्देश्य से की गई है. गौरतलब है कि गेहूं भारत की प्रमुख रबी फसल है. इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर के अंत से शुरू होकर नवंबर तक चलती है. गेहूं के अलावा जौ, चना, मसूर और ज्वार जैसी फसलें भी रबी मौसम में उगाई जाती हैं.
ये भी पढ़ें- देश में चीनी उत्पादन 22% बढ़ा, महाराष्ट्र सबसे आगे; उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने भी लगाई छलांग: ISMA