गमले में उगने वाली तुलसी करा सकती है लाखों की कमाई, पत्तियों से बीज तक बिकती है हर चीज; जानें खेती का A टू Z तरीका
तुलसी की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला एक शानदार विकल्प बनकर उभरी है. बढ़ती डिमांड और आसान खेती के कारण यह छोटे किसानों से लेकर युवाओं तक के लिए एक बेहतरीन बिजनेस मॉडल साबित हो सकती है. अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए, तो यह छोटा सा पौधा आपको बड़ी कमाई दे सकता है.
How to Do Tulsi Farming: देश में खेती का मॉडल तेजी से बदल रहा है और अब लोग पारंपरिक फसलों से हटकर ऐसी खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें कम लागत और ज्यादा मुनाफा हो. खास बात यह है कि अब शहरी लोग भी खेती को बिजनेस के तौर पर अपना रहे हैं. ऐसे में एक छोटा सा पौधा, जो हर घर में पूजा के लिए रखा जाता है, अब किसानों और युवाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. हम बात कर रहे हैं तुलसी की खेती की, जिससे आप सालाना लाखों रुपये कमा सकते हैं.
भारत में तुलसी की खेती के बढ़ते मौके
अब तुलसी सिर्फ धार्मिक पौधा नहीं, बल्कि यह एक मजबूत कमर्शियल क्रॉप बन चुकी है. आयुर्वेद, दवाइयों, कॉस्मेटिक्स और परफ्यूम इंडस्ट्री में इसकी भारी मांग है. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है.
खेती के लिए जरूरी जलवायु और मिट्टी
तुलसी की खेती के लिए 20 से 35 डिग्री तापमान सबसे अच्छा माना जाता है. ज्यादा ठंड और पाला इसकी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं 60 से 120 सेंटीमीटर तक की बारिश उपयुक्त होती है. अगर मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है और पीएच 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए.
भारत में उपलब्ध प्रमुख किस्में
देश में तुलसी की कई किस्में उगाई जाती हैं जैसे राम तुलसी, श्यामा तुलसी, कपूर तुलसी और स्वीट बेसिल. इनमें श्यामा तुलसी का तेल महंगा बिकता है, जबकि कपूर तुलसी में सुगंध ज्यादा होती है.
खेती की तैयारी और बुवाई का क्या है तरीका
तुलसी की खेती में नर्सरी विधि सबसे बेहतर मानी जाती है. बीजों को पहले तैयार बेड में बोया जाता है और 5 से 6 हफ्ते बाद पौधों को खेत में ट्रांसप्लांट किया जाता है. खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसमें गोबर की खाद मिलाई जाती है, जिससे उत्पादन बेहतर होता है.
खाद, सिंचाई और देखभाल
तुलसी की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन समय-समय पर सिंचाई जरूरी है. हर 10 से 12 दिन में पानी देना पर्याप्त होता है. खाद के रूप में गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग किया जाता है, जिससे तेल की क्वालिटी भी बेहतर होती है.
कटाई और उत्पादन
तुलसी की पहली कटाई 70 से 90 दिनों में हो जाती है और साल में 2 से 3 बार फसल ली जा सकती है. एक एकड़ में 50 से 60 क्विंटल हरी पत्तियां और 15 से 20 क्विंटल सूखी पत्तियां मिल सकती हैं. साथ ही 10 से 20 किलो तक तेल का उत्पादन भी संभव है.
इसे भी पढ़ें- बेमौसम बारिश से रबी फसलों को भारी नुकसान, 2.49 लाख हेक्टेयर प्रभावित; गेहूं पर सबसे ज्यादा मार
क्या है कमाई का पूरा गणित
तुलसी की खेती में प्रति एकड़ लागत करीब 28,000 से 30,000 रुपये आती है. सूखी पत्तियां 80 से 90 रुपये प्रति किलो और तेल 1500 से 2000 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है. इस हिसाब से किसान 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक आसानी से कमा सकते हैं और बेहतर मैनेजमेंट से यह कमाई 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
Latest Stories
बेमौसम बारिश से रबी फसलों को भारी नुकसान, 2.49 लाख हेक्टेयर प्रभावित; गेहूं पर सबसे ज्यादा मार
25 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार, खरीफ फसलों के लिए तैयारी तेज; जारी हुआ टेंडर
पश्चिम एशिया संघर्ष: फर्टिलाइजर प्लांट के लिए गैस की कीमतों में 60% बढ़ोतरी, सरकार पर बढ़ सकता है सब्सिडी का बोझ
